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Prayagraj News: दो माह से स्वतंत्रता सेनानी के मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए दौड़ा रहे परिवार को
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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...। मेला लगाकर स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को हर सुविधाओं का लाभ देने की बात कही गई थी। लेकिन, देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले संगमनगरी के आखिरी स्वतंत्रता सेनानी अहमदपुर पावा निवासी मकसूद उल्ला का परिवार उनके मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए करीब दो महीने से अस्पताल का चक्कर लगा रहा है। लानत है ऐसे सिस्टम पर, जो नियम-कानून का हवाला देकर उनके परिवार को दौड़ा रहा है।
तबीयत खराब होने पर 96 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी मकसूद उल्ला को स्वरूप रानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां 15 जून को उनका निधन हो गया था। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था, लेकिन अब मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए उनके बेटे मोहज्जम दो माह से अस्पताल में चक्कर लगा रहे हैं।
मोहज्जम की पत्नी का भी 26 जून को निधन हो गया था। मोहज्जम का कहना है कि दोनों के मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए वह रोजाना अस्पताल जाते हैं लेकिन कर्मचारी आज-कल कहकर टाल देते हैं। उन्होंने पैसे मांंगने का भी आरोप लगाया।
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वहीं, अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजय सक्सेना का कहना है कि मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। उनकी तरह से उपलब्ध कराए गए दस्तावेज में कुछ कमी होगी। इसकी वजह से प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा होगा, इसे दिखवाएंगे।
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तबीयत खराब होने पर 96 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी मकसूद उल्ला को स्वरूप रानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां 15 जून को उनका निधन हो गया था। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था, लेकिन अब मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए उनके बेटे मोहज्जम दो माह से अस्पताल में चक्कर लगा रहे हैं।
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मोहज्जम की पत्नी का भी 26 जून को निधन हो गया था। मोहज्जम का कहना है कि दोनों के मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए वह रोजाना अस्पताल जाते हैं लेकिन कर्मचारी आज-कल कहकर टाल देते हैं। उन्होंने पैसे मांंगने का भी आरोप लगाया।
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वहीं, अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजय सक्सेना का कहना है कि मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। उनकी तरह से उपलब्ध कराए गए दस्तावेज में कुछ कमी होगी। इसकी वजह से प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा होगा, इसे दिखवाएंगे।