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रेलवे : मदुरै जैसे हादसे को रोकने के लिए सैलून में अब इलेक्ट्रिक चूल्हा, तमिलनाडु की घटना से रेलवे ने लिया सबक

Sun, 24 Sep 2023 05:13 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 24 Sep 2023 05:13 PM IST
सार

रेलवे स्टेशनों के तमाम स्टॉलों आदि से एलपीजी सिलिंडर हटाए कई वर्ष बीत चुके हैं,लेकिन अफसरों के लिए जाने वाले सैलून से नहीं हटाए गए थे। जब रेलवे के वरिष्ठ अफसर विभागीय निरीक्षण या बैठकों के लिए जाते हैं तो ट्रेन में उनका सैलून भी लगता है।

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To prevent accidents like Madurai, now electric stoves in salons, Railways learned a lesson from the incident
रेलवे पैंट्रीकार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पिछले माह मदुरै में ट्रेन के एक कोच में लगी आग की घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने बड़ी पहल की है। रेलवे अफसरों के निरीक्षण यान (सैलून) से एलपीजी सिलेंडर हटाकर इलेक्ट्रिक चूल्हा (इंडक्शन) लगाया जा रहा है। ऐसा करने वाला एनसीआर संभवत: भारतीय रेल का पहला जोन है।

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दरअसल, उत्तर भारत में दिल्ली के बाद सर्वाधिक सैलून प्रयागराज में ही हैं। यहां प्रयागराज मंडल के जिम्मे 18 सैलून का रखरखाव है। 18 में पांच सैलून केंद्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन (कोर) के हैं। यहां प्रयोग के तौर अफसरों के सैलून में एलपीजी सिलेंडर के स्थान पर इलेक्ट्रिक चूल्हा लगाया जाएगा। एक-एक करके सभी सैलून से भी सिलेंडर हटाने की तैयारी है।

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रेलवे स्टेशनों के तमाम स्टॉलों आदि से एलपीजी सिलिंडर हटाए कई वर्ष बीत चुके हैं,लेकिन अफसरों के लिए जाने वाले सैलून से नहीं हटाए गए थे। जब रेलवे के वरिष्ठ अफसर विभागीय निरीक्षण या बैठकों के लिए जाते हैं तो ट्रेन में उनका सैलून भी लगता है। सैलून में ही अधिकारियों और साथ चलने वाले कर्मचारियों के लिए खाना उसकी पैंट्री में सिलेंडर पर ही बनता है।

अफसरों की नजर इस पर पड़ी और उन्होंने सिलेंडर हटाकर इलेक्ट्रिक चूल्हा लगाने का फैसला किया। प्रयागराज मंडल के पीआरओ अमित सिंह का कहना है कि सैलून में इलेक्ट्रिक चूल्हा लगाए जाने संबंधी सभी जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं।

एनसीआर में 21 तो एनईआर में है 15 सैलून

प्रदेश में दो जोन उत्तर मध्य रेलवे और पूर्वाेत्तर रेलवे के मुख्यालय हैं। उत्तर मध्य रेलवे का प्रयागराज तो पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय गोरखपुर में है। इन दोनों ही जोनल रेलवे के पास क्रमश: 21 एवं 15 सैलून हैं। इन्हीं से ही अफसर निरीक्षण के जाते हैं। अमूमन सैलून में दो शयन कक्ष, एक बैठक कक्ष, दो बॉथरूम, एक रसोई एवं स्टाफ के आराम के लिए अलग से बर्थ होती है।

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