{"_id":"6a3ac0306c0eeb9fd2052e1b","slug":"traders-troubled-by-online-notices-demand-correspondence-via-post-allahabad-news-c-262-1-slp1001-171084-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: व्यापारियों को ऑनलाइन नोटिस से दिक्कत, पत्राचार की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: व्यापारियों को ऑनलाइन नोटिस से दिक्कत, पत्राचार की मांग
विज्ञापन
टैक्स बार एसोसिएशन ने राज्य कर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर व्यापारियों को महत्वपूर्ण नोटिस ऑनलाइन के बजाय पत्राचार माध्यमों से भेजने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था से करदाताओं को तकनीकी और इंटरनेट संबंधी समस्याओं के कारण समय पर जानकारी नहीं मिल पाती है। इससे उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में विभाग नोटिस तामील केवल ऑनलाइन माध्यम से करा रहा है। हालांकि प्रशासनिक दृष्टि से यह व्यवस्था सुविधाजनक है। लेकिन कई करदाताओं को तकनीकी कारणों से नोटिस की जानकारी नहीं मिल पाती। इंटरनेट की अनुपलब्धता और पोर्टल संबंधी समस्याएं भी इसमें बाधा बनती हैं।
इस कारण कई मामलों में करदाता अनभिज्ञ रह जाते हैं। उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों और कानूनी दुष्परिणामों का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार भी नोटिस की प्रभावी तामील सुनिश्चित होनी चाहिए।
विज्ञापन
पत्राचार से पारदर्शिता और न्यायसंगत कार्रवाई
टैक्स बार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार, अरुण किशोर कपूर, संतोष कुमार शर्मा, संजय श्रीवास्तव, दीपक मौर्य समेत अन्य पदाधिकारियों ने इस संबंध में अपनी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण नोटिसों की तामील केवल ऑनलाइन माध्यम से नहीं होनी चाहिए। इसके लिए स्पीड पोस्ट, पंजीकृत डाक या अन्य पत्राचार माध्यमों का उपयोग किया जाए। इससे प्रत्येक करदाता को नोटिस की जानकारी समय पर मिल सकेगी।
साथ ही, विभागीय कार्रवाई अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बन पाएगी। उपायुक्त राज्य कर वेगराज सिंह ने बताया कि पत्र प्राप्त हुआ है। हर महीने सैकड़ों की संख्या में करदाताओं को नोटिस भेजी जाती है। पत्राचार के माध्यम से नोटिस भेजने के संबंध में उच्च अधिकारियों से बजट की मांग की जाएगी। बजट मिलने पर पत्र के माध्यम से नोटिस भेजी जा सकेगी।
विज्ञापन
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में विभाग नोटिस तामील केवल ऑनलाइन माध्यम से करा रहा है। हालांकि प्रशासनिक दृष्टि से यह व्यवस्था सुविधाजनक है। लेकिन कई करदाताओं को तकनीकी कारणों से नोटिस की जानकारी नहीं मिल पाती। इंटरनेट की अनुपलब्धता और पोर्टल संबंधी समस्याएं भी इसमें बाधा बनती हैं।
विज्ञापन
इस कारण कई मामलों में करदाता अनभिज्ञ रह जाते हैं। उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों और कानूनी दुष्परिणामों का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार भी नोटिस की प्रभावी तामील सुनिश्चित होनी चाहिए।
विज्ञापन
पत्राचार से पारदर्शिता और न्यायसंगत कार्रवाई
टैक्स बार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार, अरुण किशोर कपूर, संतोष कुमार शर्मा, संजय श्रीवास्तव, दीपक मौर्य समेत अन्य पदाधिकारियों ने इस संबंध में अपनी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण नोटिसों की तामील केवल ऑनलाइन माध्यम से नहीं होनी चाहिए। इसके लिए स्पीड पोस्ट, पंजीकृत डाक या अन्य पत्राचार माध्यमों का उपयोग किया जाए। इससे प्रत्येक करदाता को नोटिस की जानकारी समय पर मिल सकेगी।
साथ ही, विभागीय कार्रवाई अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बन पाएगी। उपायुक्त राज्य कर वेगराज सिंह ने बताया कि पत्र प्राप्त हुआ है। हर महीने सैकड़ों की संख्या में करदाताओं को नोटिस भेजी जाती है। पत्राचार के माध्यम से नोटिस भेजने के संबंध में उच्च अधिकारियों से बजट की मांग की जाएगी। बजट मिलने पर पत्र के माध्यम से नोटिस भेजी जा सकेगी।