फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The strategy to contain chaos in university

विवि में अराजकता पर अंकुश के लिए बनी रणनीति

Wed, 22 Jun 2016 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 22 Jun 2016 01:31 AM IST
विज्ञापन
The strategy to contain chaos in university
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बवाल 22 - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में नया सत्र शुरू होने से पहले ही अराजकता पर अंकुश लगाने की कवायद शुरू कर दी गई है। परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश रोकने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे तो छात्रावासों में भी प्रवेश की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करने का निर्णय लिया गया है। ताकि, अवैध लोगों को समय रहते बाहर किया जा सके।
विज्ञापन


विश्वविद्यालय में अराजकता की लगातार शिकायतें रही हैं। नया सत्र चार जुलाई को शुरू होगा। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की है। कुलपति ने इसकी जिम्मेदारी भी सख्ती के लिए जाने जाने वाले प्रोफेसर माता अंबर तिवारी को दी है। उन्हें विश्वविद्यालय का सुरक्षा एवं छात्र कल्याण सलाहकार बनाया गया है। इस पद पर कार्यभार ग्रहण करने के बाद प्रोफेसर माता अंबर तिवारी ने मंगलवार को डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर हर्ष कुमार, चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर आईआर सिद्दीकी और सुरक्षा अधिकारी अजय सिंह के साथ वार्ता की। उसमें सभी पहलुओं पर चर्चा हुई।
विज्ञापन


बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि  विश्वविद्यालय में प्रवेश के साथ ही हॉस्टलों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। इसके बाद वैध और अवैध विद्यार्थियों की सूची जारी कर कार्रवाई की जाए। हॉस्टलों में जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित कराने पर भी सहमति बनी, जिससे कि आंदोलन न खड़ा हो सके। इस संबंध में आगे की रणनीति बनाने के लिए वार्डेन और अधीक्षकों की जल्द बैठक होगी। प्रोफेसर माता अंबर तिवारी ने बताया कि अभी यह पहली बैठक थी। विश्वविद्यालय तथा हॉस्टल परिसर में अराजकता रोकने के लिए जल्द ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सुरक्षा इंतजाम के अलावा विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन



इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पदाधिकारी निवर्तमान हो गए हैं। उनका कार्यकाल 15 मई को ही खत्म हो चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मंगलवार को इसका आदेश जारी कर दिया गया। डीएसडब्ल्यू प्रोफेसर हर्ष कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नियमावली के अनुसार छात्रसंघ का कार्यकाल संबंधित वर्ष में एकेडमिक सत्र तक के लिए होता है, जो 15 मई को पूरा हो चुका है।

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि कुलपति, रजिस्ट्रार समेत अन्य अफसरों पर लगाए गए आरोपों की बाबत साक्ष्य प्रधानमंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेज दिए गए हैं। अब उसे सभी दलों के सांसदों को भी भेजा जा रहा है। मंत्रालय को वह पत्र भी भेजा गया है जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रसंघ अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। ऋचा का कहना है कि आरोप कुलपति और रजिस्ट्रार पर हैं। इसलिए उन्हें दस्तावेज उपलब्ध कराने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन कोई कार्रवाई करता है तो आंदोलन चलाया जाएगा।

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षकों के बैकलॉग पदों पर भर्ती के लिए निकाले गए विज्ञापर को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है। कई विभागों में रोस्टर के पद बदल गए हैं। इसे लेकर अभ्यर्थी न्यायालय जाने की भी तैयारी में हैं।


विश्वविद्यालय में 16 विभाग में बैकलॉग के 44 पदों के लिए आवेदन मांगा गया है। इनमें से कई विभागों के लिए 2014 में भी आवेदन मांगा गया था लेकिन भर्ती नहीं हो पाई। उन अभ्यर्थियों को भी इस भर्ती में शामिल करने की घोषणा की गई है। इसके विपरीत दोनों विज्ञापनों में पदों की स्थिति को लेकर विवाद बन गया है। 2014 के विज्ञापन में बायोकेमेस्ट्री में भी एक पद के लिए आवेदन मांगा गया था लेकिन इस बार वह पद शामिल नहीं है। इसी तरह से सीबीसीएस, शिक्षाशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान में भी पदों की संख्या बदल गई है। रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ला का कहना है एफआरडीसी के निदेशक ने विज्ञापन तैयार किया है। उनसे बात की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed