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Prayagraj News: जब जमीनी रास्ते हुए बंद, तब हवा से बनकर आई उम्मीद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:22 AM IST
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When land routes were cut off, hope arrived by air.
वायु सेना दिवस पर विशेष
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जब भी कोई बड़ा संकट आता है तब प्रयागराज की माटी से उठने वाली गड़गड़ाहट सिर्फ एक शोर नहीं, बल्कि करोड़ों धड़कनों के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत आवाज बन जाती है। बात चाहे सरहदों की हिफाजत की हो या फिर संकट में फंसे बेसहारा इंसानों को नई जिंदगी देने की। संगमनगरी स्थित भारतीय वायु सेना के मध्य वायु कमान का मानवीय चेहरा हमेशा से देश का मान बढ़ाता रहा है।
बृहस्पतिवार आठ अक्तूबर को भारतीय वायु सेना अपना स्थापना दिवस मनाएगी। ‘दमनीयः आत्मशत्रवः’ यानी शत्रु का दमन करो। इस आदर्श वाक्य के साथ प्रयागराज स्थित वायुसेना का मध्य वायु कमान लगातार देश के दुश्मनों पर प्रहार कर रहा है। रक्षा विभाग के प्रवक्ता एवं विंग कमांडर देवार्थो धर के अनुसार, पाकिस्तान से हुए तीन सीधे युद्ध में प्रयागराज स्थित मध्य वायु कमान (सीएसी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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मध्य वायु कमान की प्रमुख उपलब्धियां
भुज भूकंप राहत कार्य (जनवरी 2001): गुजरात में आए भीषण भूकंप के दौरान एएन-32, आईएल-76 और मी-17 विमानों के माध्यम से राहत टीमों, जरूरी उपकरणों और राहत सामग्री को प्रभावित क्षेत्रों तक तुरंत पहुंचाया गया।
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हिंद महासागर सुनामी अभियान (दिसंबर 2004): अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में संकट के समय संख्या 78 स्क्वाड्रन ने महज 10 दिनों में लगभग 250 घंटे की उड़ान भरकर 600 टन से अधिक सामग्री और करीब 3,500 यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
उत्तराखंड में ऑपरेशन राहत (जून 2013): पर्वतीय क्षेत्रों में चलाए गए सबसे चुनौतीपूर्ण अभियानों में से एक इस मिशन में संख्या 158 हेलीकॉप्टर यूनिट के मी-17वी5 हेलिकॉप्टरों ने 3,318 लोगों की जान बचाई और लगभग 78.35 टन राहत सामग्री पहुंचाई।
जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन मेघ राहत (सितंबर 2014): भीषण बाढ़ में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने और उन तक खाद्य व चिकित्सा सामग्री पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नेपाल भूकंप राहत अभियान (अप्रैल-मई 2015): पड़ोसी देश नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भारी परिवहन विमानों और हेलिकॉप्टरों के जरिए राहत सामग्री व चिकित्सा दल पहुंचाए।
यूपी और बिहार बाढ़ राहत (अगस्त 2017): सी-17 और एएन-32 विमानों से एनडीआरएफ व सेना की टुकड़ियों को तैनात किया गया, वहीं गोरखपुर से संचालित मी-17 हेलीकॉप्टर ने महराजगंज से 45 नागरिकों को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया।
राष्ट्रीय कोविड-19 प्रतिक्रिया (2020-2021): महामारी की दोनों लहरों के दौरान परिवहन विमानों का उपयोग कर देशभर में मेडिकल ऑक्सीजन, आवश्यक उपकरण, दवाएं और स्वास्थ्य कर्मियों का त्वरित परिवहन सुनिश्चित किया।
धराली-हर्षिल आपदा अभियान, उत्तराखंड (अगस्त 2025): मी-17, एएलएच एमके-III और सी-295 विमानों के समन्वय से फंसे लोगों की सुरक्षित निकासी की।
सबरी नदी बचाव अभियान, सुकमा (सितंबर 2025): तेज धाराओं के बीच झाड़ियों को पकड़े फंसे एक व्यक्ति को गरुड़ कमांडो ने हवा में स्थिर मी-17वी5 हेलीकॉप्टर से विन्च के जरिए सुरक्षित बचाया।
चित्रकूट बाढ़ बचाव कार्य (अगस्त 2026): चेतक हेलीकॉप्टर दल ने मुस्तैदी दिखाते हुए बाढ़ के पानी के बीच फंसे दो बुजुर्ग नागरिकों को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया।

इंद्रावती नदी बचाव अभियान, बस्तर (27 सितंबर 2026): उफनती नदी के बीच एक ढहती छत से तीन महिलाओं, तीन बच्चों और एक शिशु समेत 12 नागरिकों को गरुड़ कमांडो व मी-17वी5 चालक दल ने सुरक्षित निकाला।
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