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हजरत मोहम्मद साहब का जीवन इंसानियत के लिए रहमत : मौलाना समीउद्दीन
Sat, 29 Aug 2026 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sat, 29 Aug 2026 01:51 AM IST
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ललगोपालगंज स्थित रजा जामा मस्जिद में खिताब करते मोलाना
- फोटो : Archive
कस्बा स्थित रजा जामा मस्जिद में मदरसा हबीबिया के शिक्षक मौलाना समीउद्दीन का विशेष दौरा हुआ। शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान उन्होंने नमाजियों को खिताब कर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी बयान किया। नमाज के बाद देश में अमन-चैन और नेपाल में आई त्रासदी से पीड़ित लोगों की सलामती के लिए विशेष दुआ मांगी गई।
मौलाना समीउद्दीन ने खुतबा जुमा में कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब का जीवन पूरी इन्सानियत के लिए रहमत, इन्साफ और अमन का पैगाम है। उनकी जीवनी हमें सच्चाई, अमानतदारी, सब्र एवं कमजोरों की मदद करने की सीख देती है। मोहम्मद साहब ने समाज में यतीमों, बेसहारा लोगों तथा जरूरतमंदों के अधिकार दिलाए। महिलाओं के सम्मान एवं आपसी भाईचारे की मिसाल कायम की।
उन्होंने अपने दुश्मनों के साथ भी हमेशा सदाचार का व्यवहार किया। इसलिए हमें भी चाहिए कि नफरत और बुराइयों को समाप्त करे व समाज में अमन-चैन के लिए हुजूर की सीरत को अपनाकर उनके बताए नेक रास्ते पर चलना बेहद जरूरी है। जुमा नमाज के बाद सलात व सलाम पेश कर शीरनी तकसीम की गई। यहां रईस अहमद, मोहम्मद इलियास, शमशाद अहमद, रजी उल्ला, मुशीर अहमद, शब्बीर हसन अंसारी, गुलाम रसूल, दिलशाद अहमद आदि रहे।
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मौलाना समीउद्दीन ने खुतबा जुमा में कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब का जीवन पूरी इन्सानियत के लिए रहमत, इन्साफ और अमन का पैगाम है। उनकी जीवनी हमें सच्चाई, अमानतदारी, सब्र एवं कमजोरों की मदद करने की सीख देती है। मोहम्मद साहब ने समाज में यतीमों, बेसहारा लोगों तथा जरूरतमंदों के अधिकार दिलाए। महिलाओं के सम्मान एवं आपसी भाईचारे की मिसाल कायम की।
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उन्होंने अपने दुश्मनों के साथ भी हमेशा सदाचार का व्यवहार किया। इसलिए हमें भी चाहिए कि नफरत और बुराइयों को समाप्त करे व समाज में अमन-चैन के लिए हुजूर की सीरत को अपनाकर उनके बताए नेक रास्ते पर चलना बेहद जरूरी है। जुमा नमाज के बाद सलात व सलाम पेश कर शीरनी तकसीम की गई। यहां रईस अहमद, मोहम्मद इलियास, शमशाद अहमद, रजी उल्ला, मुशीर अहमद, शब्बीर हसन अंसारी, गुलाम रसूल, दिलशाद अहमद आदि रहे।
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