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PM Kisan Samman Nidhi : फिर गड़बड़.. एक जैसा है पिता और पति का नाम, ऐसे 53 किसान पा गए सम्मान

Fri, 02 Sep 2022 07:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अविनाशी श्रीवास्तव, प्रयागराज
अविनाशी श्रीवास्तव, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 02 Sep 2022 07:03 AM IST
सार

Kisan Samman Nidhi : हजारों ऐसे लाभार्थी हैं, जिनका संबंधित गांव में कोई अता-पता ही नहीं है। संबंधित तहसील में भी ये लोग ढूंढे़ नहीं मिल रहे। 53 ऐसे लाभार्थी भी हैं, जिनके पिता या पति का एक ही नाम है। भूलेख सत्यापन के दौरान सामने आ रहीं इस तरह की अनियमितताओं से पूरी योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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UP News :  Mistakes are coming to the fore in the PM Kisan Samman Nidhi at every level
किसान सम्मान निधि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में हर स्तर पर गड़बड़ी सामने आ रही है। हजारों ऐसे लाभार्थी हैं, जिनका संबंधित गांव में कोई अता-पता ही नहीं है। संबंधित तहसील में भी ये लोग ढूंढे़ नहीं मिल रहे। इतना ही नहीं, करीब 53 ऐसे लाभार्थी भी हैं, जिनके पिता या पति का एक ही नाम है। भूलेख सत्यापन के दौरान सामने आ रहीं इस तरह की अनियमितताओं से पूरी योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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भूलेख सत्यापन में पता चला है कि सोरांव तहसील में 53 ऐसे लाभार्थी हैं, जिनके पिता या पति के नाम के कॉलम में बचई लाल लिखा है। लेकिन लाभार्थियों को जब उनके पते पर ढूंढा गया तो पता चला कि इस नाम का गांव में कोई है ही नहीं। गौर करने वाली बात यह भी है कि  लाभार्थियों के पुत्र-पुत्रियों के नाम अलग-अलग गांवों में दर्ज हैं। भूलेख सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि बचई लाल तो सिर्फ एक उदाहरण है। इस तरह के कई अन्य प्रकरण भी सामने आए हैं।
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इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी मिले हैं, जिनके नाम पर सम्मान निधि के दो या इससे अधिक खाते हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि रिकॉर्ड में दर्ज पते पर ये मिले ही नहीं। अब ऐसे लोगों की सूची तैयार की जा रही है।
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अब दूसरे तहसील, जिलों में की जाएगी तलाश
अब ऐसे लोगों की सूची तैयार कर दूसरे गांव, तहसील में तलाश करने की कवायद शुरू की गई है। शासन की ओर से पत्र लिखा गया है कि गांव में कोई लाभार्थी नहीं मिलता है तो उसे तत्काल अपात्र घोषित न किया जाए। उपलब्ध विवरण के आधार पर तहसील के दूसरे गांव एवं जिले के अन्य तहसीलों में उनके डाटा अपलोड किए जाएं। चूंकि ऐसे लाभार्थियों की संख्या कई हजार बताई जा रही है। ऐसे में शासन की ओर से जारी इस आदेश से भूलेख सत्यापन में जुटे कर्मचारियों की चुनौती और बढ़ गई है।

लेखपालों ने मांगे लाभार्थियों के आवेदन फार्म
लाभार्थियों का विवरण उपलब्ध कराने को लेकर कृषि विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। भूलेख सत्यापन का काम लेखपालों को दिया है। ऐसे में राजस्व विभाग की ओर से विवरण मांगे जाने पर पहले सिर्फ लाभार्थियों की सूची उपलब्ध कराई गई। दोबारा मांगे जाने पर लाभार्थी एवं पिता-पति का विवरण उपलब्ध कराया गया।

फिर से पत्र लिखे जाने के बाद लाभार्थियों के क्षेत्र आदि विवरण दिए गए लेकिन गाटा संख्या, रकबा आदि डाटा को लेकर अब भी गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में लेखपाल संघ ने लाभार्थियों की ओर से किए गए आवेदन की प्रति ही मांगी है, जिसमें सभी तरह के विवरण दर्ज कराए जाते हैं।

लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष राजकुमार सागर का कहना है कि  आवेदन के समय ही लाभार्थियों से सभी विवरण भरवाए जाते हैं। कृषि विभाग से आवेदन फार्म में भरे गए विवरण मांगे गए हैं। उनका यह भी कहना है कि दूसरे क्षेत्र के लाभार्थियों की सूची भी भेज दी गई है। कोई भी लेखपाल दूसरे क्षेत्र के पात्रों का कैसे सत्यापन करेगा।

51 हजार पहले ही हो चुके हैं बाहर
एक ही नाम के दो या अधिक खाते होने की शिकायत शासन तक भी पहुंची है। यह गड़बड़ी किस हद तक हुई है इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि 51 हजार से अधिक पहले ही पहले ही बाहर हो चुके हैं। प्रयागराज के छह लाख 95 हजार से अधिक किसानों को सम्मान निधि भेजी गई थी। जबकि, छह लाख 44 हजार के खाते में ही राशि ट्रांसफर की गई।

50 फीसदी से भी कम हो जाएंगे पात्र
भूलेख सत्यापन से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि अभी तक के सर्वे के अनुसार सम्मान निधि प्राप्त करने वाले करीब 50 फीसदी किसान अपात्र हो जाएंगे। उनका कोई विवरण ही नहीं मिल पा रहा है। हालांकि , शासन के निर्देश पर उनकी पूरे जिले में तलाश की जा रही है।

खतौनी से लिंक करके दूर की जा सकती है गड़बड़ी
सम्मान निधि आवेदन की प्रक्रिया से जुड़े एक कर्मचारी का कहना है कि शुरुआती दिनों में सभी पात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन राजस्व विभाग से कराया गया था लेकिन बाद में बिना सत्यापन के ही पात्रों की सूची तैयार कर ली गई। इससे इस तरह की गड़बड़ी सामने आ रही है। उनका कहना है कि यदि सम्मान निधि के खाते को खतौनी से लिंक कर दिया जाए तो काफी हद तक गड़बड़ी दूर हो जाएगी।


कई किसानों के एक से अधिक खाते होने की बात सामने आई है। ऐसे कुछ किसानों को लाभार्थियों की सूची से बाहर किया गया है। गांवों का नक्शा मिसमैच हो गया है। इसलिए किसानों के संबंधित गांव में नहीं होने की बात सामने आ रही है। इस गड़बड़ी को दुरुस्त किया जा रहा है। सम्मान निधि पा रहे सभी किसान पात्र हैं।’
-विनोद कुमार, उप निदेशक कृषि

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