खुलासा : बेटे ने बड़ी सफाई से मां का किया कत्ल, बचाव के लिए गवाहों का भी कर लिया था इंतजाम
बेटे ने मां की हत्या से पहले गवाहों का भी इंतजाम कर लिया था। वह पुलिस के सामने तरह-तरह के बहाने बताते हुए गुमराह करने का प्रयास करता है। सीसीटीवी में घटना के समय घर के पास उसकी मौजूदगी और एक मिस्ड कॉल ने उसकी सारी चालाकी पानी फेर दिया।
विस्तार
करेली में सुभद्रा पाल के कत्ल की गुत्थी एक मिस्ड कॉल से सुलझी। मृतका के मोबाइल में पड़ी इस मिस्ड कॉल से डीसीपी नगर ने वारदात के समय का अनुमान लगाया। इसके बाद सीडीआर व सीसीटीवी फुटेज आदि साक्ष्यों से वारदात के तार आपस में जुड़ते चले गए और फिर पुलिस कातिल तक पहुंच गई जो मृतका का बेटा ही था।
दरअसल मुख्य संदिग्धों (चंदा मांगने वाले दो युवकों) के वारदात के दूसरे ही दिन उसी मोहल्ले में पकड़े जाने से लगभग तय हो गया था कि कत्ल में उनका हाथ नहीं है। इसके बाद डीसीपी नगर दीपक भूकर ने मामला अपने हाथों में लिया। उन्होंने खुद घटनास्थल से बरामद साक्ष्यों का अवलोकन किया। इनमें मृतका का मोबाइल भी था।
मोबाइल की जांच में घटना वाले दिन दोपहर 12:26 मिनट पर एक मिस्ड कॉल मिली। यह कॉल मृतका के जेठ की बहू ने की थी जिससे वह रोजाना कई बर बात करती थीं। इसके बाद न कोई कॉल रिसीव हुई और न ही एक भी आउटगोइंग कॉल हुई। इससे माना गया कि 12:26 मिनट से पहले ही उसका कत्ल हो चुका था।
घटना के कुछ समय पहले घर के पास दिखा था बेटा
इसके बाद डीसीपी ने मृतका के घर से मुख्य सड़कों तक आने वाले सभी रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने शुरू किए। इसी दौरान एक फुटेज मिला जिसमें मृतका का बेटा सचिन जाते हुए दिखाई दिया। इसकी टाइमिंग देख पुलिस चौंक गई। दरअसल 12:04 मिनट पर सचिन घर की ओर से आकर मुख्य सड़क तक जाते नजर आया था।
पुलिस ने इसके बारे में पूछा तो सचिन ने बताया कि वह घर से दुकान जा रहा था। सवाल यह उठा कि अगर कत्ल 12:26 मिनट से पहले हो चुका था और सचिन 12:04 मिनट पर घर से दुकान के लिए निकला तो कातिल के पास हत्या व लूटपाट के लिए महज 21 मिनट का वक्त था। इतने कम वक्त में घर में घुसकर वारदात को अंजाम देने की बात पुलिस अफसरों के गले से नहीं उतरी। इसके बाद सचिन को फिर बुलाकर पूछताछ की गई। इसमें वह पहले तो इधर उधर की बातें करता रहा, लेकिन जब उससे सवाल दर सवाल पूछे गए तो वह टूट गया और बताया कि उसने ही अपनी मां को मारा है।
गवाहों का भी कर लिया था इंतजाम
डीसीपी नगर ने बताया कि सचिन ने मां के कत्ल के बाद लूटपाट की कहानी ही नहीं रची, बल्कि कुछ गवाहों का भी इंतजाम कर लिया, ताकि पुलिस के सामने वह अपनी कहानी को सच साबित कर सके। दरअसल वारदात को अंजाम देने के बाद वह उन दो व्यापारियों के पास पहुंचा, जिनका उसपर उधार बकाया था। एक व्यापारी के पास पहुंचकर उसने कहा कि वह उसे बकाया रुपये देना चाहता है और इसके लिए उसे उसके घर चलना होगा क्योंकि नकदी वहीं रखी है।
इस पर उस व्यापारी ने यह कहते हुए जाने से मना कर दिया कि वह बकाया पैसे चेक से लेगा। इसके बाद वह एक दूसरे व्यापारी के पास पहुंचा और फिर यही बात दोहराई। इसपर व्यापारी उसके साथ घर चलने को राजी हो गया। वहां पहुंचते ही सचिन ने रोना-पीटना शुरू कर दिया और चिल्लाने लगा कि किसी ने उसकी मां की हत्या कर नकदी व गहने लूट लिए हैं। पुलिस ने जांच के दौरान उस व्यापारी से पूछताछ की तो यह कहानी सामने आई।
अस्पताल ले जाने की बात पर बोला-मर गई, अब क्या फायदा
सचिन के साथ उसके घर पहुंचे व्यापारी ने पुलिस को एक और बात बताई, जिससे उस पर शक और गहरा गया। बताया कि घर पहुंचने पर उसने सचिन की मां को लहूलुहान हाल में देखा तो उससे कहा कि वह उन्हें अस्पताल ले चले। इस पर सचिन ने यह कहते हुए मना कर दिया कि अब तो वह मर चुकी हैं, अब अस्पताल ले जाने से क्या फायदा। उस समय उसका यह कहना उसे हैरान कर गया, क्योंकि इस हालत में कोई भी घरवाला घायल व्यक्ति को एक बार डॉक्टर के पास लेकर जरूर जाता।
इन सवालों से भी आया शक के घेरे में
- हत्यारे कान व गले से गहने नोच ले गए तो पैर की पायल व बिछिया क्यों छोड़ी
- मोबाइल को हाथ तक नहीं लगाया
- घर में जो 15 लाख रुपये नकद रखे थे, वह कहां से आए
- इतनी बड़ी मात्रा में नकदी व गहने आगे के कमरे में लापरवाही से क्यों रखे हुए थे
- घर में रखे गहने व नकदी के बारे में पिता को क्यों नहीं दी जानकारी