UPPSC : यूपीपीएससी भर्ती परीक्षा में उत्तर कुंजी मामले में हाईकोर्ट में दायर की याचिका
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 की संशोधित उत्तरकुंजी अभी तक जारी नहीं की है, जबकि आयोग ने 29 अगस्त 2014 को हुई बैठक में प्रस्ताव पारित किया था कि प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले अभ्यर्थियों से उत्तरकुंजी पर आपत्तियां लेकर विशेषज्ञों से उनका निस्तारण कराया जाएगा।
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पीसीएस समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की संशोधित उत्तरकुंजी जारी किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में आयोग को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट में अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 की संशोधित उत्तरकुंजी अभी तक जारी नहीं की है, जबकि आयोग ने 29 अगस्त 2014 को हुई बैठक में प्रस्ताव पारित किया था कि प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले अभ्यर्थियों से उत्तरकुंजी पर आपत्तियां लेकर विशेषज्ञों से उनका निस्तारण कराया जाएगा और प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के साथ ही संशोधित उत्तरकुंजी जारी कर दी जाएगी। इसी मुद्दे पर प्रतियोगी छात्रा रश्मि मिश्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 24 अगस्त 2014 को आयोग की बैठक में हुए निर्णय को एक नए प्रस्ताव से सुपरसीड कर दिया गया है। नए प्रस्ताव के तहत प्रारंभिक परीक्षा की संशोधित उत्तरकुंजी मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद जारी की जाएगी।
अधिवक्ता अनुज कुमार मिश्र ने याची का पक्ष रखते हुए न्यायालय को बताया कि आयोग ने पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 का अंतिम परिणाम घोषित किए जाने के बावजूद उत्तरकुंजी अब तक जारी नहीं की है। इस पर न्यायालय ने 10 दिनों के भीतर आयोग को नए प्रस्ताव से संबंधित हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
संशोधित उत्तरकुंजी जारी न होने से असमंजस में अभ्यर्थी
उत्तरकुंजी जारी न किए जाने से अभ्यर्थी असमंजस में है। इस मसले पर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के खिलाफ कई दिनों से आंदोलन किया जा रहा है। दर्जनों छात्रों ने आयोग के अध्यक्ष और सचिव को कई बार ज्ञापन देकर संशोधित उत्तरकुंजी जारी किए जाने की मांग भी की, लेकिन आयोग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
प्रतियोगी छात्र लगातार यह बात कह रहे हैं कि उत्तरकुंजी जारी न किए जाने से उनका बड़ा नुकसान हो रहा है। संशोधित उत्तरकुंजी जारी होने से छात्र परीक्षा से संबंधित अपनी तैयारियों का बेहतर मूल्यांकन कर पाते हैं।
वे यह जान सकते हैं कि उन्होंने जो प्रश्न हल किए थे, उनमें से कितने सवाल सही और कितने गलत थे, ताकि अगली परीक्षा में कोई गलती न हो। साथ ही संशोधित उत्तरकुंजी जारी होने पर यह भी स्पष्ट हो जाता है कि छात्रों ने जिन प्रश्नों पर आपत्तियां की थीं, उनका निस्तारण हुआ या नहीं।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय का कहना है कि आयोग ने पिछली कई परीक्षाओं की उत्तरकुंजी जारी नहीं की, जिससे प्रतियोगी छात्र असमंजस की स्थिति हैं। अवनीश का आरोप है कि आयोग ने अपने ही निर्णय का उल्लंघन किया और छात्रों को वास्तविकता नहीं बताई। आयोग अगर कोई बदलाव कर रहा है तो छात्रों को भी इससे अवगत कराया जाना चाहिए।
समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि अगर आयोग ने मुख्य परीक्षा के बाद उत्तरकुंजी जारी किए जाने का नया प्रस्ताव पारित किया है तो आयोग उसका भी उल्लंघन का रहा है, क्योंकि पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 का अंतिम चयन परिणाम काफी दिनों पहले घोषित किया जा चुका है, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा की संशोेधित उत्तरकुंजी का कोई अता-पता नहीं।