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यूपीपीएससी परीक्षा धांधली मामला, प्रतियोगी छात्रों की मांग- अपनी स्टेटस रिपोर्ट सार्वजनिक करे सीबीआई

Tue, 26 Apr 2022 08:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 26 Apr 2022 08:56 PM IST
सार

सीबीआई अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक आयोजित की गईं तकरीबन 600 भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान सीबीआई ने दस हजार छात्रों के बयान दर्ज किए।

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UPPSC exam rigging case, demand of competitive students - CBI should make its status report public
UPPSC - फोटो : Social media

विस्तार

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच को पांच साल पूरे हो चुके हैं। परीक्षाओं में धांधली के मुद्दे पर सीबीआई के समक्ष शिकायत दर्ज कराने वाले हजारों प्रतियोगी छात्र जानना चाहते हैं कि जांच एजेंसी ने इन पांच वर्षों में कौन सी बड़ी कार्रवाई की। छात्र चाहते हैं कि सीबीआई कोर्ट में जो स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाली है, वही रिपोर्ट प्रतियोगी छात्रों के सामने सार्वजनिक की जाए।

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सीबीआई अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक आयोजित की गईं तकरीबन 600 भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान सीबीआई ने दस हजार छात्रों के बयान दर्ज किए। छात्रों की शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ी और सीबीआई को पीसीएस-2015 एवं अपर निजी सचिव (एपीएस)-2010 की भर्ती में धांधली के सुबूत भी हाथ लगे। इन्हीं सुबूतों के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन परीक्षाओं में धांधली के लिए जिम्मेदार लोग सीबीआई की पकड़ से अब तक बाहर हैं।

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साक्ष्य सौंपने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि हजारों छात्रों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर सीबीआई के समक्ष बयान दर्ज कराए। उन्हें उम्मीद थी कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन पांच वर्षों में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। प्रतियोगी छात्र खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। छात्रों की ओर से समिति मांग करती है कि सीबीआई अपनी स्टेटस रिपोर्ट उन छात्रों के समक्ष सार्वजनिक करें, जिन्होंने भर्तियों में धांधली के खिलाफ अपने बयान दर्ज कराए और सीबीआई को साक्ष्य भी सौंपे।


सीबीआई की धीमी जांच के मुद्दे पर कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने दोषियों पर कार्रवाई न होने के मामले में शासन स्तर के अफसरों पर भी निशाना साधा है। अवनीश का आरोप है कि शासन और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में बैठे कुछ अफसर जांच को लटकाने का प्रयास कर रहे हैं।


भर्तियों में धांधली के मामले में चिह्नित किए गए अफसरों के खिलाफ सीबीआई ने प्रदेश सरकार से अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी, लेकिन संबंधित फाइल लंबे समय से शासन और आयोग में अटकी है। ऐसे में सीबीआई को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कहां और किसकी वजह से अटकी हुई है।

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