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शुचिता के लिए नए अध्यक्ष को बदलने होंगे कई फैसले
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 16 Oct 2015 01:37 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के नए अध्यक्ष के लिए भी राह आसान नहीं दिख रही। अभी नए अध्यक्ष का नाम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन भर्तियों की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए कार्यभार संभालने के बाद नए अध्यक्ष को पूर्व में लिए गए कई फैसलों को तत्काल बदलना होगा। अन्यथा, उन्हें भी प्रतियोगियों के तीव्र विरोध तथा कानूनी लड़ाई का सामना करना पड़ेगा।
भर्तियों में अनियमितता पर पर्दा डालने के लिए लोकसेवा आयोग में पिछले ढाई साल में कई विवादित फैसले लिए गए। यहां तक कि आयोग चयनितों के नाम भी घोषित नहीं करता। आयोग की एक बैठक में हुए फैसले के तहत सिर्फ रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। यहां तक कि पीसीएस में चयनितों के नाम भी आयोग ने घोषित नहीं किए। इससे पहले आयोग में चयनितों की जाति घोषित न करने का निर्णय लिया गया था। आयोग ने अंकपत्र देखने की प्रक्रिया भी काफी जटिल कर दी है। पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव की अध्यक्षता में कई अन्य फैसले भी लिए गए जिससे भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इतना ही नहीं आयोग ने परीक्षा केंद्र एलाटमेंट की व्यवस्था भी बदल दी है। नई व्यवस्था के तहत संबंधित या नजदीक के जिले में परीक्षा केंद्र नहीं दिया जाता। दूर के जिलों में भेजा जाता है। इतना ही नहीं अनिल यादव ने इटावा, मैनपुरी को भी परीक्षा केंद्र बना दिया। इससे भी प्रतियोगियों में काफी नाराजगी है। अनिल यादव पर जो आरोप लगते रहे हैं उनसे बचने के लिए नए अध्यक्ष को इन फैसलों को बदलने होंगे। इसके अलावा अनिल यादव की कार्यशैली की वजह से आयोग की साख भी धूमिल हुई है। नए अध्यक्ष के सामने उसे फिर से स्थापित करने की भी चुनौती होगी।
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दसवीं में 45 फीसदी अंक पाने वाला ढाई साल रहा अध्यक्ष
इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईस्कूल में 45 फीसदी अंक पाने वाला व्यक्ति लोक सेवा आयोग जैसी संस्था का पहले छह वर्ष सदस्य फिर ढाई साल तक अध्यक्ष रहा। इस दौरान उन्होंने कई एसडीएम, डिप्टी एसपी, प्रवक्ता आदि पदाें पर भर्ती की। अनिल यादव पर आपराधिक मामले तो हैं ही, एकेडमिक रिकार्ड भी अच्छा नहीं है। अनिल के हाईस्कूल में मात्र 45.60 फीसदी अंक हैं। प्रतियोगियों ने जो साक्ष्य लगाए हैं उसमें यह तथ्य है। सिर्फ एक विषय में अनिल को 50 अंक मिले हैं। अन्य चार विषय में इससे कम अंक हैं। इतना ही नहीं अनिल यादव ने इंटरमीडिएट की परीक्षा भी द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण की है।
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भर्तियों में अनियमितता पर पर्दा डालने के लिए लोकसेवा आयोग में पिछले ढाई साल में कई विवादित फैसले लिए गए। यहां तक कि आयोग चयनितों के नाम भी घोषित नहीं करता। आयोग की एक बैठक में हुए फैसले के तहत सिर्फ रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर परिणाम घोषित किए जा रहे हैं। यहां तक कि पीसीएस में चयनितों के नाम भी आयोग ने घोषित नहीं किए। इससे पहले आयोग में चयनितों की जाति घोषित न करने का निर्णय लिया गया था। आयोग ने अंकपत्र देखने की प्रक्रिया भी काफी जटिल कर दी है। पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव की अध्यक्षता में कई अन्य फैसले भी लिए गए जिससे भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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इतना ही नहीं आयोग ने परीक्षा केंद्र एलाटमेंट की व्यवस्था भी बदल दी है। नई व्यवस्था के तहत संबंधित या नजदीक के जिले में परीक्षा केंद्र नहीं दिया जाता। दूर के जिलों में भेजा जाता है। इतना ही नहीं अनिल यादव ने इटावा, मैनपुरी को भी परीक्षा केंद्र बना दिया। इससे भी प्रतियोगियों में काफी नाराजगी है। अनिल यादव पर जो आरोप लगते रहे हैं उनसे बचने के लिए नए अध्यक्ष को इन फैसलों को बदलने होंगे। इसके अलावा अनिल यादव की कार्यशैली की वजह से आयोग की साख भी धूमिल हुई है। नए अध्यक्ष के सामने उसे फिर से स्थापित करने की भी चुनौती होगी।
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दसवीं में 45 फीसदी अंक पाने वाला ढाई साल रहा अध्यक्ष
इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईस्कूल में 45 फीसदी अंक पाने वाला व्यक्ति लोक सेवा आयोग जैसी संस्था का पहले छह वर्ष सदस्य फिर ढाई साल तक अध्यक्ष रहा। इस दौरान उन्होंने कई एसडीएम, डिप्टी एसपी, प्रवक्ता आदि पदाें पर भर्ती की। अनिल यादव पर आपराधिक मामले तो हैं ही, एकेडमिक रिकार्ड भी अच्छा नहीं है। अनिल के हाईस्कूल में मात्र 45.60 फीसदी अंक हैं। प्रतियोगियों ने जो साक्ष्य लगाए हैं उसमें यह तथ्य है। सिर्फ एक विषय में अनिल को 50 अंक मिले हैं। अन्य चार विषय में इससे कम अंक हैं। इतना ही नहीं अनिल यादव ने इंटरमीडिएट की परीक्षा भी द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण की है।