फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Swami Abhedananda said: Establish Ramrajya inside and outside the mind, ego destroys everything.

स्वामी अभेदानंद बोले : मन के भीतर और बाहर रामराज्य करें स्थापित, अहंकार करता है सर्वस्व विनाश

Wed, 05 Nov 2025 12:41 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Nov 2025 12:41 PM IST
सार

चिन्मय मिशन के वरिष्ठ संत स्वामी अभेदानंद जी का ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ चिन्मय मिशन के ‘अखिलेश्वर मंदिर समागार में दीप-प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वामी जी ने रामचरित मानस पर आधारित श्री भरत चरित्र की व्याख्या अत्यंत आकर्षक शैली में की।

विज्ञापन
Swami Abhedananda said: Establish Ramrajya inside and outside the mind, ego destroys everything.
स्वामी अभेदानंद जी महाराज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

चिन्मय मिशन के वरिष्ठ संत स्वामी अभेदानंद जी का ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ चिन्मय मिशन के ‘अखिलेश्वर मंदिर समागार में दीप-प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। स्वामी जी ने रामचरित मानस पर आधारित श्री भरत चरित्र की व्याख्या अत्यंत आकर्षक शैली में की। स्वामीजी ने भरत के भगवान राम के प्रति प्रेम और भक्ति को दर्शाने वाले श्लोकों का पाठ करते हुए सत्र की शुरुआत की। कहा कि जीवन का एक ही उद्देश्य है मन में तथा बाहर रामराज्य की स्थापना। रामराज्य का अर्थ है- धर्म, भक्ति और ज्ञान पर आधारित व्यवस्था, जिसके केन्द्र में समर्पण की वृत्ति है। यही वृत्ति मानवीय समाज की आधार है। उन्होंने कहा कि सच्चा सुख भौतिक धन में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और वैराग्य में निहित है, सभी को याद दिलाया कि धन आराम दे सकता है, लेकिन कभी भी संतोष नहीं दे सकता।

विज्ञापन


रावण और कंस के उदाहरणों का हवाला देते हुए, स्वामीजी ने समझाया कि कैसे अहंकार और आसक्ति मानव दुःख के मूल कारण बन जाते हैं। राजा दशरथ, कैकेयी और मंथरा के जीवन से सबक लेते हुए उन्होंने बताया कि कैसे भटका हुआ प्रेम और महत्वाकांक्षा निर्णय को धूमिल कर सकते हैं और सद्भाव को बाधित कर सकते हैं। समर्पण का आह्वानः स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए, उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप देना नहीं सीखते हैं, तो जीवन उसे आपसे छीन लेगा।’’ उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि वे हर कार्य को परमात्मा के चरणों में समर्पित करें, जिससे दैनिक जीवन समर्पण के एक पवित्र कार्य में बदल जाए। स्वामी जी के मधुर और संगीतमय प्रवचन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 
विज्ञापन


दूसरे सत्र में उन्होंने ‘बृहदारण्यक उपनिषद’ की विस्तृत भूमिका व उसकी विषय वस्तु पर व्याख्यान दिया। कक्षा का प्रारंभ दिव्य मंत्रोच्चार व स्तुतियों से महाराज श्री ने किया। तत्पश्चात ‘उपनिषद्’ शब्द की विशद व्याख्या करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उपनिषद् ही ब्रह्म विद्या के प्रमाण है, जिनके ज्ञानार्जन के लिए गुरु का सानिध्य, विवेक, वैराग्य, शमादि षट् संपत्ति व उत्कट वैराग्य की अपेक्षा होती है, तभी शिष्य उपनिषद की कक्षाओं में बैठने योग्य हो पाता है। कक्षा के अंत में एक बार पुनः ‘‘ध्यान कैसे करें’’ यह भी पूज्य श्री द्वारा बताया गया। अंत में ऊँ पूर्णमदः..... के मंत्र से कक्षा का समापन हुआ। यह ज्ञानयज्ञ प्रतिदिन दो सत्रों में चलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed