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महामना के अथक प्रयासों से ही बना हिंदू छात्रावास

Thu, 25 Dec 2014 01:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद Updated Thu, 25 Dec 2014 01:44 AM IST
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The efforts made ??by the high-minded Hindu hostel
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हिन्दू छात्रावास भी महामना के अनेक प्रयासों में से एक है। दरअसल वर्ष 1887 में जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय की नींव पड़ी तो यहां दाखिला लेने के लिए होड़ और बढ़ गई। यह उत्तर भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय था। यहां कई प्रांत से विद्यार्थी पढ़ने के लिए आते लेकिन यहां रहने का खर्च वहन करना उनके लिए कठिन था।
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ईसाई और मुस्लिम छात्रों के रहन-सहन में भिन्नता भी लेकिन हिन्दू छात्रों के लिए कठिनाई थी।  महामना ने छात्रों के इसी दर्द को समझा और उनके अध्ययन तथा आवास के लिए ऐसे छात्रावास के निर्माण का संकल्प लिया, जहां मदिरा तथा मांस का सेवन पूर्णत: प्रतिबंधित हो हिन्दू मान्यताओं, परंपराओं के अनुरूप रह सकें।
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यूपी के गवर्नर एटनी मैक्डोनल की पहल पर आरके दवे के तालाब को पाटकर वर्ष 1903 में 250 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास का निर्माण शुरू हुआ। एटनी के नाम पर ही इसका नाम मैक्डोनल यूनिवर्सिटी हिन्दू बोर्डिंग हाउस रखा गया। 1950 में इसका नाम मदन मोहन मालवीय यूनिवर्सिटी कालेज हो गया। लोगों ने उनके इस संकल्प का दिल खोलकर स्वागत किया। महामना से इसके लिए देश भर में घूम-घूमकर राशि एकत्र की। रायबहादुर लाला सांवलदास ने एक हजार रुपये का चेक दिया। शुरुआती दौर में हॉस्टल में पढ़ाई भी होती रही।
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क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद समेत कई स्वतंत्रता सेनानी यहां रहा करते थे। आजाद के अतिरिक्त पूर्व राष्ट्रपति डॉ.शंकर दयाल शर्मा, गोविंद बल्लभ पंत, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, एनडी तिवारी, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला, उर्दू शायरी के मशहूर हस्ताक्षर फिराक गोरखपुरी, कविवर सुमित्रानंदन पंत, धर्मवीर भारती समेत अनेक महापुरुष इस हॉस्टल में रहे। हालांकि आज यह हॉस्टल बदहाली और अराजकता का शिकार है। कई कमरों के प्लास्टर टूटे हैं तो हर तरफ गंदगी का अंबार भी है।


 ‘मुंडक उपनिषद’ का जो सूत्रवाक्य  ‘सत्यमेव जयते’ सामाजिक सरोकारों और अस्मिता से जुड़कर भारतीयता की पहचान बना, उसका सबसे पहले उद्घोष महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने किया था। मशहूर वकील, पत्रकार, शिक्षाविद् महामना देश के ऐेसे चिंतक, मनीषी थे जिन्होंने अंग्रेजों की नाइंसाफी के खिलाफ ‘सत्यमेव जयते’ का उद्घोष दिया और बाद में वही भारतीयता की पहचान बन गया। भारतीयता को पहचान दिलाने में महामना का योगदान अतुलनीय है।
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