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पाबंदी हटते ही घट गया फसल बीमा का दायरा, किसान नहीं दिखा रहे रुचि

Wed, 04 Aug 2021 11:18 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 04 Aug 2021 11:18 AM IST
सार

  • दो वर्ष में बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में आई 11 हजार से अधिक की कमी, बीमित रकबा भी 22 हजार हेक्टेयर हुआ कम

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The scope of crop insurance decreased as soon as the ban was lifted, farmers are not showing interest
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना - फोटो : twitter: @BJP4Delhi

विस्तार

फसलों का बीमा कराने को लेकर किसानों में बहुत उत्साह नहीं दिख रहा। पहले भी सिर्फ 10 प्रतिशत किसान अपनी पैदावार का बीमा कराते रहे। पाबंदी हटने के बाद इसमें और कमी आ गई है। स्थिति यह है कि इस वर्ष करीब 44 हजार किसानों ने रबी फसलों का बीमा कराया है। जबकि दो वर्ष पूर्व यह संख्या 55 हजार से अधिक थी। इतना ही नहीं बीमित रकबा में तो करीब 22 हजार हेक्टेयर की कमी आई है।
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जिले में करीब छह लाख किसान हैं। रबी फसलों की बात करें तो 2019 में 55691 किसानों ने 55691 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा कराया था। इसके लिए सिर्फ किसानों ने दो करोड़ 74 लाख 50 हजार 900 रुपये प्रीमियम के रूप में जमा किए थे। इस दौरान किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले हर किसान के लिए फसल का बीमा कराना अनिवार्य था लेकिन इसके बाद यह पाबंदी हटा ली गई। अब केकेसी लेने वाले किसानों की इच्छा पर है कि वे फसलों का बीमा कराएं या नहीं। इस पाबंदी के हटने का नतीजा रहा कि 2021 में सिर्फ 43972 किसानों ने 33847.01 हेक्टेयर रकबा का बीमा कराया है। हालांकि इन्होंने अधिक प्रीमियम भुगतान किया है। 2021 में किसानों ने 2.97 करोड़ रुपये से अधिक राशि प्रीमियम के रूप में जमा की।
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गिनती के किसानों को ही मिल पाता है लाभ 

फसली बीमा नहीं कराने के पीछे मुख्य वजह  कसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाना है। स्थिति यह है कि 2018-19 में रबी की बोआई करने वाले सिर्फ आठ किसानों को भुगतान हुआ था। 2018 में भी सिर्फ 101 किसानों को खरीब की फसल बर्बाद होने पर लाभ मिला था। 2017 से प्राप्त आंकड़ों को देखें तो सिर्फ पिछले वर्ष 14008 किसानों को लाभ मिला था। इनकी रबी की फसल बर्बाद हो गई थी। अन्य वर्षों में यह संख्या काफी कम रही है।
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...तो और घट जाएगा बीमित रकबा

केकेसी लेने वाले किसानों के लिए फसलों का बीमा कराने की बाध्यता तो नहीं रह गई है लेकिन उन्हें इस बाबत लिखकर देना होगा। इसके लिए तारीख भी निर्धारित है। निर्धारित तारीख से पहले लिखित में सूचना नहीं देने वाले किसानों की फसल का बीमा स्वत: कर दिया जाता है। प्रीमियम की राशि भी उनके केकेसी खाते से काट ली जाती है। अफसरों का कहना है कि  यह पाबंदी भी हटाकर सिर्फ इच्छा जाहिर करने वाले किसानों की फसलों का ही बीमा कराया जाए तो फलस बीमा योजना के आंकड़ें और निराश करने वाले होंगे।
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