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फीस के लाखों खर्च, चयन एक भी नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 05 Jan 2015 12:09 AM IST
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के दो सदस्य चार फरवरी को अपना दो वर्ष का कार्यकाल पूरा करके अपने मूल पद पर लौट जाएंगे। इन सदस्यों के दो वर्ष के कार्यकाल के दौरान कोई भी शिक्षक भर्ती नहीं पूरी हो सकी। जबकि इस दौरान इन सदस्यों के वेतन भत्ते पर शिक्षक भर्ती की फीस का लगभग 65 लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन एक भी चयन पूरा नहीं हुआ। चयन बोर्ड में प्रदेश सरकार ने पांच फरवरी 2013 को अध्यक्ष डॉ. देवकी नंदन शर्मा के साथ दो सदस्यों डॉ. आशाराम यादव एवं मनोज कुमार यादव को नियुक्त किया था। अध्यक्ष डॉ. देवकीनंदन शर्मा का साल भर के भीतर ही छह दिसंबर 2013 को निधन हो गया। इस बीच अध्यक्ष का कार्यभार भी डॉ. आशाराम को मिल गया। अपने पूरे कार्यकाल केदौरान दोनों सदस्यों मनोज कुमार एवं आशाराम को एक भी शिक्षक भर्ती में शामिल होने का अवसर नहीं मिला।
चयन बोर्ड की ओर से इन सदस्यों के आने से पहले 2010-11 में टीजीटी-पीजीटी एवं संस्था प्रधान केपदों के विज्ञापन जारी हो चुके थे। इन सदस्यों के आने के बाद 2013 में टीजीटी-पीजीटी के लगभग 10 हजार पदों के नए विज्ञापन जारी हो गए। इस बीच कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर डॉ.आशाराम ने प्रधानाचार्य के पदों के लिए साक्षात्कार शुरू किया, इस साक्षात्कार को लेकर विवाद के कारण सरकार ने पूरे मामले पर रोक लगा दी। चार फरवरी को जिन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, वह एक बार फिर से कार्यकाल विस्तार के लिए लगे हैं।
चयन बोर्ड के एक सदस्य के वेतन-भत्ते पर प्रतिमाह एक लाख 35 हजार रुपये का खर्च आता है। इस प्रकार डॉ.आशाराम यादव एवं मनोज कुमार के वेतन भत्ते पर पूरे दो वर्ष के कार्यकाल में कुल 64.80 लाख खर्च होने के बाद एक भी चयन नहीं हो सका। चयन बोर्ड के सदस्यों, अध्यक्ष एवं अधिकारियों के वेतन आदि पर आने वाला पूरा खर्च टीजीटी-पीजीटी एवं संस्था प्रमुख के पद के लिए आवेदन करने वाले बेरोजगार अभ्यर्थियों की फीस से वसूला जा रहा है। वेतन में बेरोजगार छात्रों की ओर से चयन बोर्ड में जमा की गई फीस के पैसे भी शामिल हैं।
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चयन बोर्ड की ओर से इन सदस्यों के आने से पहले 2010-11 में टीजीटी-पीजीटी एवं संस्था प्रधान केपदों के विज्ञापन जारी हो चुके थे। इन सदस्यों के आने के बाद 2013 में टीजीटी-पीजीटी के लगभग 10 हजार पदों के नए विज्ञापन जारी हो गए। इस बीच कार्यवाहक अध्यक्ष के तौर पर डॉ.आशाराम ने प्रधानाचार्य के पदों के लिए साक्षात्कार शुरू किया, इस साक्षात्कार को लेकर विवाद के कारण सरकार ने पूरे मामले पर रोक लगा दी। चार फरवरी को जिन सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, वह एक बार फिर से कार्यकाल विस्तार के लिए लगे हैं।
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चयन बोर्ड के एक सदस्य के वेतन-भत्ते पर प्रतिमाह एक लाख 35 हजार रुपये का खर्च आता है। इस प्रकार डॉ.आशाराम यादव एवं मनोज कुमार के वेतन भत्ते पर पूरे दो वर्ष के कार्यकाल में कुल 64.80 लाख खर्च होने के बाद एक भी चयन नहीं हो सका। चयन बोर्ड के सदस्यों, अध्यक्ष एवं अधिकारियों के वेतन आदि पर आने वाला पूरा खर्च टीजीटी-पीजीटी एवं संस्था प्रमुख के पद के लिए आवेदन करने वाले बेरोजगार अभ्यर्थियों की फीस से वसूला जा रहा है। वेतन में बेरोजगार छात्रों की ओर से चयन बोर्ड में जमा की गई फीस के पैसे भी शामिल हैं।
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