Railway : जिसे बताया अनुपयोगी, अब वही कोर कर रहा रेल विद्युतीकरण, उठ रहे सवाल
देश के 70 फीसदी से ज्यादा रेलमार्ग करने वाले कोर प्रयागराज के लखनऊ समेत आठ परियोजनाओं द्वारा किए जा रहे काम पिछले वर्ष रेलवे बोर्ड ने संबंधित क्षेत्रीय रेलवे को दिए थे। कोर से यह काम उस वक्त छीने गए जब उसने पिछले वित्तीय वर्ष में रेल विद्युतीकरण करने का इतिहास रचा।
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प्रयागराज स्थित केंद्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन (कोर ) जिसे अनुपयोगी बताते हुए बंद किए जाने की तैयारी चल रही है अब वही रेल विद्युतीकरण कार्य को रफ्तार दे रहा है। तमाम जोनल रेलवे द्वारा विद्युतीकरण का कार्य धीमी गति से किए जाने के बाद रेलवे ने कोर प्रयागराज से ही विद्युतीकरण करवाना शुरू कर दिया है। पिछले माह अयोध्या में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह के पूर्व अकबरपुर-अयोध्या-बाराबंकी रेलखंड के बाद अब कोर को पूर्व सीमांत रेलवे में विद्युतीकरण किए जाने का काम सौंपा गया है।
दरअसल देश के 70 फीसदी से ज्यादा रेलमार्ग करने वाले कोर प्रयागराज के लखनऊ समेत आठ परियोजनाओं द्वारा किए जा रहे काम पिछले वर्ष रेलवे बोर्ड ने संबंधित क्षेत्रीय रेलवे को दिए थे। कोर से यह काम उस वक्त छीने गए जब उसने पिछले वित्तीय वर्ष में रेल विद्युतीकरण करने का इतिहास रचा। इसे लेकर रेल यूनियनों ने भी नाराजगी जाहिर की। हालांकि रेलवे बोर्ड ने कोर से कार्य छीनने के बाद संबंधित जोनल रेलवे को दे तो दिए लेकिन उसका असर यह रहा कि देश में रेल विद्युतीकरण के कार्य की गति धीमी हो गई।
अब पूर्वोत्तर रेलवे का ही उदाहरण ले। यहां अकबरपुर-अयोध्या-बाराबंकी रेलमार्ग का कार्य संबंधित जोनल रेलवे को अयोध्या में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा समारोह के पहले ही करना था, लेकिन कार्य की गति इतनी धीमी थी कि वह कार्य अप्रैल 24 तक पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा था। पूर्वाेत्तर रेलवे द्वारा इस कार्य में कुछ कठिनाई बताई गई। इसके बाद कोर प्रयागराज से संपर्क साधा गया।
अयोध्या से जुड़ा मामला होने के बाद कोर प्रयागराज के वरिष्ठ अफसरों के नेतृत्व में वहां एक टीम पहुंची। खास बात यह रही कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह के पूर्व ही अनुभवी टीम ने यह कार्य पूरा कर लिया। इसके बाद पीसीईई का यहां निरीक्षण भी हो गया। इसी तरह पिछले वर्ष ही कोर की न्यू जलपाईगुड़ी परियोजना के सारे कार्य पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे को सौंपे गए। लेकिन सीमांत रेलवे द्वारा कार्य में की जा रही लेटलतीफी को देखते हुए कोर के तीन अफसर समेत 15 सुपरवाइजरों की टीम वहां रेल विद्युतीकरण का कार्य करवाने के लिए नामित की। ऐसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि वहां रेल विद्युतीकरण का कार्य 31 मार्च 24 तक पूरा हो जाएगा।
संजीव सान्याल की रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल
कोर की उपयोगिता पर केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के इकोनॉमिक एडवाइजर संजीव सान्याल ने वर्ष 2022 में सवाल उठाए थे। उनके प्रस्ताव पर ही कोर प्रयागराज और उसकी सभी परियोजनाओं को बंद करने की तैयारी की गई। जिन जोनल रेलवे को रेल विद्युतीकरण के कार्य सौंपे गए, उनके पास इसका अनुभव कम है।
इस वजह से कार्य की लेट लतीफी को देखते हुए अब एक बार फिर से कोर प्रयागराज का ही सहारा लिया जा रहा है। कोर के पास रेल विद्युतीकरण का खासा अनुभव है। फिलहाल कोर को एक बार फिर से काम दिए जाने के बाद संजीव सान्याल की रिपोर्ट पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। क्योंकि कोर लगातार अपनी उपयोगिता दिखा रहा है।