यूपी : टीजीटी अभ्यर्थियों को मिल सकती है टीईटी से राहत, 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को मिलेगा लाभ
टीजीटी भर्ती की अर्हता में प्रस्तावित बदलाव को लेकर शुरू हुए अभ्यर्थियों के आंदोलन के बाद राहत की उम्मीद जगी है। टीईटी को अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर विरोध के बीच मुख्यमंत्री की पहल से करीब 15 लाख अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलने के आसार हैं।
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प्रतियोगी छात्रों के आंदोलन के बाद प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिल सकती है। टीजीटी के अभ्यर्थियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट मिलने के आसार हैं। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश भर के तकरीबन 15 लाख टीजीटी अभ्यर्थियों को सहूलियत होगी।
दरअसल, पिछले महीने ही माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें टीजीटी भर्ती में अर्हता संशोधन की बात कही गई थी। कक्षा 6 से 10 तक के लिए उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी पास करना अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव भी शामिल था।
चयन प्रक्रिया में सम्मिलित होने के लिए बीएड के साथ-साथ स्नातक में 50 प्रतिशत या परास्नातक में 45 प्रतिशत अंक अनिवार्य किया गया है। इस प्रस्ताव के भेजते ही अभ्यर्थियों ने प्रयागराज में आंदोलन व अनशन शुरू कर दिया था। 19 दिनों तक चले अनशन के बाद मुख्यमंत्री छात्रों के पक्ष में दिखे और उन्होंने कहा कि छात्रों को राहत दिए जाने के लिए एनसीटीई को पत्र भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद से प्रतियोगी छात्रों में उम्मीद जगी है। हालांकि शिक्षा विभाग के आला अफसर टीईटी के मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
प्रतियोगियों को सीएम पर पूरा भरोसा
प्रतियोगी छात्र मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विक्की खान कहते हैं कि अगर टीजीटी में टीईटी की अनिवार्यता लागू ही करनी थी तो इसके पहले नोटिस देना चाहिए था ताकि जुलाई में आयोजित हुई टीईटी की परीक्षा में टीजीटी के अभ्यर्थी भी शामिल होते। टीईटी की परीक्षा खत्म होने के बाद ही टीईटी अनिवार्य करने का प्रस्ताव भेज दिया गया है यह अभ्यर्थियों के साथ धोखा है। हम लोगों को मुख्यमंत्री पर पूरा भरोसा है कि वह टीईटी से छूट देंगे।
यूपी में छह वर्ष बाद हुआ टीईटी का आयोजन
आठ जनवरी 2020 के बाद यूपी-टीईटी दो, तीन व चार जुलाई को कराई गई थी। उस समय टीजीटी के अभ्यर्थियों को यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, ऐसे में ये अभ्यर्थी टीईटी में नहीं शामिल हुए थे। वैसे, एनसीटीई के अनुसार वर्ष में दो बार टीईटी का आयोजन होना चाहिए लेकिन यूपी में 2020 के बाद सीधे 2026 में यह परीक्षा कराई गई।