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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The market is also divided between Chaumin disease

चाऊमीन बाजार में भी बंट रही बीमारी

Sat, 06 Jun 2015 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 06 Jun 2015 01:56 AM IST
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इलाहाबाद। मैगी की जांच हुई, इसलिए उसकी हकीकत सामने आ गई। मैगी की तरह सड़क किनारे ठेके पर बिकले वाली चाऊमीन भी बच्चों की लत बन चुकी है। चाऊमीन को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमे मिलाए जाने वाले रसायन बच्चों के लिए कितने हानिकारक हैं, यह जांच का विषय है लेकिन एक बात साफ है कि सामान्य रूप से चाऊमीन बनाने में उपयोग किया जाना वाला पदार्थ अजीनो मोटो बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक है।
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चाऊमीन का बाजार न सिर्फ सड़क किनारे खड़े ठेलों तक सीमित है, बल्कि हर छोटे-बड़े समारोहों में भी इसका चलन तेजी से बढ़ा है। रेस्टोरेंट्स में बिकने वाले फास्ट फूड में भी चाऊमीन ने अपनी अलग जगह बना ली है। चाऊमीन में आखिर ऐसा क्या खास है, जिसकी वजह से बच्चों के साथ बड़े भी इसके दीवाने बन गए हैं। हालांकि मैगी की हकीकत सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने चाऊमीन से भी तौबा कर ली है। लोगों का आशंका है कि चाऊमीन में भी मैगी की तरह कोई ऐसा रसायन तो नहीं मिलाया जा रहा है, जो सेहत के लिए खतरनाक हो। यही वजह है कि एक तरफ बाजार से मैगी गायब होने लगी तो चाऊमीन का बाजार भी तेजी से गिर रहा है। रेस्टोरेंट में चाऊमीन की मांग कम हुई है तो ठेलों पर भी चाऊमीन के शौकीनों की संख्या अब कम नजर आने लगी है।
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‘चाऊमीन में मिलाया जाना वाला अजीनो मोटो नामक तत्व सेहत के लिहाज से बेहद खरतनाक है। इसका असर तुरंत नहीं दिखाई पड़ता लेकिन लंबे समय तक इसके सेवन से किडनी और लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।’ डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, फिजिशियन, एसआरएन अस्पताल
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 आहार के असंतुलन के कारण न सिर्फ गांव बल्कि शहर के बच्चे भी कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। दाल, चावल, रोटी जैसे परंपरागत भोजन छोड़कर बच्चे नूडल्स, वेफर्स, चॉकलेट, चिप्स, कुरकुरे और टॉफी से अपना पेट भर रहे हैं। इससे बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ी है। साथ ही कुपोषण के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने से कई अन्य बीमारियां भी घेर रही हैं। चिल्ड्रेन अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. डीके सिंह का कहना है कि  बच्चे नूडल्स, वेफर्स, चॉकलेट, कुरकुरे आदि चीजें दिन भर खाते रहते हैं। इसी से उनका पेट भर जाता है और वे खाना नहीं खातेे हैं।


ये चीजें धीरे-धीरे उनकी आदत में शुमार हो गई हैं। इससे बच्चों के शरीर को विटामिन, आयरन, मिनरल्स, प्रोटीन जैसे कई पोषकतत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहे और आहार का यही असंतुल बच्चों को कुपोषित बना रहा है। इससे बच्चों में पेट दर्द की समस्या आम हो गई है। उनमें खून की कमी (एनीमिया), कमजोरी, उल्टी जैसी समस्याएं बढ़ रही है। अभिभावकों को सलाह है कि बच्चों को पराठा, पूड़ी, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दूध, मट्ठा, अंडे जैसी चीजें दें। डायटीशियन अपर्णा का कहना है कि बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि जंकफूड से दूर रखा जाए। नूडल्स, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक्स जैसी चीजें बिल्कुल न दी जाए।
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