यूपी बोर्ड : टापर्स को नहीं रास आता है सोशल मीडिया, आईएएस औप डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं मेधावी
यूपी बोर्ड के दसवीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम मंगलवार को जारी कर दिए गए। इसमें प्रयागराज के मेधावियों ने जिले के साथ ही प्रदेश स्तर की मेरिट में भी अपना जलवा बिखेरा।
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यूपी बोर्ड के दसवीं और 12वीं के बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम मंगलवार को जारी कर दिए गए। इसमें प्रयागराज के मेधावियों ने जिले के साथ ही प्रदेश स्तर की मेरिट में भी अपना जलवा बिखेरा। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों के भी मेधावियों ने प्रदेश की मेरिट में अपना स्थान बनाकर जिले का नाम रौशन किया। बातचीत के दौरान मेधावियों की सोशल मीडिया में कोई खास रुचि नहीं दिखी।
ज्यादातर टापर्स ने खुद को अभी तक सोशल मीडिया से दूर ही रखा है। मेधावियों के सपने भी उनकी कड़ी मेहनत के हिसाब से ही बड़े हैं। कोई आईएएस बनना चाहता है, तो किसी को डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का सपना है। वहीं कई ऐसे हैं जो आईआईटीएन बनकर अपने परिवार को नाम रौशन करना चाहते हैं।
हाईस्कूल के टापर्स
आईएएस बनना है विकास का लक्ष्य
हाईस्कूल में जिले में दूसरा स्थान हासिल करने वाले ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, गंगापुरी के छात्र विकास चतुर्वेदी आईएएस बनना चाहते हैं। मूलरूप में गोंडा के रहने वाले विकास शांतिपुरम् में रहते हैं। पिता डॉ. इंद्र कुमार चतुर्वेदी पेशे से केवीएम इंटर कॉलेज में प्रवक्ता हैं। माता मंजू चतुर्वेदी गृहणी हैं। बड़ी बहन सोनल चतुर्वेदी एमएससी अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। विकास नियमित रूप से छह से आठ घंटे पढ़ाई करते हैं। किसी भी प्रकार के सोशल मीडिया में सक्रिय नहीं हैं। कोचिंग के बगैर ही स्कूल के शिक्षकों के मार्ग दर्शन में उन्होंने सफलता हासिल की है।
इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं मनीष
जिले में हाईस्कूल की परीक्षा में दूसरा और प्रदेश में 10वां स्थान हासिल करने वाले मनीष पटेल मूलरूप से कौशांबी के मंझनपुर के रहने वाले और करछना के एसआर इंटर कॉलेज में रहकर पढ़ाई करते हैं। मनीष के पिता किसान हैं और मां नीना देवी गृहिणी हैं। मनीष ने बचपन से ही परिवार से दूर रहकर पढ़ाई की है। वह नियमित रूप से छह से सात घंटे पढ़ाई करते थे। उनका सपना है कि जेईई मेन में सफलता हासिल कर इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। अभी तक कोचिंग का सहारा नहीं लिया। वह कक्षा दो से करछना के विद्यालय में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। मनीष सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रहते हैं। उनकी बड़ी बहन कौशांबी से ही बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा हैं।
अपूर्वा का है आईएएस बनने का सपना
हाईस्कूल में जिले में पांचवीं रेंक पाने वाली अपूर्वा मिश्रा का आईएएस बनने का सपना है। वह आईएएस बन देश की सेवा करना चाहती हैं। एसपी सिंह इंटर कॉलेज रेही कला नैनी की छात्रा अपूर्वा के पिता रमेंद्र मिश्र निजी वाहन चलाते हैं तो मां विद्या मिश्र गृहिणी हैं। दो भाई व एक बहन में वह दूसरे नंबर पर हैं। अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया है।
इंटरमीडिएट के टापर्स
आईआईटीएन बनना चाहते हैं आदर्श
ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, गंगापुरी, रसूलाबाद ने जिले में इंटरमीडिएट में प्रदेश में छठवां और जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है। पिता राजेश कुमार तिवारी निजी कंपनी में कार्य करते हैं और मां कांती तिवारी गृहिणी हैं। आदर्श आईआईटीएन बनना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी। अभी तक कभी भी कोचिंग का सहारा नहीं लेने वाले आदर्श नियमित रूप से स्कूल के कार्य के अलावा तैयारी की जरूरत के हिसाब से पढ़ते हैं। जहां तक सोशल मीडिया की बात हैं, तो आदर्श उससे कोसों दूर हैं।
नितिन बनना चाहते हैं इंजीनियर
ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सिविल लाइन में इंटर के छात्र नितिन तिवारी ने प्रदेश मे सातवां स्थान हासिल किया है। उनका सपना इंजीनियर बनना है। उनके पिता घनश्याम तिवारी निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। मां रत्ना तिवारी गृहिणी हैं। मूलरूप से हनुमानगंज के रहने वाले नितिन ने बिना कोचिंग की सहायता लिए यह स्थान हासिल किया है। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं।
सिविल सर्विसेज की तैयारी करेंगी अमीशा
बीबीएस इंटर कॉलेज, शिवकुटी से इंटर की छात्रा अमीशा पटेल ने इंटरमीडिएट की परीक्षा में जिले में आठवां स्थान हासिल किया है। अमीशा बताती हैं कि वह मूलरूप से आम्बेडकर नगर की रहने वाली और सलोरी के शुक्ला मार्केट के पास किराये पर रहकर पढ़ाई करती हैं। उनका सपना सिविल सर्विस की तैयारी करना है। अमीशा के पिता शशिकांत पटेल किसान हैं और मां उमा पटेल गृहिणी हैं। कोई कोचिंग नहीं की है। नियमति रूप से छह से सात घंटे पढ़ाई करती थीं। सोशल मीडिया में उनकी कोई रुचि नहीं है।
डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं आयुष
ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में इंटर के छात्र आयुष मिश्रा ने जिले में छठवां स्थान हासिल किया है। पिता महेश मिश्रा निजी क्षेत्र में इंजीनियर हैं और मां संगीता मिश्र गृहिणी हैं। इनका सपना नीट में सफलता हासिल करते हुए एमबीबीएस करके लोगों की मदद करना है। सोशल मीडिया में कोई खास रुचि नहीं है। इन्होंने कोई कोचिंग नहीं की और विद्यालय के शिक्षकों के मार्गदर्शन में खुद पढ़ाई की। पढ़ाई का कोई समय निर्धारित नहीं रहता था।
प्रदेश की इंटरमीडिएट परीक्षा की टॉप टेन सूची में चौथा स्थान प्राप्त कर फूलपुर का नाम रोशन करने वाली सुबासना पीसीएस अधिकारी बनना चाहती हैं। सरायहुसेना गांव के रहने वाले किसान रामसुंदर बिंद खेती किसानी के साथ ही पीआरडी में कार्यरत हैं। उनकी बेटी सुबासना बीआर इंटर कॉलेज पूरेभुलई में इंटर की छात्रा हैं। उन्होंने यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा में 500 में से 484 अंक प्राप्त कर प्रदेश में चौथा स्थान व प्रयागराज जनपद में पहला स्थान प्राप्त कर माता पिता सहित विद्यालय का नाम रोशन किया है।
फौजिया नाज का लक्ष्य है डॉक्टर बनना
483 अंक हासिल कर प्रदेश में पांचवां स्थान व जनपद में दूसरे स्थान पर काबिज फौजिया नाज का लक्ष्य डॉक्टर बनना है। मूल रूप से उत्तम गिरि की चकिया फाफामऊ की रहने वाली फौजिया अपने ननिहाल पूरेभुलई में रहकर पढ़ाई करती है। पिता इम्तियाज अहमद निजी वाहन चालक हैं। माता सबीना बानो गृहिणी हैं। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली आयुषी सिंह का सपना डॉक्टर बनना है। उन्होंने 482 अंक प्राप्त कर प्रदेश में छठां व जनपद में तीसरा स्थान हासिल किया है। आयुषी के पिता भानु प्रताप सिंह किसान हैं और माता हेमा सिंह गृहिणी हैं। 482 अंक लेकर प्रदेश में छठां स्थान हासिल करने वाली हर्षिता यादव भी जनपद की सूची में तीसरे स्थान पर हैं।
यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा में छतनाग रोड स्थित सरोज विद्याशंकर इंटर कॉलेज के छात्र शशांक यादव ने प्रदेश में सातवां तथा जिले में चौथा स्थान प्राप्त किया है। मूलत: हंडिया के रहने वाले शशांक यादव गंगादीप कॉलोनी में रहकर पढ़ाई करते हैं। उसके पिता डॉ. प्रेमबहादुर यादव पशु चिकित्सक हैं। वह इन दिनों सुल्तानपुर में तैनात हैं। शशांक ने 96.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रदेश में सातवां तथा जिले में चौथा स्थान प्राप्त किया है।
शशांक इंजीनियरिंग करने के बाद सिविल सेवा की तैयारी कर आईपीएस बनना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि अगर नियमित तौर पर सात से आठ घंटे गंभीरता से पढ़ा जाए तो सफलता पाने से कोई रोक नहीं सकता है। पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर के शशांक की मां सरला देवी आंगनबाड़ी केंद्र में शिक्षिका हैं। अपनी सफलता का श्रेय शशांक ने माता-पिता, शिक्षकों को और प्रबंधक डॉ. दुर्गा प्रसाद मणि त्रिपाठी और प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार त्रिपाठी को दिया है। शशांक का स्कूल प्रांगण में सम्मान भी किया गया।