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UPPSC Exam : केंद्र निर्धारण के साथ प्रश्नपत्रों की सुरक्षा की चुनौती, ग्रामीण अंचलों में भी बनाए जाएंगे सेंटर

Sun, 17 Nov 2024 04:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 17 Nov 2024 04:44 PM IST
सार

आयोग की नई गाइडलाइन के अनुसार, अब प्रश्न पत्र डबल लॉक वाले बॉक्स (ट्रंक) में रखे जाएंगे। इसमें से एक तो ताला लगा होगा, जबकि दूसरा लॉक कोड आधारित होगा। परीक्षा से चंद मिनट पहले आयोग की ओर से कोड बताया जाएगा।

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UPPSC Exam: Challenge of security of question papers along with determination of centres
यूपीपीएससी, UPPSC - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छात्रों के आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने एक ही दिन परीक्षा कराने का निर्णय तो ले लिया, लेकिन इससे केंद्र निर्धारण के साथ प्रश्न पत्रों की सुरक्षा की चुनौती भी बढ़ गई है। अब आयोग को शहर से बाहर केंद्र बनाने पड़ेंगे। ऐसे में प्रश्न पत्रों की सुरक्षा का दायरा भी बढ़ेगा। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा के लिए 5,76,154 आवेदन आए हैं। इतने अभ्यर्थियों की परीक्षा कराने के लिए आयोग को 1758 केंद्रों की जरूरत होगी, जबकि मानक के अनुरूप आयोग को 978 केंद्र ही मिले। ऐसे में केंद्रों की संख्या बढ़ाने के लिए शहर मुख्यालय से 10 किमी की परिधि में केंद्र निर्धारण की शर्त को शिथिल कर दिया है, यानी अब ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल-कॉलेज भी केंद्र बनेंगे।

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वहीं, आयोग की नई गाइडलाइन के अनुसार, अब प्रश्न पत्र डबल लॉक वाले बॉक्स (ट्रंक) में रखे जाएंगे। इसमें से एक तो ताला लगा होगा, जबकि दूसरा लॉक कोड आधारित होगा। परीक्षा से चंद मिनट पहले आयोग की ओर से कोड बताया जाएगा। इसके बाद ही बॉक्स खुल पाएंगे। यह प्रक्रिया हर सेंटर पर अपनानी होगी। ऐसे में केंद्रों का दायरा बढ़ने के साथ इस सिक्योरिटी लॉक को टूटने से बचाने चुनौती भी बढ़ेगी।
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इसके अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों में केंद्र होने पर इन बॉक्सों को सुरक्षित पहुंचाने की भी चुनौती होगी। इतना ही नहीं, नए मानक के अनुसार हर केंद्र में मजिस्ट्रेट की तैनाती करनी होगी, यानी एक साथ इतने अफसरों की ड्यूटी लगानी होगी।

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पेपर छापने और पहुंचाने के लिए महज 36 दिन

आयोग ने पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा की तारीख 22 दिसंबर तय की है। ऐसे में अब महज 36 दिन शेष बचे हैं। नई नियमावली के तहत परीक्षा के लिए चार तरह के प्रश्न पत्र बनाने होंगे, ताकि एक प्रश्न पत्र के आउट होने या अन्य तरह की दिक्कत होने पर दूसरे पेपर से परीक्षा कराई जाए। आयोग को विशेषज्ञों का पैनल तैयार कर चार तरह के पेपर बनवाने होंगे और इन्हें अलग-अलग जगह छपवाना होगा। इसके बाद केंद्रवार प्रश्न पत्रों के बॉक्स बनवाकर संबंधित जिलों को भेजने होंगे। इस पूरी प्रक्रिया के लिए मात्र 36 दिन बचे हैं। अफसरों के अनुसार, परीक्षा एक दिन कराने के फैसले के बाद ही प्रश्न पत्र बनाने समेत अन्य प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

परीक्षा केंद्रों के चयन की चुनौती, तलाश शुरू

जिला प्रशासन के सामने परीक्षा केंद्रों के चयन की चुनौती खड़ी हो गई है। लंबी कवायद के बाद प्रयागराज में मानक के अनुसार करीब 60 केंद्रों की तलाश पूरी हो पाई थी। इसके लिए जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय तथा तकनीकी संस्थानों से भी मदद मांगी है। अब प्रशासन को दोगुने केंद्रों का चयन करना होगा। आयोग का पत्र तो अभी जिला प्रशासन के पास नहीं पहुंचा है लेकिन मुख्य सचिव ने शुक्रवार को ही वीडियो कांफ्रेंसिंग में स्थिति से अवगत कराने के साथ केंद्र निर्धारण के निर्देश दिए थे। एडीएम सिटी मदन कुमार का कहना है कि शासन तथा आयोग की नई गाइडलाइन के अनुसार केंद्र तय किए जाएंगे।

आरओ-एआरओ-प्री कराने की मांग, जल्द फैसला नहीं तो आंदोलन

आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा भी एक शिफ्ट में कराने की मांग अब भी जारी है। हरेंद्र यादव सहित अन्य छात्रों ने एक दिन परीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इस पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो फिर आंदोलन होगा। पार्षदों की बैठक में भी पीसीएस की तरह आरओ-एआरओ प्रारंभिक परीक्षा एक दिन में कराने की मांग की गई। बैठक में शिवसेवक सिंह और आनंद घिल्डियाल मौजूद रहे।

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