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पोस्टर हटाने के लिए यूपी सरकार को 10 अप्रैल तक की मोहलत

Wed, 18 Mar 2020 03:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क. प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क. प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 18 Mar 2020 03:37 AM IST
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UP government gets time to remove poster till April 10
इलाहाबाद उच्च न्यायालय

लखनऊ में सीएए के विरोध-प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के सार्वजनिक स्थानों से पोस्टर हटाने के लिए योगी सरकार को 10 अप्रैल तक की मोहलत मिल गई है।

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मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की पीठ ने यह राहत सोमवार को दाखिल राज्य सरकार की अर्जी पर दी है। जिसमें अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए सुप्रीमकोर्ट में लंबित अपील का हवाला देकर अतिरिक्तसमय दिए जाने की मांग की गई थी। 
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 पीठ ने इससे पूर्व 9 मार्च को राज्य सरकार को पोस्टर हटा लेने और 16 मार्च को अनुपालन रिपोर्ट महानिबंधक के सामने प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ  सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी। सर्वोच्च अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए वृहदपीठ को संदर्भित कर दिया है। 
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उस समय दोनों अदालतों में होली का अवकाश चल रहा था। 16 मार्च को सुप्रीमकोर्ट में मामला लंबित होने के आधार पर सरकार ने आदेश के अनुपालन हेतु और समय देने की मांग की थी।

अध्यादेश को भी चुनौती : राज्य सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर उपद्रवियों के पोस्टर चस्पा करने के कार्य को कानूनी जामा पहुंचाने के लिए अध्यादेश लागू किया है। इसकी वैधानिकता को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर 18 मार्च को सुनवाई होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के आधार पर हाईकोर्ट से और समय देने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने पोस्टर लगाने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि ऐसा कोई कानून नहीं है, जिससे किसी आरोपी का सार्वजनिक स्थान पर फोटो लगाया जाए। 

कोर्ट ने इसे निजता के अधिकार का हनन मानते हुए 16 मार्च तक पोस्टर हटाकर इसकी रिपोर्ट महानिबंधक के समक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से ही सरकार को अदालत के फैसले का इंतजार था। 


अध्यादेश को भी चुनौती
राज्य सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की फोटो और उनका विवरण सार्वजनिक स्थान पर चस्पा करने के कार्य को कानूनी जामा पहुंचाने के लिए अध्यादेश लागू किया है। इस अध्यादेश की वैधानिकता को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर 18 मार्च को सुनवाई होने की संभावना है।

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