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पश्चिमी बेंच के विरोध में आए प्रदेश के 58 जिले
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 21 Jan 2015 11:36 PM IST
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच बनाने ेका मुद्दा पूरब बनाम पश्चिम हो सकता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का दावा है कि एक फरवरी को महापंचायत से पूर्व उनके पास 58 जिलों के वकीलों का समर्थन पत्र आ चुका है। इन जिलों के अधिवक्ता हाईकोर्ट विभाजन के पक्ष में नहीं हैं। बार एसोसिएशन ने समर्थन देने वाले अधिवक्ता संगठनों को महापंचायत का न्यौता भेजा है। इनमें से अधिकांश के शामिल होने की उम्मीद भी है।
हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राकेश पांडेय और महासचिव डा. सीपी उपाध्याय के मुताबिक उनके पक्ष में पूर्वांचल, बुंदेलखंड और रुहेलखंड के लगभग सभी जिले हैं। समर्थनपत्र में इन जिलों के अधिवक्ता संगठनों ने सैद्धांतिक रूप से हाईकोर्ट बार के ‘एक प्रदेश एक हाईकोर्ट’ के नारे का समर्थन किया है। अगला कदम इन जिलों के जनप्रतिनिधियों का समर्थन हासिल करने का है। इस दिशा में भी काफी अहम सफलता बार एसोसिएशन को मिली है। अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों की राय भी हाईकोर्ट बार के पक्ष में है। फूलपुर सांसद केशव प्रसाद मौर्य की ओर से
विधि मंत्री को लिखे पत्र में 50 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात कर समर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। विद्वान अधिवक्ताओं की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट को लेकर वैधानिक स्थिति की समीक्षा भी की जा रही है। सभी मुद्दों को एक फरवरी को होने वाली महापंचायत में रखा जाएगा। बार कार्यकारिणी ने महापंचायत की तैयारियों को लेकर व्यापक समीक्षा की है ताकि आयोजन में कोई कोर कसर न रह जाए।
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हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राकेश पांडेय और महासचिव डा. सीपी उपाध्याय के मुताबिक उनके पक्ष में पूर्वांचल, बुंदेलखंड और रुहेलखंड के लगभग सभी जिले हैं। समर्थनपत्र में इन जिलों के अधिवक्ता संगठनों ने सैद्धांतिक रूप से हाईकोर्ट बार के ‘एक प्रदेश एक हाईकोर्ट’ के नारे का समर्थन किया है। अगला कदम इन जिलों के जनप्रतिनिधियों का समर्थन हासिल करने का है। इस दिशा में भी काफी अहम सफलता बार एसोसिएशन को मिली है। अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े जनप्रतिनिधियों की राय भी हाईकोर्ट बार के पक्ष में है। फूलपुर सांसद केशव प्रसाद मौर्य की ओर से
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विधि मंत्री को लिखे पत्र में 50 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
भाजपा के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात कर समर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। विद्वान अधिवक्ताओं की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट को लेकर वैधानिक स्थिति की समीक्षा भी की जा रही है। सभी मुद्दों को एक फरवरी को होने वाली महापंचायत में रखा जाएगा। बार कार्यकारिणी ने महापंचायत की तैयारियों को लेकर व्यापक समीक्षा की है ताकि आयोजन में कोई कोर कसर न रह जाए।
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