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यूपी : उमेश पाल अपहरण कांड में 17 साल बाद आज आएगा फैसला, कटघरे में खड़े होंगे अतीक और अशरफ

Tue, 28 Mar 2023 12:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 28 Mar 2023 12:20 AM IST
सार

विधायक राजू पाल हत्याकांड के चश्मदीद गवाह रहे उमेश पाल के अपहरण के मामले में 17 साल बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी। जिला न्यायालय की स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने 17 मार्च को सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने के लिए 28 मार्च की तारीख तय की थी।

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Verdict will come today after 17 years in Umesh Pal kidnapping case, Atiq and Ashraf will stand in the dock
Prayagraj News : साबरमती जेल से अतीक अहमद को प्रयागराज लेकर रवाना हुई पुलिस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

विधायक राजू पाल हत्याकांड के चश्मदीद गवाह रहे उमेश पाल के अपहरण के मामले में 17 साल बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी। जिला न्यायालय की स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने 17 मार्च को सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने के लिए 28 मार्च की तारीख तय की थी। मामले में अतीक, अशरफ सहित कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोपी अंसार बाबा की पहले ही मौत हो चुकी है। कोर्ट के आदेश पर बाकी सभी आरोपियों को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके लिए जिला कचहरी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

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मामले में उमेश पाल ने पांच जुलाई 2007 को धूमनगंज थाने में उस समय सांसद रहे अतीक अहमद, उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ, दिनेश पासी, खान सौकत हनीफ, अंसार बाबा के खिलाफ अपहरण कर विधायक राजू पाल हत्याकांड मामले में अपने पक्ष में बयान करने का आरोप लगाया था। धूमनगंज पुलिस ने उमेश पाल की तहरीर पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 364, 323, 341, 342, 504, 506, 34, 120बी और सेवन सीएल अमेंडमेंट एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।

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जांच के दौरान जावेद उर्फ बज्जू, फरहान, आबिद, इसरार, आसिफ उर्फ मल्ली, एजाज अख्तर का नाम सामने आया। पुलिस की रिपोर्ट दाखिल होने के बाद कोर्ट ने 2009 में आरोप तय कर दिए। इसके बाद अभियोजन की ओर से कुल आठ गवाह पेश किए गए। जिसमें खुद उमेश पाल और उसके एक रिश्तेदार के अलावा दो जांच अधिकारियों के साथ छह पुलिस कर्मी शामिल थे। पक्षकारों की तरफ से (अतीक अहमद, अशरफ सहित अन्य आरोपियों) अपने बचाव के लिए कुल 54 गवाह पेश किए गए।

केस की सुनवाई में देरी होने पर वादी उमेश पाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर केस की सुनवाई जल्दी पूरी करने की मांग की। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट को दो महीने में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था। उसके बाद से ही उमेश पाल अपहरण कांड में रोजाना सुनवाई होने लगी। 24 फरवरी को जिस दिन उमेश पाल की हत्या हुई, इसी केस के सिलसिले में वह कोर्ट से ही लौटे थे। उस दिन बचाव पक्ष की ओर से बहस हो रही थी।

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उमेश सुनवाई के बाद तकरीबन साढ़े चार बजे जैसे ही घर पहुंचे, बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी। इस मामले में भी अतीक, अशरफ, अतीक के बेटे सहित उसकी पत्नी को आरोपी बनाया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील वैश्य के मुताबिक इस मामले में कोर्ट ने 17 फरवरी को सुनवाई पूरी कर ली थी और 28 फरवरी को फैसला सुनाने की तिथि निर्धारित की है। जिला शासकीय अधिवक्ता अपराध गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि मामला संवेदनशील होने की वजह से पुलिस कमिश्नर से कचहरी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पत्र लिखा गया है।

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