सृजन वर्मा से बातचीत : सिविल सेवा परीक्षा में 39वीं रैंक के साथ चयनित सृजन ने साझा किए सफलता से जुड़े अनुभव
यूपीएससी में 39वीं रैंक के साथ चयनित होने वाले सृजन वर्मा का कहना है कि मायने नहीं रखते हाईस्कूल और इंटरमीडिए के नंबर। सिर्फ अपने लक्ष्य पर रखें नजर। सही दिशा में तैयारी करने पर सफलता मिलती है।
विस्तार
संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा-2020 में 39वीं रैंक के साथ चयनित होकर कलेक्टर बनने जा रहे प्रयागराज के सृजन वर्मा अपने स्कूली दिनों में औसत छात्र रहे। उन्हें नहीं लगता कि जीवन में सफलता के लिए नंबर मायने रखते हैं, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि आप किन लोगों के साथ उठते-बैठते हैं और उनसे क्या सीखते हैं।
रविवार को ‘अमर उजाला’ कार्यालय में आए सृजन ने बताया कि उन्होंने इंटर तक की पढ़ाई प्रयागराज के सेंट जोसेफ कॉलेज से की। आईसीएसई के स्कूल में 60 फीसदी अंकों के कोई मायने नहीं होते, लेकिन हाईस्कूल पहुंचने तक इसी के आसपास नंबर मिलते रहे। हाईस्कूल में 80 फीसदी और इंटर में 90 फीसदी के आसपास अंक मिले। इसके बाद उनका चयन आईआईटी धनबाद के लिए हुआ।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक करने पहुंचे तो बहुत कुछ जानने, सीखने को मिला। जो सोचा और देखा था, दुनिया उससे कहीं अलग और बड़ी थी। वहां से सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य निर्धारित किया, जो पूरा भी हुआ। सृजन अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंचे, इससे जुड़े अनुभव उन्होंने ‘अमर उजाला’ से साझा किए। अगली स्लाइड में पढें बातचीत के अंश...
आईईएस से आईएएस बनकर कैसा लग रहा है?
अच्छा लग रहा है। देश-समाज की सेवा का मौका मिलेगा। वर्ष 2018 में इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज (आईईएस) में चयन हुआ था। ट्रेनिंग से छुट्टी लेकर एक साल सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को ही वैकल्पिक विषय के रूप में रखा और परीक्षा में अपना शत प्रतिशत दिया।
पढ़ाई के लिए कितना वक्त देते थे?
सुबह सात बजे लाइब्रेरी चला जाया करता था और रात दस बजे लौटता था। लाइब्रेरी का मतलब कॉमन स्टडी रूम से था, जहां कई मित्र साथ में पढ़ा करते थे। कोविड के कारण जब लॉक डाउन हुआ तो घर पर रहकर तैयारी की।
पढ़ाई के अलावा दूसरे शौक?
क्रिकेट और चेस खेलना बहुत पसंद है। स्कूल की टीम से क्रिकेट खेला करता था। सचिन तेंदुलकर मेरे हीरो हैं। यह भी सोचा करता था कि नौकरी मिलने के बाद प्रोफेशनल तौर पर चेस खेलूंगा।
इंटरव्यू में पूछा गया कोई रोचक सवाल याद है?
हां बिल्कुल, इंटरव्यू चल रहा था, तभी पास की एक बिल्डिंग में एसी में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई और एक व्यक्ति बेहोश हो गया। इंटरव्यू बोर्ड के एक सदस्य बाहर खड़े होकर यह देख रहे थे। वह अंदर आए और मुझसे पूछ लिया कि अगर आपके सामने ऐसा होता तो स्थिति पर काबू कैसे पाते। यह मेरा ही विषय था, सो सहज होकर उत्तर दिया। एक और सवाल याद है, जिसमें पूछा गया कि कोविड काल में कुंभ के आयोजन की जिम्मेदारी मिले तो क्या करेंगे?
कोविड काल में परीक्षा की तैयारी कितनी चुनौतीपूर्ण?
कोविड काल में तैयारी करना थोड़ा मुश्किल था। लोग घरों में कैद हो गए थे, लेकिन संघ लोक सेवा आयोग ने काफी समय दिया। परिस्थितियां थोड़ी सामान्य हुईं तो परीक्षा कराई गई।
तैयारी के लिए कोचिंग कितनी जरूरी है?
अगर आपके पास कोई ऐसा मार्गदर्शक है जो सही और गलत के बीच फर्क बता सके तो कोचिंग की जरूरत नहीं। अगर मार्गदर्शक नहीं है तो कोचिंग की जरूरत पड़ेगी। कोई न कोई तो ऐसा होना ही चाहिए जो बता सके कि क्या पढ़ना है, क्या नहीं पढ़ना है और कितना पढ़ना है।
मैं अपने माता-पिता और कॉलेज में सीनियर रहे अपूर्व दीक्षित को अपनी सफलता का श्रेय देता हूं। मेरे सीनियर ही मेरे मार्गदर्शक रहे। सिविल सेवा परीक्षा का फार्म भरने से लेकर अंतिम चयन परिणाम तक मैंने पहली सूचना उन्हीं से साझा की।
प्रयागराज के प्रतियोगियों के लिए कोई संदेश?
यही कहना है कि ऐसी जगह पर रहकर तैयारी करें, जहां डिस्टर्बेंस बहुत कम हो। परीक्षा की तैयारी में टेक्नोलॉजी का सही उपयोग करें। टेलीग्राम, यूट्यूब पर बहुत कुछ है, लेकिन यह आपको तय करना है कि सोशल मीडिया पर कौन सा सोर्स काम का है और कौन सा सोर्स ठीक नहीं है। करेंट अफेयर्स के लिए सोशल मीडिया के साथ पत्र-पत्रिकाएं और अखबार भी नियमित रूप से पढ़ें।
कलेक्टर बनने पर क्या करना चाहेंगे?
अभी तो यही सोचा है कि जो भी काम मिले, उसे पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी के साथ पूरा कर सकूं।