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Prayagraj News: कुंभ म्यूजियम से विश्व पटल पर प्रदर्शित होगी मानवता की संस्कृति
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योगी आदित्यनाथ सरकार ने सोमवार को बजट प्रावधानों में प्रयागराज के धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए बड़ा कदम उठाया। मानवता क संस्कृति को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने के लिए डिजिटल कुंभ म्यूजियम के लिए बजट आवंटित कर दिया गया। इसके साथ ही शृंगवेरपुर धाम में निषादराज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना के लिए बजट प्रावधान कर प्रभु श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने की योजना को गति दे दी गई।
बजट स्वीकृत होने से महाकुंभ-2025 से पहले डिजिटल कुंभ म्यूजियम पर काम शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। पिछले महीनों में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र कुंभ म्यूजियम के स्वरूप पर अफसरों के साथ मंथन कर चुके हैं। संगम के सामने अरैल में कलश के आकार में कुंभ म्यूजियम का टॉवर बनाने की योजना पहले से प्रस्तावित है, लेकिन बजट न होने की वजह से अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका था।
इस म्यूजियम के जरिए देश-दुनिया के पर्यटकों को एक ही छत के नीचे भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और जीवन दर्शन से परिचित कराया जाएगा। प्रयागराज के सांस्कृतिक वैभव को विश्व पटल पर उभारने के लिए संगमनगरी में कुंभ की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक परंपरा को डिजिटल कुंभ म्यूजियम के माध्यम से संरक्षित किया जाएगा। भूमि और लागत को लेकर सहमति न बन पाने की वजह से यह परियोजना वर्ष-2019 में ठंडे बस्ते में चली गई थी, लेकिन अब इसे साकार करने की दिशा मेंं फिर योगी आदित्यनाथ सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। पहले इसके लिए 283.63 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। अफसरों के मुताबिक देश का यह पहला डिजिटल कुंभ म्यूजियम होगा, जिसमें भारतीय संस्कृति के दर्शन हो सकेंगे।
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इस योजना के तहत देश की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहरों के डेटा को डिजिटल फार्मेट में संरक्षित किया जाएगा। इस म्यूजियम में प्रयागराज में संगम स्नान के साथ ही अक्षयवट, द्वादश माधव, भरद्वाज मुनि आश्रम, दुर्वासा आश्रम, शृंगवेरपुर धाम, राम वन गमन मार्ग के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भारतीय संस्कृति की गौरव गाथा को डिजिटल फार्मेट में प्रदर्शित किया जाएगा। इस म्यूजियम में महापुरुषों की प्रतिमाओं के अलावा भारतीय कला-संस्कृति के विविध रूपों के साथ ही संगम के वैज्ञानिक तथ्यों से भी लोगों को परिचित कराया जा सकेगा। इसी तरह निषाद राज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र में प्रभु श्रीराम के आदर्शों से लोग परिचित हो सकेंगे।
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बजट स्वीकृत होने से महाकुंभ-2025 से पहले डिजिटल कुंभ म्यूजियम पर काम शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। पिछले महीनों में मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र कुंभ म्यूजियम के स्वरूप पर अफसरों के साथ मंथन कर चुके हैं। संगम के सामने अरैल में कलश के आकार में कुंभ म्यूजियम का टॉवर बनाने की योजना पहले से प्रस्तावित है, लेकिन बजट न होने की वजह से अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका था।
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इस म्यूजियम के जरिए देश-दुनिया के पर्यटकों को एक ही छत के नीचे भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और जीवन दर्शन से परिचित कराया जाएगा। प्रयागराज के सांस्कृतिक वैभव को विश्व पटल पर उभारने के लिए संगमनगरी में कुंभ की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक परंपरा को डिजिटल कुंभ म्यूजियम के माध्यम से संरक्षित किया जाएगा। भूमि और लागत को लेकर सहमति न बन पाने की वजह से यह परियोजना वर्ष-2019 में ठंडे बस्ते में चली गई थी, लेकिन अब इसे साकार करने की दिशा मेंं फिर योगी आदित्यनाथ सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। पहले इसके लिए 283.63 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। अफसरों के मुताबिक देश का यह पहला डिजिटल कुंभ म्यूजियम होगा, जिसमें भारतीय संस्कृति के दर्शन हो सकेंगे।
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इस योजना के तहत देश की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहरों के डेटा को डिजिटल फार्मेट में संरक्षित किया जाएगा। इस म्यूजियम में प्रयागराज में संगम स्नान के साथ ही अक्षयवट, द्वादश माधव, भरद्वाज मुनि आश्रम, दुर्वासा आश्रम, शृंगवेरपुर धाम, राम वन गमन मार्ग के दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भारतीय संस्कृति की गौरव गाथा को डिजिटल फार्मेट में प्रदर्शित किया जाएगा। इस म्यूजियम में महापुरुषों की प्रतिमाओं के अलावा भारतीय कला-संस्कृति के विविध रूपों के साथ ही संगम के वैज्ञानिक तथ्यों से भी लोगों को परिचित कराया जा सकेगा। इसी तरह निषाद राज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र में प्रभु श्रीराम के आदर्शों से लोग परिचित हो सकेंगे।