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निविदा की सेवा शतोऱ्ं पर नहीं हो सकता विचार
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निविदा की सेवा शर्तों पर नहीं हो सकता विचार
झांसी में पेयजल आपूर्ति योजना ठेके के खिलाफ याचिका खारिज
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट में निविदा दस्तावेजों की सेवा शर्तों को चुनौती नहीं दी जा सकती है जबकि, तक उसमें नैसर्गिंग न्याय के सिद्धांतों का हनन न हुआ हो। ऐसे मामले में अदालत विचार तभी विचार कर सकती है जब असंगत फैसले लिए गए हों और शक्तियों का दुरुपयोग किया गया हो। कोर्ट ने टेंडर की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा झांसी में पेय जल आपूर्ति पाइपलाइन बिछाने के लिए ग्लोबल टेंडर मांगे गए। चुनौती याचिका पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है ।
यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल तथा न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने इंडियन ह्यूम पाइप कंपनी लिमिटेड की याचिका पर दिया है। जल निगम की तरफ से अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने याचिका पर प्रतिवाद किया। याची का कहना था कि उ प्र जल निगम ने झांसी में अमृत प्रोग्राम के जरिए वाटर सप्लाई के लिए पाइप लाइन बिछाने के लिए ग्लोबल टेंडर मांगा। जिन कंपनियों को टेंडर दिया गया है उन्हें कार्य अनुभव नहीं है। उन्हें चाइना और अंगोला में कार्य का अनुभव है। भारत में कार्य का अनुभव नहीं है। और सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट उन्होंने राष्ट्रीय बैंक से नहीं दिया है। साथ ही एक कंपनी की हैसियत टेंडर की लागत से कम है । ऐसे में ऐसी कंपनियों को टेंडर दिया जाना उचित नहीं है। यह भी तर्क दिया गया कि कंपनी भारत में रजिस्टर्ड नहीं है। कोर्ट ने इन तर्कों को टेंडर की सेवा शर्तों से जुड़ा माना और याचिका को आधार हीन मानते हुए खारिज कर दिया है।
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झांसी में पेयजल आपूर्ति योजना ठेके के खिलाफ याचिका खारिज
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट में निविदा दस्तावेजों की सेवा शर्तों को चुनौती नहीं दी जा सकती है जबकि, तक उसमें नैसर्गिंग न्याय के सिद्धांतों का हनन न हुआ हो। ऐसे मामले में अदालत विचार तभी विचार कर सकती है जब असंगत फैसले लिए गए हों और शक्तियों का दुरुपयोग किया गया हो। कोर्ट ने टेंडर की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा झांसी में पेय जल आपूर्ति पाइपलाइन बिछाने के लिए ग्लोबल टेंडर मांगे गए। चुनौती याचिका पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है ।
यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल तथा न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की खंडपीठ ने इंडियन ह्यूम पाइप कंपनी लिमिटेड की याचिका पर दिया है। जल निगम की तरफ से अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने याचिका पर प्रतिवाद किया। याची का कहना था कि उ प्र जल निगम ने झांसी में अमृत प्रोग्राम के जरिए वाटर सप्लाई के लिए पाइप लाइन बिछाने के लिए ग्लोबल टेंडर मांगा। जिन कंपनियों को टेंडर दिया गया है उन्हें कार्य अनुभव नहीं है। उन्हें चाइना और अंगोला में कार्य का अनुभव है। भारत में कार्य का अनुभव नहीं है। और सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट उन्होंने राष्ट्रीय बैंक से नहीं दिया है। साथ ही एक कंपनी की हैसियत टेंडर की लागत से कम है । ऐसे में ऐसी कंपनियों को टेंडर दिया जाना उचित नहीं है। यह भी तर्क दिया गया कि कंपनी भारत में रजिस्टर्ड नहीं है। कोर्ट ने इन तर्कों को टेंडर की सेवा शर्तों से जुड़ा माना और याचिका को आधार हीन मानते हुए खारिज कर दिया है।
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