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टेरर फंडिंग : 15 दिनों में तीन बार प्रयागराज के पोल्ट्री फार्म में आया था शाहरुख  

Thu, 16 Sep 2021 09:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 16 Sep 2021 09:52 PM IST
सार

गौरतलब है कि मंगलवार को जीशान की निशानदेही पर एटीएस टीम ने डांडी मकसूदाबाद मोहल्ले स्थित पोल्ट्री फार्म से आईईडी डिवाइस बरामद की थी। इसके बाद से ही पोल्ट्री फार्म मालिक शाहरुख गायब है और उसकी तलाश की जा रही है।

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Terror funding: Shahrukh came to the poultry farm thrice in 15 days
Prayagraj News : सीसीटीवी में कैद हुआ शाहरुख का फोटो। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

जीशान की गिरफ्तारी के बाद से शाहरुख एटीएस व दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के लिए मोस्ट वांटेड बना हुआ है। टीम ने उसी के पोल्ट्री फार्म में आईईडी डिवाइस बरामद की थी। मोहल्ले वालों ने बताया पिछले 15 दिनों में तीन बार ही वह अपने पोल्ट्री फार्म आया था। 13 सितंबर की रात से पहले वह नौ सितंबर की शाम व उससे पहले माह की शुरुआत में आया था। हर बार वह किसी ने किसी के साथ ही अपने पोल्ट्री फार्म आया था। वहीं आईईडी मिलने के बाद से ही मोहल्ले वाले काफी सशंकित हैं। वहीं उसके रिश्तेदार भी घटना के बाद से किसी से मुलाकात करने में कतरा रहे हैं और घर में ही कैद हैं।

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गौरतलब है कि मंगलवार को जीशान की निशानदेही पर एटीएस टीम ने डांडी मकसूदाबाद मोहल्ले स्थित पोल्ट्री फार्म से आईईडी डिवाइस बरामद की थी। इसके बाद से ही पोल्ट्री फार्म मालिक शाहरुख गायब है और उसकी तलाश की जा रही है। उसकी तलाश में पुलिस उसके रिश्तेदारों व परिचितों के यहां दबिश डाल रही है। मोहल्ले वालों की मानें तो 13 सितंबर की रात को वह अपने साथी के साथ कार से पोल्ट्री फार्म पहुंचा था और यहां पर कुछ सामान भी रखा था।

इसके पहले वह नौ सितंबर की शाम को भी यहां आया था। इस दौरान उसके साथ एक युवक भी साथ था। मोहल्ले में रहने वाले रिश्तेदार ने बताया कि शाहरुख के साथ कौन आया था, वह उसे नहीं पहचानते है। माह की पहले हफ्ते में भी वह आया था और तब भी उसके साथ एक युवक था। हालांकि एटीएस की टीम मोहल्ले में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज पहले ही खंगाल चुकी है।

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ब्लैक फिल्म लगी कार से आता था 
नैनी। अपने पोल्ट्री फार्म में जिस कार से शाहरुख आया करता था उसमें ब्लैक फिल्म लगी थी। सोमवार देर शाम जब वह अपने साथी के साथ आया तो पास ही स्थित एक कारखाने में काम करने वाले मजदूर ने टार्च लगाकर देखने का प्रयास किया था। लेकिन ब्लैक फिल्म होने के कारण कुछ दिखाई नहीं पड़ा। पूछने पर उसने बताया मोहल्ले में अधिकतर कारखाने हैं। शाम होते ही सब कारखाने बंद हो जाते और मोहल्ले में सन्नाटा छा जाता है। ऐसे में कोई कार आती है तो उसमें देख लिया जाता है कि कोई संदिग्ध तो नहीं मौजूद है।

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 फार्म के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे में छिपे हैं कई राज 
डांडी मकसूदाबाद स्थित पोल्ट्री फार्म के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे में कई राज दफन हैं। वहां लगे सीसीटीवी का कनेक्शन किसने काटा व उसमें लगी चिप कहां गायब हो गई, इसको लेकर अभी तक काई तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। लोगों ने बताया कि तीन माह पहले तक पोल्ट्री फार्म में सैकड़ों की संख्या में देशी मुर्गे व बतख पाले गए थे। लेकिन शाहरुख ने अचानक ही इस काम को समेट लिया और कुछ मुर्गे ही फार्म में रह गए। फार्म के अंदर लगे सीसीटीवी से ही शाहरुख यहां पर निगरानी रखता था। अभी कुछ माह पहले ही उसने सीसीटीवी कैमरा लगवाया था। लेकिन एटीएस टीम की छापेमारी के बाद सीसीटीवी का कनेक्शन कटा हुआ मिला और उसमें से चिप भी गायब थी। कहा यह भी जा रही है कि या तो एटीएस टीम अपने साथ कैमरे की चिप ले गई या शाहरुख व उसके दोस्त ने चिप गायब की। 

तीसरे दिन भी जांच के लिए पहुंचे थे एजेंसी के लोग 
डांडी के मकसूदाबाद में शाहरुख के पोल्ट्री फार्म में तीसरे दिन भी जांच करने एजेंसी के दो लोग पहुंचे। यह कौन थे, इसके बारे में मोहल्ले वाले कुछ बता नहीं पाए। जांच को पहुंचे लोगों ने पोल्ट्री फार्म को देखने के साथ आसपास खाली प्लाट को देखा और मोबाइल पर तस्वीरें कैद कर ले गए। बुधवार को एलआईयू की टीम भी पहुंची थी और उन्होंने मोहल्ले वालों से बातचीत करते हुए उनका मोबाइल नंबर भी साथ ले गई थी। लेकिन बृहस्पतिवार को पहुंचे लोग केवल वहां पहुंचकर जांच की और फिर वापस लौट गए।

बाहरी मजदूर बड़ी संख्या में करते है वहां काम, पुलिस कभी नहीं करती वैरिफिकेशन 
डांडी मकसूदाबाद मोहल्ले में कई कारखाने हैं जहां पर आस-पास के प्रदेशों से आए कामगार काम करते हैं। लेकिन कभी कामगारों का वैरिफिकेशन नहीं किया जाता है। गौरतलब है कि रीवा राजमार्ग के डांडी बाजार व आस-पास सटे मोहल्ले में बड़ी गाड़ियों की रिपेेयरिंग के साथ अन्य कई कारखाने हैं, इसमें कई बाहरी मजदूर काम किया करते हैं। यह सभी मजदूर यहां काम करने के साथ ही यहां पर रहा भी करते है। मजदूर कहां से आए है, कब से हैं या उनका कोई अपराधिक रिकार्ड तो नहीं है, इसके बारे में न तो कारखाना मालिक को पूूरी जानकारी होती है और न ही पुलिस इसे लेकर किसी तरह की कार्रवाई करती है।
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