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इलाहाबाद विवि के दो इतिहासकारों का रहा अयोध्या से नाता

Sun, 10 Nov 2019 02:12 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2019 02:12 AM IST
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Two historians of Allahabad University had relationship with Ayodhya
Two historians of Allahabad University had relationship with Ayodhya
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दो इतिहासकारों का भी अयोध्या से नाता रहा। इनमें से एक प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. डीपी दुबे और दूसरे मध्यकालीन इतिहास विभाग के प्रो. सुशील कुमार श्रीवास्तव थे। विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद चले मुकदमे में दोनों ही इतिहासकारों की गवाही हुई थी।
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इविवि में प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. डीपी दुबे विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के छह इतिहासकारों की टीम में सबसे युवा थे और बाकी के इतिहासकार विभिन्न शिक्षण संस्थानों से रिटायर हो चुके थे। इस टीम ने वर्ष 2003 में वहां उत्खनन कार्य किया था, जिसमें वहां राम मंदिर होने के साक्ष्य मिले थे। प्रो. दुबे का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का इससे अच्छा फैसला कुछ नहीं हो सकता था। कोर्ट ने सभी प्रमाणों के आलोक में यह जजमेंट दिया है।
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प्रो. दुबे के मुताबिक विवादित स्थल पर मंदिर के अवशेष, मूर्तियां भी मिलीं। साथ ही ऐसी लिपी मिली जो बारहवीं शताब्दी की थी। प्रो. दुबे के अलावा मध्यकालीन इतिहास विभाग के प्रो. सुशील श्रीवास्तव का भी अयोध्या से जुड़ाव रहा। विवादित ढांचे पर वर्ष 1991 में प्रकाशित उनकी पुस्तक उस वक्त काफी चर्चित हो गई, जब 1992 में विवादित ढांचा गिराया गया। इसके बाद चले मुकदमे में प्रो. सुशील श्रीवास्तव को बतौर इतिहासकार मुकदमे में गवाही हुई। प्रो. सुशील अब इस दुनिया में नहीं हैं।
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