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प्रषिक्षण देते स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुधवार को शहर के धर्मगुरुओं, कब्रिस्तान कमेटियों और श्मशान घाट कमेटियों को कोरोना पॉजिटिव शवों के अंतिम संस्कार के बारे में जानकारी दी गई। आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में अंतिम संस्कार के लिए कब्रिस्तानों और शवदाह गृहों का भी निर्धारण किया गया। साथ ही श्मशान घाट पर कोरोना पॉजिटिव शवों के अंतिम संस्कार करने को मना किया गया।
सीएमओ कार्यालय में जानकारी देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियुक्त अधिकारी डॉ. महानंद, डॉ. आरसी पांडेय और डॉ. मीशम जैदी ने धर्मगुरुओं व कमेटी सदस्यों को बताया कि कोरोना पॉजिटिव शवों के अंतिम संस्कार में सावधानी बरतने की जरूरत है। अंतिम संस्कार के दौरान शव को प्लास्टिक बैग से निकलना नहीं है और न ही उसकी चैन को खोलना है। बैग में कवर शव को शवदाहगृहों में जला देना है या फिर दफना देना है। उन्होंने बताया कि हिंदू परंपरा के अनुसार रसूलाबाद या दारागंज स्थित शवदाह गृह में मरीज के शव जलाए जाएंगे। इस दौरान शासन से बंद पड़े दारागंज शवदाह गृह को चालू कराने की मांग की गई। वहीं मुस्लिम समुदाय में शियाओं के कोरोना पॉजिटिव शवों को कर्बला कब्रिस्तान में और सुन्नी के शवों को पुराना कालाडांडा कब्रिस्तान में, ईसाई प्रोटेस्टेंट के शवों को राजापुर स्थित सीमेट्री पर और कैथोलिक के शवों को म्योराबाद में दफनाया जाएगा।
बैठक के दौरान कोरोना पॉजिटिव के शव दफनाने के लिए शहर से दूर सुनसान इलाके में सरकार से भूमि दिए जाने की मांग की गई। बताया गया कि इस संबंध में शासन को पत्र भी भेजा जाएगा। प्रशिक्षकों ने बताया कि शव शवदाहगृहों को या कब्रिस्तानों में ले जाने के लिए जो लोग जाएंगे, वे पीपीई किट, ग्लब्स, मास्क सहित जरूरी उपकरण पहने रहेंगे। उसमें लापरवाही नहीं की जाएगी। श्मशान घाट कमेटियों से कहा गया कि कोई भी कोरोना पॉजिटिव शव घाटों पर जलाए न जाएं। अंतिम संस्कार स्वास्थ्य टीमों की निगरानी में की होगा। इस मौके पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के प्रतिनिधि, शिया धर्म गुरू मौलाना रजी हैदर, सुन्नी धर्मगुरु डॉ. अनवर अहमद, जावेद अहमद, एसएस असरफ, मो. हबीब, प्रो. मो. शाहिद, फादर मनोज स्टेफिंस, अजय कुमार, विनेाद कुमार पटेल, संतोष कुमार यादव, डॉ. अखिलेष कुमार, डॉ. नरेंद्र आदि मौजूद रहे।
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सीएमओ कार्यालय में जानकारी देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियुक्त अधिकारी डॉ. महानंद, डॉ. आरसी पांडेय और डॉ. मीशम जैदी ने धर्मगुरुओं व कमेटी सदस्यों को बताया कि कोरोना पॉजिटिव शवों के अंतिम संस्कार में सावधानी बरतने की जरूरत है। अंतिम संस्कार के दौरान शव को प्लास्टिक बैग से निकलना नहीं है और न ही उसकी चैन को खोलना है। बैग में कवर शव को शवदाहगृहों में जला देना है या फिर दफना देना है। उन्होंने बताया कि हिंदू परंपरा के अनुसार रसूलाबाद या दारागंज स्थित शवदाह गृह में मरीज के शव जलाए जाएंगे। इस दौरान शासन से बंद पड़े दारागंज शवदाह गृह को चालू कराने की मांग की गई। वहीं मुस्लिम समुदाय में शियाओं के कोरोना पॉजिटिव शवों को कर्बला कब्रिस्तान में और सुन्नी के शवों को पुराना कालाडांडा कब्रिस्तान में, ईसाई प्रोटेस्टेंट के शवों को राजापुर स्थित सीमेट्री पर और कैथोलिक के शवों को म्योराबाद में दफनाया जाएगा।
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बैठक के दौरान कोरोना पॉजिटिव के शव दफनाने के लिए शहर से दूर सुनसान इलाके में सरकार से भूमि दिए जाने की मांग की गई। बताया गया कि इस संबंध में शासन को पत्र भी भेजा जाएगा। प्रशिक्षकों ने बताया कि शव शवदाहगृहों को या कब्रिस्तानों में ले जाने के लिए जो लोग जाएंगे, वे पीपीई किट, ग्लब्स, मास्क सहित जरूरी उपकरण पहने रहेंगे। उसमें लापरवाही नहीं की जाएगी। श्मशान घाट कमेटियों से कहा गया कि कोई भी कोरोना पॉजिटिव शव घाटों पर जलाए न जाएं। अंतिम संस्कार स्वास्थ्य टीमों की निगरानी में की होगा। इस मौके पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि के प्रतिनिधि, शिया धर्म गुरू मौलाना रजी हैदर, सुन्नी धर्मगुरु डॉ. अनवर अहमद, जावेद अहमद, एसएस असरफ, मो. हबीब, प्रो. मो. शाहिद, फादर मनोज स्टेफिंस, अजय कुमार, विनेाद कुमार पटेल, संतोष कुमार यादव, डॉ. अखिलेष कुमार, डॉ. नरेंद्र आदि मौजूद रहे।
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