Prayagraj: राम मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होगा 180 किलो सोने का श्रीयंत्र, अयोध्या के लिए रवाना हुई रथयात्रा
यह यंत्र आंध्रप्रदेश से एक विशेष रथ में यात्रा करते मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से होते हुए प्रयागराज पहुंचा है। इस रथ का स्वरूप किसी मंदिर से कम नहीं है, जिसमें श्री कांची कामकोटि पीठ का स्वरूप दर्शाया गया है।
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रामलला के गर्भगृह में 180 किलो सोने का प्रभु राम श्रीयंत्र स्थापित होगा। कांची मठ के धर्म प्रचारक रामचंद्रन के नेतृत्व में सोने के इस श्रीयंत्र की रथयात्रा लेकर वैदिक आचार्यों का दल रविवार को प्रयागराज पहुंचा। सोमवार को रथयात्रा अयोध्या स्थित कार सेवकपुरम पहुंचेगी।
वहां देशभर के वैदिक आचार्यों की मौजूदगी में महायज्ञ के बाद इस राम श्रीयंत्र को रामलला के गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा। अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव से एक दिन पहले 21 जनवरी को राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सचिव चंपत राय के आग्रह पर कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने रामलला की बाल स्वरूप प्रतिमा में राम बीजमंत्र के प्राण अभिसिंचित किया था।
शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र ने उसी दिन गर्भगृह में सोने का राम श्रीयंत्र स्थापित करने का संकल्प लिया था। स्वर्ण पत्तरों से मंडित श्रीयंत्र तैयार होने के बाद 17 अक्तूबर को कांची मठ से भव्य रथ पर अयोध्या के लिए यात्रा निकाली गई।
वहां रथ की आरती उतारने के बाद राम श्रीयंत्र की सविधि मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई। सुबह आठ बजे रथयात्रा अयोध्या के लिए रवाना हुई। रथयात्रा के संचालक रामचंद्रन बताते हैं कि इस राम श्रीयंत्र की रामलला के गर्भगृह में स्थापना के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं।
राम श्रीयंत्र को कार सेवकपुरम में रखकर 40 दिन तक मंत्रों से अभिसिंचित करने के लिए महायज्ञ किया जाएगा। इसमें काशी, अयोध्या, मथुरा और प्रयागराज समेत अन्य जिलों से 1001 वैदिक आचार्य आमंत्रित किए गए हैं।
गोल्डन कोटिंग करने वाले विशेषज्ञों की मदद से कांची मठ की ओर से विशेष ऑर्डर पर इस श्रीराम यंत्र का निर्माण कराया गया है। विश्व में शांति और लोक मंगल की कामना से इसे कांची मठ के शंकराचार्य की ओर से रामलला के गर्भगृह में स्थापित कराया जाएगा। - रमणी शास्त्री, प्रबंधक, शंकर विमान मंडपम-कांची मठ, प्रयागराज