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शंकराचार्य आश्रम में आराधना महोत्सव की धूम
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Sat, 29 Nov 2014 01:50 AM IST
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इलाहाबाद। अलोपीबाग स्थित शंकराचार्य आश्रम में नौ दिवसीय आराधना महोत्सव की शुरूआत शुक्रवार को विधिविधान से हुई। गुरु पूजा, चरण पादुका पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। वेदी रचना गौरी गणेश पूजन ब्राह्मण वरण के उपरांत श्रीमद्भागवत कथा और रामचरितमानस का नवाह्न पाठ हुआ। शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के प्रवचन उपरांत महाआरती हुई।
शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महराज ने कहा, जब तक वृत्तियां भगवान में लीन न हो जाए तब तक भागवत रस पान करना जरूरी है। मायामोह से परे होकर भगवान की आराधना करने की प्रेरणा भागवतकथा श्रवण करने से मिलता है। जीवन का परम आनंद योगेश्वर कृष्ण की कथा के रस पान में निहित है। उसके पहले वैदिक मंत्रोच्चार शंखनाद के साथ वेदी रचना आचार्यों ने की। देवता आवाहन के बाद कथा व्यास स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने श्रीमद्भागवत पुराण के महात्म्य के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा भागवत पुराण भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात विग्रह है। इसलिए भागवत में वक्ता और श्रोता दोनों की ओर से वंदना की गई है। जयपुर से आए प्यारे मोहन व साथियों ने संगीतमय रामचरित मानस का नवाह्न पाठ किया।
इस मौके पर शंकराचार्य के सचिव आचार्य छोटेलाल, ब्रह्मचारी आत्मानंद, दंडी स्वामी विनोदानंद, आचार्य संतोषानंद, दंडी स्वामी मुकुंदानंद, प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में संत संन्यासी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महराज ने कहा, जब तक वृत्तियां भगवान में लीन न हो जाए तब तक भागवत रस पान करना जरूरी है। मायामोह से परे होकर भगवान की आराधना करने की प्रेरणा भागवतकथा श्रवण करने से मिलता है। जीवन का परम आनंद योगेश्वर कृष्ण की कथा के रस पान में निहित है। उसके पहले वैदिक मंत्रोच्चार शंखनाद के साथ वेदी रचना आचार्यों ने की। देवता आवाहन के बाद कथा व्यास स्वामी प्रणवानंद सरस्वती ने श्रीमद्भागवत पुराण के महात्म्य के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा भागवत पुराण भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात विग्रह है। इसलिए भागवत में वक्ता और श्रोता दोनों की ओर से वंदना की गई है। जयपुर से आए प्यारे मोहन व साथियों ने संगीतमय रामचरित मानस का नवाह्न पाठ किया।
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इस मौके पर शंकराचार्य के सचिव आचार्य छोटेलाल, ब्रह्मचारी आत्मानंद, दंडी स्वामी विनोदानंद, आचार्य संतोषानंद, दंडी स्वामी मुकुंदानंद, प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में संत संन्यासी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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