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अगला सत्र भी अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे
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The next session also depends on guest spokespersons
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अगला सत्र भी अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे
इविवि में नियमित कुलपति की नियुक्ति तक भर्ती पर ग्रहण
कई अन्य शिक्षकों के रिटायरमेंट से बिगड़ सकती है स्थिति
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में अगला सत्र भी अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे होगा। विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति की नियुक्ति तक भर्ती पर ग्रहण लगा रहेगा। आने वाले समय में कई शिक्षक सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या भी बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर पठन-पाठन पर पड़ेगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती के लिए तीन बार विज्ञापन जारी किया जा चुका है, लेकिन हर बार किसी न किसी विवाद के कारण भर्ती फंस गई। इससे पूर्व नौ माह पहले शिक्षकों के 558 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन लिए गए थे, लेकिन विवाद होने के कारण केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भर्ती पर रोक लगा दी थी। 558 पदों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 336, एसोसिएट प्रोफेसर के 156 और प्रोफेसर के 66 पद शामिल हैं। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में मंत्रालय ने भर्ती पर लगी रोक हटा ली, लेकिन कुछ दिनों बाद ही प्रो. आरएल हांगलू ने कुलपति के पद से इस्तीफा दे दिया और भर्ती फिर फंस गई।
नियमित कुलपति के आने में थोड़ा वक्त लगेगा और इसके बाद ही इविवि में शिक्षक भर्ती शुरू हो सकेगी। नौ माह पहले जारी विज्ञापन में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद के लिए ईडब्ल्यूएस आरक्षण व्यवस्था भी लागू नहीं की गई थी और इसकी शिकायत मंत्रालय से की गई थी, जिसके बाद मंत्रालय ने ईब्ल्यूएस आरक्षण व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए थे। वहीं, आने वाले समय में इविवि के कई शिक्षक रिटायर होने जा रहे हैं। ऐसे में रिक्त पदों की संख्या भी बढ़ेगी। ऐसे में इविवि प्रशासन को नए सिरे से पदों की गणना करते हुए विज्ञापन जारी करना पड़ सकता है। अगला सत्र इन तमाम प्रक्रियाओं को पूरा करने में ही बीत जाएगा। ऐसे में अगले सत्र में इविवि में शिक्षक भर्ती मुश्किल नजर आ रही है। ऐसे में इविवि में कक्षाओं का संचालन अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे ही रहेगा।
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इविवि में नियमित कुलपति की नियुक्ति तक भर्ती पर ग्रहण
कई अन्य शिक्षकों के रिटायरमेंट से बिगड़ सकती है स्थिति
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में अगला सत्र भी अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे होगा। विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति की नियुक्ति तक भर्ती पर ग्रहण लगा रहेगा। आने वाले समय में कई शिक्षक सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या भी बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर पठन-पाठन पर पड़ेगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती के लिए तीन बार विज्ञापन जारी किया जा चुका है, लेकिन हर बार किसी न किसी विवाद के कारण भर्ती फंस गई। इससे पूर्व नौ माह पहले शिक्षकों के 558 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन लिए गए थे, लेकिन विवाद होने के कारण केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भर्ती पर रोक लगा दी थी। 558 पदों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 336, एसोसिएट प्रोफेसर के 156 और प्रोफेसर के 66 पद शामिल हैं। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में मंत्रालय ने भर्ती पर लगी रोक हटा ली, लेकिन कुछ दिनों बाद ही प्रो. आरएल हांगलू ने कुलपति के पद से इस्तीफा दे दिया और भर्ती फिर फंस गई।
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नियमित कुलपति के आने में थोड़ा वक्त लगेगा और इसके बाद ही इविवि में शिक्षक भर्ती शुरू हो सकेगी। नौ माह पहले जारी विज्ञापन में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद के लिए ईडब्ल्यूएस आरक्षण व्यवस्था भी लागू नहीं की गई थी और इसकी शिकायत मंत्रालय से की गई थी, जिसके बाद मंत्रालय ने ईब्ल्यूएस आरक्षण व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए थे। वहीं, आने वाले समय में इविवि के कई शिक्षक रिटायर होने जा रहे हैं। ऐसे में रिक्त पदों की संख्या भी बढ़ेगी। ऐसे में इविवि प्रशासन को नए सिरे से पदों की गणना करते हुए विज्ञापन जारी करना पड़ सकता है। अगला सत्र इन तमाम प्रक्रियाओं को पूरा करने में ही बीत जाएगा। ऐसे में अगले सत्र में इविवि में शिक्षक भर्ती मुश्किल नजर आ रही है। ऐसे में इविवि में कक्षाओं का संचालन अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे ही रहेगा।
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