{"_id":"6063553e8ebc3ee64703b8f9","slug":"the-principal-of-the-cavs-will-receive-the-state-teacher-award-city-desk-news-ald3029254133","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीएवी के प्रधानाचार्य को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीएवी के प्रधानाचार्य को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार
विज्ञापन
प्रयागराज। सीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. त्रिभुवन प्रसाद पाठक को राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। लेकिन, उन्हें यह पुरस्कार पूर्व में चयनित एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज के प्रवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव के स्थान पर दिया जाएगा। आशीष कुमार श्रीवास्तव का नाम हटाकर उनकी जगह डॉ. त्रिभुवन प्रसाद पाठक के नाम को चयनित किए जाने के बाद तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व में जिला स्तरीय और मंडल स्तरीय कमेटियों की संस्तुति के आधार पर राजकीय, अशासकीय सहायक प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से पुरस्कार के लिए शिक्षकों के नाम चयनित किए गए थे। इसके बावजूद शासन को पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों की सूची में संशोधन करना पड़ा।
इस बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा का कहना है कि पूर्व में चयनितों की सूची को चुनौती देते हुए सीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. त्रिभुवन प्रसाद पाठक ने प्रार्थनापत्र देकर दावा किया था कि निर्धारित मानकों के तहत वह पुरस्कार के लिए पात्र हैं। इस पर शासन ने जिला एवं मंडलीय कमेटी से इसका परीक्षण कराया और मंडलीय कमेटी की संस्तुति के आधार पर अब आशीष कुमार श्रीवास्तव की जगह डॉ. त्रिभुवन प्रसाद पाठक को राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।
विज्ञापन
पुरस्कार के लिए निर्धारित मानकों को न्यायालय में चुनौती
- राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए दस वर्ष का शिक्षण अनुभव और पांच वर्ष के लिए प्रधानाचार्य पद का अनुभव अनिवार्य है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. इंदु सिंह ने पुरस्कार के लिए निर्धारित मानकों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर 19 अप्रैल को सुनवाई है। डॉ. इंदू सिंह का दावा है कि राष्ट्रीय स्तर पर इस पुरस्कार के लिए प्रधानाचार्य पद पर पांच वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता नहीं है तो राज्य स्तर पर पुरस्कार के लिए यह अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन
पूर्व में जिला स्तरीय और मंडल स्तरीय कमेटियों की संस्तुति के आधार पर राजकीय, अशासकीय सहायक प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों और संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन माध्यम से पुरस्कार के लिए शिक्षकों के नाम चयनित किए गए थे। इसके बावजूद शासन को पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों की सूची में संशोधन करना पड़ा।
विज्ञापन
इस बारे में जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा का कहना है कि पूर्व में चयनितों की सूची को चुनौती देते हुए सीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. त्रिभुवन प्रसाद पाठक ने प्रार्थनापत्र देकर दावा किया था कि निर्धारित मानकों के तहत वह पुरस्कार के लिए पात्र हैं। इस पर शासन ने जिला एवं मंडलीय कमेटी से इसका परीक्षण कराया और मंडलीय कमेटी की संस्तुति के आधार पर अब आशीष कुमार श्रीवास्तव की जगह डॉ. त्रिभुवन प्रसाद पाठक को राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।
विज्ञापन
पुरस्कार के लिए निर्धारित मानकों को न्यायालय में चुनौती
- राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए दस वर्ष का शिक्षण अनुभव और पांच वर्ष के लिए प्रधानाचार्य पद का अनुभव अनिवार्य है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. इंदु सिंह ने पुरस्कार के लिए निर्धारित मानकों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर 19 अप्रैल को सुनवाई है। डॉ. इंदू सिंह का दावा है कि राष्ट्रीय स्तर पर इस पुरस्कार के लिए प्रधानाचार्य पद पर पांच वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता नहीं है तो राज्य स्तर पर पुरस्कार के लिए यह अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए।