Cyber Crime : सजगता से दी साइबर ठगों को मात, बचा ली लाखों की रकम, इन टिप्स का प्रयोग कर आप भी बच सकते हैं
ऐसा करने वाले वह अकेले नहीं। सिर्फ साइबर थाने की बात की जाए तो मौजूदा साल में करीब एक दर्जन लोगों की रकम खाते में वापस कराई जा चुकी है। साइबर सेल की कार्रवाई को भी जोड़ लें तो यह संख्या दोगुनी से ज्यादा हो जाती है।
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प्रतापगढ़ के सरायराजा के रहने वाले संदीप कुमार को साइबर ठगों ने शिकार बनाया। मार्च में उनके खाते से 4.73 लाख रुपये उड़ा दिए। उन्होंने सजगता दिखाई और कुछ ही देर बाद नेशनल हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। इसका असर यह हुआ कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और उनकी रकम वापस करा दी।
ऐसा करने वाले वह अकेले नहीं। सिर्फ साइबर थाने की बात की जाए तो मौजूदा साल में करीब एक दर्जन लोगों की रकम खाते में वापस कराई जा चुकी है। साइबर सेल की कार्रवाई को भी जोड़ लें तो यह संख्या दोगुनी से ज्यादा हो जाती है। जानकारों का कहना है कि साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे के बीच लोग सजगता से इसका शिकार होने से बच सकते हैं।
प्रयागराज रेंज स्तर पर काम कर रहे साइबर थाना प्रभारी अतुल यादव बताते हैं कि साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर थोड़ी सी सजगता से साइबर अपराधियों को मात दी जा सकती है। उनके अनुसार, साइबर अपराध के मामलों में सबसे जरूरी समय है। वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में यह बेहद अहम होता है। ऐसी घटना होने पर जल्द से जल्द राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी होती है। इसमें बेसिक विवरण के साथ घटना के बारे में बताना होता है। शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद ही इस पर कार्रवाई शुरू हो जाती है।
ऐसे होती है कार्रवाई
सीओ बताते हैं कि साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज होते ही सबसे पहले उस खाते का पता लगाया जाता है, जिसमें रकम ट्रांसफर की गई हो। इसके बाद वह खाता जिस बैंक में होता है, उसे ईमेल के जरिए सूचित करके फ्रीज कराया जाता है। ताकि उससे किसी तरह का लेनदेन आगे न हो सके। इसका यह फायदा होता है कि साइबर अपराधी उस खाते से रकम निकाल नहीं पाएगा।
दरअसल ज्यादातर मामलों में साइबर अपराधी ठगी की घटनाओं में कई खातों का उपयोग करते हैं। शिकार के खाते से रकम उड़ाने के बाद वह एक से दूसरे खाते या यूपीआई अकाउंट में रकम ट्रांसफर करते हैं। यही वजह है कि समय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। एक खाते से दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर हो जाने पर कई खातों को फ्रीज कराना होता है, जिससे रकम बचने के आसार कम हो जाते हैं। उधर एमएचए की ओर से संबंधित थाने की पुलिस को भी ईमेल से सूचना दे दी जाती है, जिससे पुलिस भी अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर देती है।
मौजूदा साल में इनकी रकम वापस कराई गई
- इसी साल 17 जुलाई को नैनी स्थित जीएस इंटर प्राइजेज फर्म के खाते से उड़ाए गए 15 लाख रुपये वापस कराए गए।
- मार्च में प्रतापगढ़ के सरायराजा निवासी संदीप कुमार के खाते से निकाले गए 4.73 लाख रुपये।
- जनवरी में कैंटोनमेंट क्षेत्र निवासी सेना के मेजर जीतेंद्र सिंह के खाते में 24 हजार रुपये।
- फरवरी में फूलपुर निवासी अमर बहादुर के खाते में 1.50 लाख रुपये।
- इसी वर्ष सेना में तैनात कैंट क्षेत्र निवासी रणजीत पटारा के खाते में 60 हजार।
- जार्जटाउन निवासी नौशाद अली के बैंक खाते में 84,682 रुपए।
- शिव कैलाश पुत्र गंगाधर यादव निवासी कोरांव के खाते में 15,146 रुपए।
- ईशान मिश्रा पुत्र अशोक मिश्रा निवासी जार्जटाउन के खाते से 90,000 रुपए।
पोर्टल, हेल्पलाइन दाेनों पर दर्ज कराएं शिकायत
जनपदीय पुलिस के साइबर सेल प्रभारी विनोद कुमार यादव कहते हैं कि साइबर ठगी का शिकार होने पर नेशनल हेल्पलाइन 1930 के साथ ही पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराएं। उस खाते को फ्रीज कराया जाएगा जिसमें साइबर अपराधी ने रकम ट्रांसफर की है। एक बार खाता फ्रीज होने पर उससे रकम निकाला जाना संभव नहीं होगा। जो बाद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित व्यक्ति के खाते में रिफंड हो जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में साइबर सेल ने ऐसे लगभग आठ लोगों के खाते में लगभग सात लाख रुपये वापस कराए हैं।