प्रयागराज: बलवीर गिरि ने बाघंबरी मठ की गद्दी संभाली, चादर विधि में देशभर के साधु-संत शामिल
महंत नरेंद्र गिरि की वसीयत के आधार पर निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वर ने बलवीर को उत्तराधिकारी चुना था। महंत नरेंद्र गिरि निरंजनी अखाड़े के सचिव भी थे, लेकिन अभी उनके उत्तराधिकारी बलवीर को यह पद नहीं दिया जाएगा।
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समाधि पूजा, पुष्पांजलि, दीपदान के बाद देश भर से पहुंचे महामंडलेश्वरों-महंतों के हाथों चादर विधि की रस्म पूरी होने के साथ ही मंगलवार को बलवीर गिरि ने प्रयागराज के बाघंबरी मठ की गद्दी संभाल ली। चादर विधि के बाद पंचायती निरंजनी अखाड़े की ओर से उन्हें महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी के तौर पर बाघंबरी मठ का महंत नियुक्त किया गया। ताजपोशी के बाद नए महंत बलवीर ने अपने गुरु की समाधि पर शीश नवाया और उनके पदचिह्नों पर चलकर मठ परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
मठ के आगंतुक कक्ष में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए जाने के बाद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की जगह उनके उत्तराधिकारी के रूप में बलवीर गिरि ने ले ली। दोपहर करीब 12 बजे मठ के विचारानंद संस्कृत वेद विद्यालय परिसर में बने भव्य मंच पर अखाड़ों के प्रतिनिधियों, पीठाधीश्वरों और महामंडलेश्वरों और महंतों ने चादर विधि में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
सबसे पहले शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वर आश्रम महाराज की मौजूदगी में निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद ने बलवीर को टीका लगाया और महंतई की चादर ओढ़ाई।
इसके बाद अखाड़ा परिषद के महामंत्री और जूना अखाड़े के संरक्षक महंत हरि गिरि, अग्नि अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्लवर बालकानंद गिरि, जूना अखाड़े के महंत प्रेम गिरि, महामंडलेश्वर यतींद्रानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर यमुनापुरी, निर्मल अखाड़े के सचिव ज्ञानेंद्र सिंह समेत राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड और जम्मू समेत कई राज्यों से आए साधु-संतों, वेद विद्यालय के बटुकों, आचार्यों, सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी महंताई चादर ओढ़ाई। करीब घंटे भर चली चादर विधि के बाद फूलमाला से लदे बलवीर अपने गुरु नरेंद्र गिरि की समाधि पर पहुंचे। वहां उन्होंने संक्षिप्त पूजा की और फूलमाला चढ़ाकर नमन किया।
सीएम-डिप्टी सीएम ने भेजी चादर
बाघंबरी मठ के नए महंत की चादर विधि में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी चादर शामिल हुई। सीएम ने इस समारोह के लिए चादर भेजी थी। इनके अलावा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी षोडशी और चादर विधि में शामिल नहीं हो सके। लेकिन, उनकी ओर से चादर भेजी गई।
सुसाइड नोट के आधार पर पंच परमेश्वरों ने बलवीर को बनाया बाघंबरी का महंत
महंत नरेंद्र गिरि के शव के पास मिले सुसाइड नोट और उनकी वसीयत को आधार मानते हुए निरंजनी अखाड़े के पंच परमेश्वरों ने हाल में ही हरिद्वार में बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसी के तहत मंगलवार को महंत नरेंद्र गिरि के षोडशी संस्कार के बाद बलवीर गिरि की चादर विधि की गई।
इस दौरान नरेंद्र गिरि को अंतिम विदाई दी गई और बलवीर गिरि ने औपचारिक रूप से मठ के महंत की गद्दी पर बैठाया गया। बलवीर गिरि की चादरपोशी के दौरान मठ को भव्य तरीके से सजाया गया। सुबह सबसे पहले महंत बलवीर ने 16 संन्यासियों को दान-दक्षिणा और भोजन करवाकर की।
गुरु की मौत का सच सामने लाए बिना चैन नहीं: बलवीर गिरि
प्रयागराज। बाघंबरी गद्दी मठ की बागडोर संभालने के बाद नए महंत बलवीर गिरि ने कहा कि वह अपने गुरु नरेंद्र गिरि की मौत का सच हर हाल में सामने लाकर रहेंगे। चादर विधि के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अपने गुरु के पदचिह्नों पर चलकर बाघंबरी मठ को आगे बढ़ाने की बात कही। उनका कहना था कि सीबीआई जांच कर रही है।
गुरुजी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं, यह जरूर सामने आएगा। बलवीर गिरि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि से डेढ़ दशक से जुड़े रहे हैं। वह मूल रूप से उत्तराखंड के रहे वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2005 में घर- परिवार त्यागकर निरंजनी अखाड़े में महंत नरेंद्र गिरि से संन्यास दीक्षा ली थी।
षोडशी पर सामने आई फूट, तीन वैरागी अखाड़ों ने बनाई दूरी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के षोडशी संस्कार पर मंगलवार को अखाड़ों की आपसी फूट खुलकर सामने आ गई। महंत की षोडशी पूजा, पुष्पांजलि, भंडारा और बाघंबरी मठ के नए महंत के पट्टाभिषेक से तीन वैष्णव(वैरागी) अखाड़ों के पीठाधीश्वरों, महामंडलेश्वरों और महंतों ने दूरी बना ली। चादर भेजना तो दूर, वह इस आयोजन से पूरी तरह अलग रहे।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की षोडशी से तीन अखाड़ों के अलग होने को अखाड़ों में बड़ी टूटन के तौर पर देखा जा रहा है। निरंजनी अखाड़े के संतों ने इसे पुरानी नाराजगी भी बताई और वैरागियों -संन्यासियों के बीच महीनों पहले से अध्यक्ष पद को लेकर चल रही खींचतान भी।