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हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा पाए दो अभियुक्त बरी, हाईकोर्ट ने कहा विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं

Sat, 30 May 2020 07:06 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 30 May 2020 07:06 PM IST
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Two accused sentenced to life imprisonment for murder, acquitted, High court says reliable evidence not available
न्यायालय - फोटो : file photo
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा पाए कानपुर नगर के जगतपाल और झब्बू उर्फ सोमनाथ की सजा रद्द करते हुए उनको हत्या के जुर्म से बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि अभियुक्तों के विरुद्ध पेश किए गए साक्ष्य और गवाह विश्वसनीय नहीं हैं और अधीनस्थ न्यायालय ने निर्णय देने में गलती की है। जगतपाल व अन्य की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने दिया है। 
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मामला कानपुर नगर के महराजपुर थाने का है। नौ जनवरी 1992 को वादी मुकदमा पुत्ती लाल ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उसका भतीजा रामधनी ट्यूबवेल पर सोने के लिए गया था। सुबह देर तक वापस नहीं लौटा तो वह उसे देखने ट्यूबवेल पर गया। रास्ते में उसे रामलाल कुशवाहा के कराहने की आवाज सुनाई दी।
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रामलाल ने बताया कि जगतपाल सिंह, झब्बू और पृथ्वीपाल सुबह करीब चार बजे रामधनी के ट्यूबवेल पर गए थे और तीनों ने उसे कुल्हाड़ी, हॉकी और धारदार हथियारों से मार दिया। शोर सुनकर जब वह मौके पर पहुंचा तो अभियुक्तों ने उसे भी मारापीटा और धमकी दी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। अधीनस्थ न्यायालय ने अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सुनाई।
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इसके खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयान प्राथमिकी में लिखाए गए तथ्यों से मेल नहीं खाते हैं। प्राथमिकी नौ घंटे के विलंब से लिखाई गई जिसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है। गवाहों और अभियुक्तों के बीच पुरानी रंजिश थी। हत्या का आरोप संदेह से परे साबित नहीं होता है।
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