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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UPPSC: Accused not caught even after five years of FIR, case of rigging in PCS-2015

UPPSC : एफआईआर के पांच साल बाद भी नहीं पकड़े गए आरोपी, पीसीएस-2015 में धांधली का मामला

Sun, 11 Jun 2023 01:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 11 Jun 2023 01:49 PM IST
सार

पीसीएस-2015 में धांधली को लेकर सीबीआई ने पांच मई 2018 को एफआईआर दर्ज की थी। जांच के दौरान सीबीआई को इस परीक्षा में धांधली के कई अहम सुराग मिले थे। सीबीआई ने अपनी एफआईआर में इसका जिक्र भी किया था।

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विस्तार

पीसीएस परीक्षा-2015 न केवल पेपर आउट होने के मामले में चर्चा रहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच शुरू होने के बाद सीबीआई ने पीसीएस-2015 में हुई धांधली के मामले में पहला मुकदमा दर्ज किया। यह एफआईआर आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। एफआईआर के पांच साल बाद भी आरोपी पकड़ से बाहर हैं और सीबीआई में बयान दर्ज कराने वाले अभ्यर्थी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

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पीसीएस-2015 में धांधली को लेकर सीबीआई ने पांच मई 2018 को एफआईआर दर्ज की थी। जांच के दौरान सीबीआई को इस परीक्षा में धांधली के कई अहम सुराग मिले थे। सीबीआई ने अपनी एफआईआर में इसका जिक्र भी किया था। एफआईआर में लिखा था कि मुख्य परीक्षा में मॉडरेशन की आड़ में कई अयोग्य अभ्यर्थियों को अधिक नंबर देकर चयनित कर लिया गया और बहुत से योग्य अभ्यर्थियों के नंबर घटाकर उन्हें मेरिट से बाहर कर दिया गया।

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कुछ योग्य अभर्थियों के मॉडरेशन के नाम पर घटा दिए थे 20 अंक

मॉडरेशन मुख्य परीक्षा के अनिवार्य विषयों में होता है। पीसीएस-2015 में अनिवार्य विषय सामान्य हिंदी में मॉडरेशन के नाम पर कुछ योग्य अभ्यर्थियों के 20 नंबर तक घटा दिए और कुछ अभ्यर्थियों के 28 नंबर तक बढ़ाकर उनका चयन कराया गया। इसी तरह दूसरे अनिवार्य विषय निबंध के पेपर की कॉपियों में 15 नंबर तक घटाए और कुछ अभ्यर्थियों को अधिकतम 21 नंबर तक का फायदा पहुंचाया गया। सीबीआई की एफआईआर में कहा गया था कि इस तरह से किया गया मॉडरेशन पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना और फ्रॉड है।

सीबीआई ने आयोग के जिन अज्ञात अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, उन अफसर पर टिप्पणी की गई थी कि उन्होंने अपने पद का गलत तरीके से इस्तेमाल किया। यह आपराधिक षड़यंत्र और धोखाधड़ी का मामला है। साथ ही सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर में कहा गया था कि आयोग ने मॉडरेशन के मामले में ‘संजय सिंह बनाम यूपीपीएससी’ पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन किया और अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से नंबर दिए।

कई अभ्यर्थियों के कॉपियों में बने थे विशेष चिन्ह

सिर्फ यही नहीं, सीबीआई ने पीसीएस-2015 की कॉपियों की जांच के दौरान एक गंभीर और मामला पकड़ा था। कई अभ्यर्थियों की कॉपियों पर विशेष प्रकार के चिह्न बने हुए मिले थे, जिन्हें डीकोड कर अभ्यर्थियों की पहचान आसानी से की जा सकती थी। खास यह कि आयोग के परीक्षकों ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं की और न ही अफसरों ने इस पर कोई ध्यान दिया। अभ्यर्थियों की यह कारगुजारी साफ इशारा कर रही थी कि आयोग के कुछ अफसरों, परीक्षकों और अभ्यर्थियों के बीच मिलीभगत थी।

इन तमाम मामलों में सीबीआई ने आयोग के अज्ञात अफसरों और कुछ बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन इन अज्ञात अफसराें को न तो अब तक चिह्नित किया गया और न ही कोई आरोपी पकड़ा जा सका। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि दस हजार अभ्यर्थियों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर सीबीआई में बयान दर्ज कराया, लेकिन पांच साल बाद भी कोई गिरफ्तारी न होने अभ्यर्थियों का जांच से भरोसा उठ गया है।

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