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मुक्त विवि में समाज वैज्ञानिकों का सम्मेलन

Mon, 03 Feb 2020 01:18 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 03 Feb 2020 01:18 AM IST
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The country is facing national challenges
The country is facing national challenges - फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। वर्तमान में देश राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। राष्ट्र सिर्फ एक भूखंड नहीं है, बल्कि राष्ट्र की परंपरा एवं संस्कृति भी महत्वपूर्ण है। मान्यताओं, विचारों और संस्कृति की एकरूपता से राष्ट्र सशक्त होता है। यह बात पूर्व गवर्नर केशरीनाथ त्रिपाठी ने रविवार को राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय समाज वैज्ञानिकों के सम्मेलन के उद्घाटन पर कहीं।
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बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि संगठित ऊर्जा से ही राष्ट्र निर्माण संभव है। राष्ट्रहित में समाज वैज्ञानिक एवं सामाजिक चिंतक समस्याओं की पहचान करें और लोगों की मानसिकता एवं वर्तमान आवश्यकताओं को समझते हुए राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाएं। कहा कि हमारी संस्कृति, विचारधारा, चिंतन एवं सभ्यता पर प्रहार हो रहा है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के साथ व्यक्तियों के चरित्र निर्माण की भी आवश्यकता है, जिसमें समाज वैज्ञानिक अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, उत्तर क्षेत्रीय केंद्र नई दिल्ली के मानद निदेशक प्रो. कौशल कुमार शर्मा ने कहा कि तकनीक से विकास होता है और समाज की दिशा बदलने में समाज वैज्ञानिकों की अहम भूमिका होती है। समय के साथ परंपराएं और समाज बदलता है, लेकिन हमेशा से विकास के लिए समाज में अच्छे मूल्य और शोध की आवश्यकता रही है। जेएनयू के प्रो. हीरामन तिवारी ने कहा कि व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र निर्माण दोनों ही आवश्यक हैं। प्राचीन काल से यह सिद्ध है कि भारत के ज्ञान ने सदैव विश्व का हित किया है।
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इस मौके पर शोध पत्र सारांशिका और समाज विज्ञान विद्या शाखा के प्रभारी प्रो. सुधांशु त्रिपाठी की पुस्तक ‘इंडियन फॉरेन पॉलिसी ओवर नॉन एलाइनमेंट 2.0’ का विमोचन भी कियागया। अतिथियों का स्वागत प्रो. गिरिजा शंकर शुक्ल, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनोद कुमार गुप्ता और संचालन जेएनयू के प्रो. सुधीर प्रताप सिंह एवं मुक्त विवि की डॉ. मारिषा ने किया। सम्मेलन में प्रो. अजय कुमार दुबे, प्रो. कौशल कुमार शर्मा, प्रो. पीसी जोशी, प्रो. ओम प्रकाश सिंह, प्रो. अनिल किशोर सिन्हा आदि मौजूद रहे।

दो सौ से अधिक शोध पत्र किए जाएंगे प्रस्तुत
सम्मेलन में राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं राजस्थान से विद्वान एवं विभिन्न शैक्षिक संस्थानों से आए शोधार्थियों के 10 उपविषयों में 200 से अधिक शोध पत्र चयनित किए गए हैं, जो तीन और चार फरवरी को विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किए जाएंगे।
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