{"_id":"32de6c80cfb3e029dc0ce42183f7417d","slug":"ten-years-and-three-steps-will-clean-ganga-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दस वर्षों और तीन चरणों में स्वच्छ होंगी गंगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दस वर्षों और तीन चरणों में स्वच्छ होंगी गंगा
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Mon, 19 Jan 2015 12:56 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद। गंगा को पूरी तरह से अविरल-निर्मल होने में दस वर्ष लगेंगे और यह काम तकरीबन तीन वर्षों में पूरा हो सकेगा। गंगा की स्वच्छता को लेकर केंद्र सरकार की ओर से मई 2014 में इसकी शुरुआत की गई थी जिसका पहला परिणाम दो वर्षों में दिखेगा। पहले चरण के छह माह बीत चुके हैं। दूसरे चरण का काम तीन से सात वर्षों में होगा और अंतिम परिणाम सात से दस वर्षों में सामने आएगा, जब गंगा पूरी तरह अविरल-निर्मल हो जाएगी।
रविवार को केंद्रीय जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा नदी संरक्षण मंत्री उमा भारती ने माघ मेला क्षेत्र के दंडीबाड़ा स्थित मठ मछली बंदर शिविर में आयोजित ‘समग्र सरिता सम्मेलन’ में संकल्प लिया कि गंगा की स्वच्छता के लिए जान भी न्योछावर करनी पड़ी तो पीछे नहीं हटूंगी।
उन्होंने कहा, गंगा किनारे किसी भी योजना को शुरू करने का निर्णय अब कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित टास्कफोर्स लेगी। इसमें ग्रामीण विकास मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के सचिव सदस्य हैं। टास्कफोर्स गंगा की स्वच्छता के लिए शुरू की गई योजनाओं की मॉनीटरिंग करेगी ताकि कोई भी योजना एक दूसरे से टकराए नहीं। गंगा की स्वच्छता को तैयार कार्ययोजना के लिए 30 दिसंबर को ही वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में बैठक कर सभी सचिव योजना बनाएंगे, जिसे गंगा मंत्रालय लागू करेगा। ऐसी ही योजना यमुना के लिए भी बनाई जा रही है।
विज्ञापन
इस दौरान उन्होंने गंगा पर तैयार नमिता के चित्र का लोकार्पण भी किया। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने उमा भारती से अपेक्षाओं को पूरा करने की अपील की। काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने गंगा पर संकल्प कराया। विन्ध्यवासिनी कुमार ने कार्यक्रम का संचालन, आचार्य कुशमुनि ने स्वागत और स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में स्वामी विमलदेव, सांसद केशव मौर्य, पूर्व सांसद रमेश द्विवेदी, शैलतनया श्रीवास्त्व, विभूति नारायण सिंह, डॉ.नरेंद्र कुमार सिंह गौर आदि मौजूद थे।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिए पूर्व की योजनाएं क्यों सफल नहीं हो सकी, यह बड़ा सवाल है। गंगा के बारे में प्रेजेंटेशन में पीएम मोदी ने कहा था कि असफलता के अध्ययन से ही सफलता मिलेगी। दरअसल 1985 से गंगा पर कार्य शुरू हुआ। गंगा एक्शन प्लान वन एवं टू फिर एनजीआरबीए और 2012 में मिशन गंगा बना। ऐसे ही गंगा की यात्रा चलती रही। बीते 29 वर्षों की असफलता का अध्ययन करने पर साफ हुआ कि समग्रता से निदान सोचा ही नहीं गया। गंगा योजना के दो हिस्से हैं, एक 1985 से 27 मई वर्ष2014 तक जबकि दूसरा 27 मई 2014 से अब तक के सात माह का।
कन्नौज से कानपुर तक गंगा की स्थिति सबसे खराब है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि यहां पेपर, चीनी आदि औद्योगिक इकाइयों से बड़े पैमाने पर गंदगी गंगा में जा रही है। हालांकि इकाइयां स्वयं गंदगी के निपटारे का उपाय करने को कह रही हैं लेकिन ऐसा यह काम गंगा मंत्रालय की देखरेख में ही होगा। दिल्ली में ही बैठकर इसकी मॉनीटरिंग की जा सकेगी।
विज्ञापन
रविवार को केंद्रीय जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा नदी संरक्षण मंत्री उमा भारती ने माघ मेला क्षेत्र के दंडीबाड़ा स्थित मठ मछली बंदर शिविर में आयोजित ‘समग्र सरिता सम्मेलन’ में संकल्प लिया कि गंगा की स्वच्छता के लिए जान भी न्योछावर करनी पड़ी तो पीछे नहीं हटूंगी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा, गंगा किनारे किसी भी योजना को शुरू करने का निर्णय अब कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित टास्कफोर्स लेगी। इसमें ग्रामीण विकास मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और कृषि मंत्रालय के सचिव सदस्य हैं। टास्कफोर्स गंगा की स्वच्छता के लिए शुरू की गई योजनाओं की मॉनीटरिंग करेगी ताकि कोई भी योजना एक दूसरे से टकराए नहीं। गंगा की स्वच्छता को तैयार कार्ययोजना के लिए 30 दिसंबर को ही वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में बैठक कर सभी सचिव योजना बनाएंगे, जिसे गंगा मंत्रालय लागू करेगा। ऐसी ही योजना यमुना के लिए भी बनाई जा रही है।
विज्ञापन
इस दौरान उन्होंने गंगा पर तैयार नमिता के चित्र का लोकार्पण भी किया। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने उमा भारती से अपेक्षाओं को पूरा करने की अपील की। काशी सुमेरूपीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने गंगा पर संकल्प कराया। विन्ध्यवासिनी कुमार ने कार्यक्रम का संचालन, आचार्य कुशमुनि ने स्वागत और स्वामी हरि चैतन्य ब्रह्मचारी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में आचार्य जितेंद्रानंद सरस्वती, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में स्वामी विमलदेव, सांसद केशव मौर्य, पूर्व सांसद रमेश द्विवेदी, शैलतनया श्रीवास्त्व, विभूति नारायण सिंह, डॉ.नरेंद्र कुमार सिंह गौर आदि मौजूद थे।
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिए पूर्व की योजनाएं क्यों सफल नहीं हो सकी, यह बड़ा सवाल है। गंगा के बारे में प्रेजेंटेशन में पीएम मोदी ने कहा था कि असफलता के अध्ययन से ही सफलता मिलेगी। दरअसल 1985 से गंगा पर कार्य शुरू हुआ। गंगा एक्शन प्लान वन एवं टू फिर एनजीआरबीए और 2012 में मिशन गंगा बना। ऐसे ही गंगा की यात्रा चलती रही। बीते 29 वर्षों की असफलता का अध्ययन करने पर साफ हुआ कि समग्रता से निदान सोचा ही नहीं गया। गंगा योजना के दो हिस्से हैं, एक 1985 से 27 मई वर्ष2014 तक जबकि दूसरा 27 मई 2014 से अब तक के सात माह का।
कन्नौज से कानपुर तक गंगा की स्थिति सबसे खराब है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि यहां पेपर, चीनी आदि औद्योगिक इकाइयों से बड़े पैमाने पर गंदगी गंगा में जा रही है। हालांकि इकाइयां स्वयं गंदगी के निपटारे का उपाय करने को कह रही हैं लेकिन ऐसा यह काम गंगा मंत्रालय की देखरेख में ही होगा। दिल्ली में ही बैठकर इसकी मॉनीटरिंग की जा सकेगी।