प्रयागराज : एसआरएन में वेंटिलेटर धूल फांक रहे, गंभीर मरीजों को लौटाया जा रहा; 50 लाख की सर्विसिंग भी बेकार
कोरोना संक्रमण के दौर में मरीजों की जान बचाने के लिए पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटर अब एसआरएन चिकित्सालय में व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर बन गए हैं। 153 में से केवल 25 वेंटिलेटर इस्तेमाल हो रहे हैं, जबकि 128 लंबे समय से बेकार पड़े हैं। वर्ष 2024 में करीब 50 लाख रुपये खर्च कर इनकी सर्विसिंग कराई गई, लेकिन इसके बाद भी मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल सका।
विस्तार
स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय में पीएम केयर फंड के 128 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। इनको काफी समय से अस्पताल के शौचालय और अन्य स्थानों पर छिपाकर रखा गया है। ऐसे में वेंटिलेटर की उपलब्धता न होने से रोजाना 20 से अधिक गंभीर मरीजों को वापस कर दिया जाता है। वहीं, कई मरीजों को अंबू बैग पर रखा जाता है।
कोरोना संक्रमण के दौरान अस्पताल को पीएम केयर फंड के 153 वेंटिलेटर मिले थे। इनमें से मात्र 25 वेंटिलेटर ही कोरोना संक्रमण के बाद इस्तेमाल में लाए गए। इतना ही नहीं, वर्ष 2024 में सरकार की तरफ से दबाव बनाने के बाद पीएम केयर फंड के सभी वेंटिलेटर की करीब 50 लाख रुपये की लागत से सर्विसिंग कराई गई मगर इसका उपयोग नहीं किया गया।
अस्पताल के अलग-अलग विभागों के पास 104 बेड आईसीयू के हैं मगर करीब 50 वेंटिलेटर ही उपलब्ध हैं। इनमें 15 एनेस्थीसिया आईसीयू व मेडिसिन विभाग में 20 बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा है। बाकी अन्य विभाग में इक्का-दुक्का बेडाें पर वेंटिलेटर रखे गए हैं। संवाद
विभागवार आईसीयू बेड
| विभाग | आईसीयू बेड |
|---|---|
| पल्मोनरी | 5 |
| गायनी | 5 (एचडीयू) |
| मेडिसिन | 20 |
| एनेस्थीसिया | 20 |
| ट्रॉमा सेंटर | 20 |
| सर्जरी | 10 |
| एनआईसीयू | 10 |
| पीआईसीयू | 10 |
| न्यूरो आईसीयू | 4 |
| कुल | 104 |
क्षमता से कम बेड का इस्तेमाल
एनेस्थीसिया आईसीयू में 20 की जगह 15 और सर्जरी में 10 की जगह सात बेड का ही इस्तेमाल किया जाता है। बाकी अन्य विभागों में आईसीयू बेड पर वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं रहते हैं।
वेंटिलेटरों की सीएमसी नहीं
कोरोना संक्रमण के दौरान भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड ने पीएम केयर फंड के वेंटिलेटर अस्पताल भेजे थे। इन वेटिलेटरों की कॉम्प्रिहेंसिव मेंटेनेंस सर्विस (सीएमसी) नहीं है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन ने 2024 में खुद के फंड से वेंटिलेटरों की सर्विस कराई बावजूद इसके वेंटिलेटरों को अस्पताल के कोने-कोने में छुपा दिया गया।
नहीं मिला वेंटिलेटर
कुंडा लालगोपालगंज निवासी सुदीप चतुर्वेदी के बड़े भाई विनोद चतुर्वेदी (53) की 20 सितंबर को अचानक तबियत बिगड़ गई। उन्हें ट्रॉमा सेंटर लाया गया। उन्हें तुरंत वेंटिलेटर पर रखने की आवश्यकता थी मगर आईसीयू बेड उपलब्ध नहीं होने से परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए।
24 घंटे अंबू बैग पर मरीज
21 सितंबर को सिविल लाइंस के 55 वर्षीय मरीज को आईसीयू मेडिसिन में 24 घंटे तक वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने की वजह से अंबू बैग पर रखा गया। हालत स्थिर होने पर परिजन मरीज को ले गए।
पीएम केयर फंड के वेंटिलेटरों में कंप्रेसर व अन्य प्रकार की समस्या समय-समय पर आती है। इसे ठीक कराया जा रहा है। जो वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं उन्हें कुछ ही दिनों में काम में लाया जाएगा। सभी विभागों को आईसीयू बेडों पर वेंटिलेटर की उपलब्धता के लिए निर्देश जारी कर दिया गया है। शौचालय में वेंटिलेटर रखे होने की बात मेरी जानकारी में नहीं है। अगर ऐसा है तो वार्ड की सिस्टर इंचार्ज पर कार्रवाई होगी। - डॉ. जितेंद्र शुक्ला, नोडल, आईसीयू, एसआरएन अस्पताल