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उर्दू-फारसी में आज भी कैद खाकी की कलम, पुलिस महकमे में दोनों भाषाओं पर टिकी है सारी व्यवस्था

Mon, 23 Aug 2021 07:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 23 Aug 2021 07:21 PM IST
सार

  • थानों की लिखापढ़ी समझना आम आदमी के लिए आसान नहीं

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The police department has been imprisoned in Urdu and Persian, Hindi is not far away
उर्दू

विस्तार

‘पुलिस गश्त में मामूर थी। तभी जरिए मुखबिर मालूम हुआ कि एक नफर अभियुक्त मयमाल मौजूद है। इस पर हमरान सिपाहियान संग दबिश देकर उसे पकड़ा गया है। उसका हश्म हुलिया जैल है। ’ फर्द (लिखित सूचना) की इस भाषा से थानों में पुलिसकर्मी रोजाना दो-चार होते हैं, लेकिन आम लोगों के लिए इसे समझना टेढ़ी खीर है। हाल यह है कि आजादी के 75 साल बाद भी पुलिस विभाग में उर्दू-फारसी शब्दों का प्रयोग बहुतायत में हो रहा है। यह तब है जबकि शासन ही नहीं बल्कि उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ने भी पुलिस विभाग कोकामकाज में हिंदी के प्रयोग का आदेश दिया है।

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1861 में जब पुलिस एक्ट बना तो अंग्रेजों ने इसकी आधिकारिक भाषा हिंदुस्तानी बनाई। यह हिंदी, उर्दू, फारसी शब्दों का मिश्रण थी। उस दौरान हिंदी के साथ ही उर्दू, फारसी और अरबी शब्दों के जानकार भी थे और इसी को देखते हुए इसे अपनाया गया। हालांकि आजादी के 75 साल बाद भी पुलिस को इस मिश्रित भाषा से आजादी नहीं मिल सकी है और इसकेचलते पुलिस विभाग के कामकाज को भी पूरी तरह से हिंदी में नहीं किया जा सका।

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The police department has been imprisoned in Urdu and Persian, Hindi is not far away
Prayagraj News : एफआईआर - फोटो : social media

नए जवानों को भी परेशानी
पुलिस विभाग के कामकाज में उर्दू, फारसी, अरबी शब्दों के प्रयोग से आम लोगों को तो परेशानी होती ही है, विभाग में भर्ती होने वाले नए जवानों को भी इसे समझने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इससे कई बार जनरल डायरी में गलत प्रविष्टि भी कर दी जाती है। जानकारों का कहना है कि सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम) लागू होने के बाद एफआईआर में तो अब हिंदी के ही शब्दोें का प्रयोग किया जाता है। लेकिन फर्द और जीडी में अब भी ज्यादातर शब्द उर्दू व फारसी के ही होते हैं।

The police department has been imprisoned in Urdu and Persian, Hindi is not far away
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
पुलिस में रोजाना इस्तेमाल होने वाले कुछ शब्द
आला कत्ल- कत्ल में प्रयुक्त हथियार
दौराने गश्त- गश्त के दौरान
तसहुद- व्यवहार
बेजा- गलत
साकी नहीं- गवाह का न होना
जरायम- अपराध
मुनकिर- इंकार
जानिब- दिशा
बाइस्तवाह- प्रकाश में आया
जैल- स्वस्थ

शासन का भी निर्देश है कि हिंदी को बढ़ावा दिया जाए। मौजूदा दौर में पुलिस विभाग में भी ज्यादातर कामकाज हिंदी में ही हो रहा है। मातहतों को समय-समय पर इसके लिए निर्देशित भी किया जाता है।- केपी सिंह, आईजी रेंज प्रयागराज
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