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Prayagraj News: यूपीआई से परहेज... दुकानों से हटने लगे स्कैनर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:13 AM IST
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Shying away from UPI... Scanners start disappearing from shops.Shying away from UPI... Scanners start disappearing from shops.
दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन - फोटो : Samvad
यूपीआई से लेन-देन पर शुल्क लगाने की घोषणा का असर बाजारों में दिखने लगा है। यह शुल्क 15 अक्तूबर से लागू होगा लेकिन फुटकर से लेकर थोक विक्रेता अभी से यूपीआई से परहेज करने लगे हैं। दुकानों से क्यूआर स्कैनर हटने लगे हैं। कुछ दुकानदार आग्रह करने पर ऑनलाइन भुगतान ले रहे हैं। साथ में यह भी कह रहे हैं कि कुछ दिन बाद ये सब बंद हो जाना है। इसलिए नकद लेकर चलने की आदत डाल लीजिए।
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व्यापारियों का तर्क है कि नए नियमों का सबसे अधिक असर सराफा, इलेक्ट्रॉनिक और निर्माण सामग्री से जुड़े कारोबारियों पर पड़ेगा। यूपीआई कारोबारियों के लिए लेन-देन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लगाने से व्यापारियों की अतिरिक्त लागत बढ़ेगी। आखिर इसका भुगतान व्यापारी क्यों करे। सरकार ने ही ऑनलाइन भुगतान लेने और देने के लिए जागरूक किया था, तब यह नहीं कहा गया था कि भविष्य में इस पर शुल्क लगा दिया जाएगा।
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उधर, शुक्रवार को सिविल लाइंस, चौक और लीडर रोड सहित कई इलाकों के एटीएम बूथ पर लोग पैसे निकालने के लिए खड़े दिखे। पहले इन बूथों पर अमूमन कम ही लोग नजर आते थे। बैंक सूत्रों के अनुसार, सक्रिय क्यूआर कोड से जुड़े ग्राहकों की संख्या करोड़ों में है। हर माह बड़े पैमाने पर भुगतान भी हो रहा है। फिलहाल कोई सीधा असर नहीं दिख रहा है लेकिन एटीएम से निकासी बढ़ी है।
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व्यापारियों की पक्ष
व्यापारी हिमांशु अग्रवाल कहते हैं कि यूपीआई लेन-देन का अच्छा माध्यम है। अब शुल्क लगने से कारोबार पर असर पड़ेगा। इससे व्यापारी परेशान होंगे क्योंकि कई उत्पाद में मामूली लाभ होता है।
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश सिंह ने नए नियमों का विरोध किया है। उन्होंने 2000 रुपये के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने का निर्णय तत्काल वापस लेने की मांग की।



दुकानों से क्यूआर कोड हटाकर नकद में व्यापार करेंगे कारोबारी



व्यापारियों का कहना - त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है, नई व्यवस्था से बढ़ सकती परेशानी

जिले के व्यापारी यूपीआई से भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) की नई व्यवस्था से नाराज हैं। व्यापारियों ने स्पष्ट किया है कि वे दुकानों से क्यूआर कोड हटाकर नकद में व्यापार करेंगे।

यदि सरकार ने नई व्यवस्था वापस नहीं ली तो सप्ताह भर में व्यापारी अपनी दुकानों से क्यूआर कोड हटा देंगे। एमडीआर ग्राहक से नहीं बल्कि व्यापारी से लिया जाएगा। इलाहाबाद गल्ला तिलहन व्यापार मंडल सहित कई संगठनों ने इसका पुरजोर विरोध किया है। पदाधिकारियों का मानना है कि ऑनलाइन भुगतान से पहले ही कारोबार प्रभावित हो रहा है। पांच हजार रुपये की खरीदारी पर एमडीआर का भार व्यापारी पर ही आएगा। व्यापारी थोक बाजार में भी ऑनलाइन भुगतान करते हैं। त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है जिससे नई व्यवस्था से परेशानी बढ़ सकती है।
यूपीआई सुविधा बंद करने की अपील
राष्ट्रीय उद्योग व्यापार महामंडल और प्रयागराज व्यापार मंडल ने दुकानदारों से यूपीआई सुविधा बंद करने की अपील की है। राष्ट्रीय उद्योग व्यापार महामंडल के प्रदेश अध्यक्ष सुशांत केसरवानी ने बताया कि व्यापारियों और ग्राहकों के बीच भुगतान व्यवस्था को लेकर एक पोस्टर जारी किया है। संबंधित फर्म में यूपीआई से लेन-देन पर शुल्क सरचार्ज लगने के कारण सुविधा बंद करने के लिए कहा गया है।


व्यापारियों की अपील और चेतावनी

राष्ट्रीय उद्योग व्यापार महामंडल के प्रदेश संयोजक मनीष कुमार गुप्ता ने व्यापारियों से अपनी दुकानों पर भुगतान के उपलब्ध माध्यमों की स्पष्ट सूचना लगाने को कहा है। व्यापार मंडल ने कहा है कि ग्राहकों से यूपीआई के नाम पर अतिरिक्त राशि न वसूली जाए।

दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन

दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन- फोटो : Samvad

दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन

दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन- फोटो : Samvad

दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन

दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन- फोटो : Samvad

दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन

दिनेश सिंह अध्यक्ष इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन- फोटो : Samvad

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