SRN Hospital : युवक के सिर में धंसी कुल्हाड़ी को तीन घंटे ऑपरेशन करके निकाला, बचाई जान
कौशाम्बी के मंझनपुर निवासी (26) वर्षीय जय सिंह पर अज्ञात हमलावरों ने चार जनवरी की रात जानलेवा हमला किया था। इस हमले में युवक के सिर में कई सेंटीमीटर तक कुल्हाड़ी धंस गई थी। परिजन गंभीर रूप से घायल युवक को कौशाम्बी मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से चिकित्सकों ने उसे एसआरएन रेफर कर दिया।
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स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के चिकित्सकों ने सिर में धंसी कुल्हाड़ी को सफलतापूर्वक निकालकर युवक की जान बचा ली। कुल्हाड़ी को सिर से निकालने में न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों को तीन घंटे का मैराथन ऑपरेशन करना पड़ा। इस दौरान युवक के दिमाग को बचाना भी चिकित्सकों के लिए एक बड़ी चुनौती थी। इसे सफलतापूर्वक पार करके चिकित्सकों ने यह कारनामा कर दिखाया।
कौशाम्बी के मंझनपुर निवासी (26) वर्षीय जय सिंह पर अज्ञात हमलावरों ने चार जनवरी की रात जानलेवा हमला किया था। इस हमले में युवक के सिर में कई सेंटीमीटर तक कुल्हाड़ी धंस गई थी। परिजन गंभीर रूप से घायल युवक को कौशाम्बी मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां से चिकित्सकों ने उसे एसआरएन रेफर कर दिया।
एसआरएन पहुंचने के बाद न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. एसडी पांडेय और डॉ. यतेंद्र शुक्ला के नेतृत्व में तीन घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद युवक के सिर में धंसी कुल्हाड़ी को सफलतापूर्वक निकाला गया। इसके साथ ही दिमाग के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर उसकी जान बचाई गई। न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एसडी पांडेय ने बताया कि इस तरह के मामले बहुत जटिल होते हैं, जिसमें धारदार हथियार सिर के अंदर तक धंसा रहता है। इसमें दिमाग के हिस्से के क्षतिग्रस्त होने की संभावना रहती है।
इसलिए कुल्हाड़ी निकलते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि दिमाग के अन्य हिस्से पर इसका दुष्प्रभाव न पड़े। फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर है, और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। परिजन और अस्पताल प्रशासन ने इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए पूरी चिकित्सकीय टीम की सराहना की है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए यह सर्जरी किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थी। क्योंकि यह एक मेडिको लीगल केस भी है। ऐसे मामलों में मरीज के सर्वश्रेष्ठ उपचार के साथ हर कानूनी पहलू का ध्यान रखा जाता है। पुलिस को घटना की पूरी जानकारी दी गई है और मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस तरह के केस चिकित्सा विशेषज्ञता ही नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी और कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दिखाते हैं। - डॉ. वत्सला मिश्रा, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज
यह मामला अत्यंत गंभीर था। समय पर ऑपरेशन न होने की स्थिति में मरीज की जान जाना तय था। स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल का न्यूरो सर्जरी विभाग जटिल और संवेदनशील मामलों में भी पूरी क्षमता और मानवीय संवेदनाओं के साथ मरीजों की सेवा में तत्पर रहता है। - डॉ. यतेंद्र शुक्ला, अध्यक्ष, न्यूरो सर्जरी विभाग, एसआरएन