फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The split between the saints came to the fore on the Shodashi rites, three recluse akhadas created distance

मठ बाघंबरी गद्दी : षोडशी संस्कार पर सामने आई संतों के बीच की फूट, तीन वैरागी अखाड़ों ने बनाई दूरी

Wed, 06 Oct 2021 04:29 PM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज
अनूप ओझा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 06 Oct 2021 04:29 PM IST
सार

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की षोडशी पूजा और नए महंत की चादर विधि में तीन अखाड़े नहीं हुए शामिल, सतह पर आया संन्यासियों और वैरागियों के बीच वर्चस्व का विवाद

विज्ञापन
The split between the saints came to the fore on the Shodashi rites, three recluse akhadas created distance
प्रयागराज के मठ बाद्यंबरी गद्दी के नए महंत बनाए गए बलवीर गिरि के पट्टा अभिषेक में शामिल संत-महात्मा। संवाद - फोटो : prayagraj

विस्तार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के षोडशी संस्कार पर मंगलवार को अखाड़ों की आपसी फूट खुलकर सामने आ गई। महंत की षोडशी पूजा, पुष्पांजलि, भंडारा और बाघंबरी मठ के नए महंत के पट्टाभिषेक से तीन वैष्णव(वैरागी) अखाड़ों के पीठाधीश्वरों, महामंडलेश्वरों और महंतों ने दूरी बना ली।
विज्ञापन

The split between the saints came to the fore on the Shodashi rites, three recluse akhadas created distance
बाघंबरी गद्दी मठ में महंत नरेंद्र गिरि के षोडशी कार्यक्रम में प्रसाद ग्रहण करते महामंडलेश्वर एवं संत-महात्मा से मिलते बलवीर गिरि । संवाद - फोटो : prayagraj
चादर भेजना तो दूर, वह इस आयोजन से पूरी तरह अलग रहे। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की षोडशी से तीन अखाड़ों के अलग होने को अखाड़ों में बड़ी टूटन के तौर पर देखा जा रहा है। निरंजनी अखाड़े के संतों ने इसे पुरानी नाराजगी भी बताई और वैरागियों -संन्यासियों के बीच महीनों पहले से अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खींचतान भी।  

महंत नरेंद्र गिरि के षोडशी संस्कार में 13 में से सिर्फ 10 अखाड़े ही शामिल हुए। वैष्णवों में वैरागी संप्रदाय के तीन अखाड़ों में दिगंबर अनी अखाड़ा, निर्वाणी अनी अखाड़ा और निर्मोही अनी अखाड़ा के संतों के न आने से समारोह के दौरान ही तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। महंत की मौत के दूसरे दिन हत्या का आरोप लगाने वाले भाजपा के पूर्व सांसद महंत राम विलास वेदांती, राम मंदिर विवाद के पक्षकार रहे महंत धर्मदास भी इस खास आयोजन से दूर रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

The split between the saints came to the fore on the Shodashi rites, three recluse akhadas created distance
प्रयागराज के मठ बाद्यंबरी गद्दी के नए महंत बनाए गए बलवीर गिरि के पट्टा अभिषेक में शामिल संत-महात्मा। संवाद - फोटो : prayagraj
षोडशी के आयोजन से दूरी बनाने के  सवाल पर महंत धर्मदास ने कहा कि नया महंत बनाने और महंतई चादर ओढ़ाने का यह निरंजनी अखाड़े के भीतर का मामला था। ऐसे आयोजनों में जाने का कोई औचित्य नहीं बनता। वैसे भी महंत की मौत की विदाई वह लेना नहीं चाहते थे। वह भारी मन से यह भी कहते हैं कि सीबीआई जांच से पहले नए महंत की चादर विधि कैसे हो गई? इस सवाल पर भी लोगों को सोचना चाहिए। फिर, भी वे इस पचड़े में नहीं पड़ना चाहते।

इसी तरह वैष्णव परंपरा के संत रामानुजाचार्य घनश्यामाचार्य ने बताया कि वह एक धार्मिक आयोजन में हिस्सा लेने मध्यप्रदेश आ गए हैं। ऐसे में षोडशी में हिस्सा नहीं ले पाना संभव नहीं था। हालांकि अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरि इस प्रकरण को अध्यक्ष पद के पुराने विवाद से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि हरिद्वार कुंभ में ही वैरागी अखाड़ों से दूरी बन गई थी।
विज्ञापन

The split between the saints came to the fore on the Shodashi rites, three recluse akhadas created distance
प्रयागराज के मठ बाद्यंबरी गद्दी के नए महंत बनाए गए बलवीर गिरि के पट्टा अभिषेक में शामिल संत-महात्मा। संवाद - फोटो : prayagraj
वैरागी परंपरा के तीनों अखाड़े के संत चाहते हैं कि उनके कुनबे से ही अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बनाया जाए। चूंकि पिछले दो बार से परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री के दोनों पद संन्यासी अखाड़ों के ही पास हैं। इसके अलावा भी हरिद्वार कुंभ में भूमि आवंटन को लेकर वैरागी अखाड़े नाराज हो गए थे। दूसरी वजह वह कोरोना संक्रमण को भी मानते हैं। उनका कहना है कि कोविड प्रोटोकॉल की वजह से भी तीनों अखाड़े इस आयोजन से दूर हो सकते हैं।

वैष्णव परंपरा के तीनों अखाड़े बीते अप्रैल में हरिद्वार कुंभ में शाही स्नान से पहले ही हमसे अलग हो गए थे। चूंकि नरेंद्र गिरि ही उस समय अध्यक्ष थे, इसलिए उनसे उन अखाड़ों की पुरानी नाराजगी चली आ रही है। इस वजह से षोडशी समारोह में विवाद बढ़ने की आशंका से उन तीनों अखाड़ों के संतों को बुलाया ही नहीं गया था। महंत रवींद्र पुरी, सचिव निरंजनी अखाड़ा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed