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सावन में जेठ की दुपहरी, पारा 35 डिग्री पर ठहरा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 26 Aug 2015 01:31 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। सावन के महीने में भारी उमस जान निकाल लेने पर आमादा है। जिस मौसम में पारा 20 से 25 डिग्री के बीच होना चाहिए, पारा 35 डिग्री के ऊपर पिछले कई दिनों से ठहरा हुआ है। पारे की ऊंची छलांग से मौसम का पूरा तानाबाना ही पलट गया है। दिन में बेहद कम आर्र्दता ने शरीर को निचोड़कर रख दिया है। शहरियोें को मंगलवार को कुछ ऐसे ही खतरनाक मौसम का सामना करना पड़ा।
मौसम विभाग की मानें तो मंगलवार को अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री और न्यूनतम 26.7 डिग्री दर्ज किया गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के इतने कम अंतर का ही असर रहा कि दिन में न्यूनतम आर्द्रता 65 फीसदी पर पहुंच गई। जिसने शरीर को निचोड़कर रख दिया। भारी उमस और गर्मी का आलम यह रहा कि कई लोग सरेराह बेसुध होकर गिर पड़े, जिन्हें बमुश्किल होश में लाया जा सका।
मौसम विज्ञानी भी मौसम का मिजाज पढ़ने में नाकाम साबित हो रहे है। मौसम को लेकर आए दिन की जाने वाली तमाम भविष्यवाणी गलत साबित हो रही है। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा का कहना है कि गर्म पछुवा हवाएं मौसम का सारा खेल बिगाड़ रही हैं। हालांकि मौसम का मिजाज चौंकाने वाला है। जिस मौसम में तापमान कम होना और न्यूनतम आर्द्रता 80 फीसदी से ऊपर होनी चाहिए, ऐसे समय में इतनी कम आर्द्रता वाकई चौंकाने वाली है। मौसम विज्ञानी डॉ. ओझा का मानना है कि गर्म पछुवा हवाएं नम पुरवइया को टिकने नहीं दे रही हैं। यही वजह है कि मानसून दगा दे रहा है। जब कभी पुरवइया जोर पकड़ती है तो हल्की बारिश हो जाती है।
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बेली अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. ओपी त्रिपाठी का कहना है कि मौसम के बदले मिजाज का असर सेहत पर दिखाई दे रहा है। वर्तमान में अस्पताल में वायरल बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी व डायरिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जहां तक बीमारियों के बचाव का सवाल है तो सड़क पर निकलते समय मुंह ढककर निकलें। धुएं व धूल से बचाव करने के अलावा खानपान में एहतियात बरतने की जरूरत है। खाने से पहले हाथ, मुंह को अच्छी तरह जरूर साफ करना चाहिए।
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मौसम विभाग की मानें तो मंगलवार को अधिकतम तापमान 35.1 डिग्री और न्यूनतम 26.7 डिग्री दर्ज किया गया। अधिकतम और न्यूनतम तापमान के इतने कम अंतर का ही असर रहा कि दिन में न्यूनतम आर्द्रता 65 फीसदी पर पहुंच गई। जिसने शरीर को निचोड़कर रख दिया। भारी उमस और गर्मी का आलम यह रहा कि कई लोग सरेराह बेसुध होकर गिर पड़े, जिन्हें बमुश्किल होश में लाया जा सका।
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मौसम विज्ञानी भी मौसम का मिजाज पढ़ने में नाकाम साबित हो रहे है। मौसम को लेकर आए दिन की जाने वाली तमाम भविष्यवाणी गलत साबित हो रही है। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा का कहना है कि गर्म पछुवा हवाएं मौसम का सारा खेल बिगाड़ रही हैं। हालांकि मौसम का मिजाज चौंकाने वाला है। जिस मौसम में तापमान कम होना और न्यूनतम आर्द्रता 80 फीसदी से ऊपर होनी चाहिए, ऐसे समय में इतनी कम आर्द्रता वाकई चौंकाने वाली है। मौसम विज्ञानी डॉ. ओझा का मानना है कि गर्म पछुवा हवाएं नम पुरवइया को टिकने नहीं दे रही हैं। यही वजह है कि मानसून दगा दे रहा है। जब कभी पुरवइया जोर पकड़ती है तो हल्की बारिश हो जाती है।
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बेली अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. ओपी त्रिपाठी का कहना है कि मौसम के बदले मिजाज का असर सेहत पर दिखाई दे रहा है। वर्तमान में अस्पताल में वायरल बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी व डायरिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। जहां तक बीमारियों के बचाव का सवाल है तो सड़क पर निकलते समय मुंह ढककर निकलें। धुएं व धूल से बचाव करने के अलावा खानपान में एहतियात बरतने की जरूरत है। खाने से पहले हाथ, मुंह को अच्छी तरह जरूर साफ करना चाहिए।