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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   There is no shortcut to success : Justice Chandracud

सफलता का कोई शार्टकट नहीं : न्यायमूर्ति चंद्रचूड

Sat, 03 Oct 2015 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 03 Oct 2015 01:58 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। एसएस खन्ना डिग्री कॉलेज की ओर से निबंध लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को पुरस्कृत करने के बाद कार्यक्रम के मुख्य वक्ता इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं है। इसे पाने के लिए हमें सतत प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने अपने बचपन की कुछ यादें ताजा करते हुए कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। यदि आप सफलता चाहते हैं तो लगातार अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर मेहनत करें। उन्होंने पुरस्कार जीतने वालों के साथ उपस्थिति लोगों से कहा कि मानवता के लिए समर्पित होकर काम करें।
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कहा कि मानवता एक सागर के समान है। यदि चंद बूंदें मैली हो जाती हैं तो पूरा सागर मैला नहीं होता। हमें अपनी पहचान बनाए रखने के लिए सतत प्रयास करना चाहिए। उन्होंने लोगों से प्रकृति संरक्षण की अपील करते हुए कहा कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखना चाहिए। उन्होंने अपना पूरा संबोधन हिंदी और अंग्रेजी में दिया। कहा कि मराठी में बोलता हूं परंतु हिंदी तो दिल की भाषा है। उन्होंने समारोह में मौजूद छात्र-छात्राओं को मानवीय मूल्यों की रक्षा की सीख दी। मुख्य न्यायाधीश ने अपने बचपन की यादें ताजा करने साथ हाथ में चोट लगने पर परीक्षा से बचने का बहाना करने पर अपने टीचर की प्रतिक्रिया सुनाकर सभी को प्रभावित किया। उन्होंने अपने बचपन के एक दोस्त को मंच से याद कर सभी को भावुक कर दिया।
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राज्यपाल राम नाईक पुरस्कार पाने वाले छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक की भूमिका में नजर आए। उन्होंने कहा कि पुरस्कार पाने बाद उनके मन में अहंकार नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा बनने केलिए कभी चेहरे पर तनाव न पालें, हमेशा मुस्कराते रहें। अच्छा काम करने वाले को हमेशा प्रोत्साहित करें, किसी की अवमानना न करें, मन में अहंकार न पालें, हमेशा बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करने का प्रयास करें। कहा कि अपने देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, आवश्यकता है उन्हें खोजने की। सारस्वत खत्री पाठशाला ने प्रतिभाओं की पहचान करके उन्हें पुरस्कृत करने का जो अभियान चलाया है, उसकी प्रशंसा करनी चाहिए। उन्होंने प्रो. दामोदरदास खन्ना को लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में योगदान करने वाले युगपुरुष के रूप में याद किया।
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पुरस्कार वितरण समिति के उपाध्यक्ष प्रो. मानस मुकुल दास ने शिक्षा मंत्रालय को मानव संसाधन विकास मंत्रालय नाम रखने पर सवाल उठाया। कहा कि मानव का कोई संसाधन है। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कहा कि यह पुरस्कार मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए प्लेटफार्म है। कार्यक्रम में कॉलेज समिति के राजीव खन्ना, प्राचार्या सिप्रा सान्याल, मंडलायुक्त राजन शुक्ल, पूर्वांचल विवि के कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान एसएस खन्ना डिग्री कॉलेज में तीन बार आने वाले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे कलाम पर स्मारिका का विमोचन किया गया। इस दौरान अगले वर्ष के निबंध के शीर्षक की घोषणा की गई।

अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल रामनाईक ने मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड की प्रशंसा करने के साथ चुटकी भी ली। कहा कि वह न्यायमूर्ति चंद्रचूड के फैसले लगातार पढ़ते रहते हैं। उन्होंने जनहित के कई महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। फैसलों के पढ़ने के साथ वह और मुख्य न्यायाधीश कुछ प्रमुख मुद्दों पर चिट्ठी का भी आदान प्रदान करते रहते हैं।


दामोदरश्री अवॉर्ड समारोह का संचालन कर रहीं डॉ. आशा उपाध्याय के संचालन से मुग्ध होकर राज्यपाल राम नाईक ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से संचालिका के लिए ताली बजाने को कहा। डॉ. आशा उपाध्याय ने हिंदी में जबकि अंग्रेजी में संचालन डॉ. लालिमा सिंह ने किया।
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