फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Shops in the Sri Krishna Janmasthan complex will be vacated, tenants had challenged eviction order High Court

High Court : श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर की दुकानें होंगी खाली, किरायेदारों ने बेदखली आदेश को हाईकोर्ट में दी थी

Mon, 17 Nov 2025 09:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 17 Nov 2025 09:47 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में दुकानों के कब्जे को लेकर चल रहे 25 साल से विवाद को समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि संस्था एक सार्वजनिक धार्मिक एवं धर्मार्थ ट्रस्ट है।

विज्ञापन
Shops in the Sri Krishna Janmasthan complex will be vacated, tenants had challenged eviction order High Court
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में दुकानों के कब्जे को लेकर चल रहे 25 साल से विवाद को समाप्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि संस्था एक सार्वजनिक धार्मिक एवं धर्मार्थ ट्रस्ट है। उसकी संपत्तियां यूपी किराया कानून के दायरे से बाहर हैं। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने दुकानें खाली करने का आदेश देते हुए दुकानदारों की याचिकाएं खारिज कर दीं। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने अशोक राघव, पदमा राघव व तीन अन्य की याचिका पर दिया है।

विज्ञापन


1944 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में श्रीकृष्ण जन्मस्थान के जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ था। 1951 में जुगल किशोर बिड़ला ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की स्थापना की। 1958 में इसके प्रबंधन के लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान नामक सोसाइटी पंजीकृत कराई। संस्थान ने परिसर के अंदर कुछ दुकानें बनवाकर उन्हें लाइसेंस के आधार पर 11 महीने के लिए अशोक राघव, पद्मा राघव और हरिश राघव को किराये पर दी थी। संस्थान ने 2000-2002 के दौरान इनके खिलाफ बेदखली के मुकदमे दायर किए। ट्रायल कोर्ट ने 30 अगस्त 2025 के आदेश से संस्थान के पक्ष में फैसला सुनाया। किरायेदारों ने इसको हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन


याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि संस्थान एक सार्वजनिक धार्मिक या धर्मार्थ ट्रस्ट नहीं है। इसलिए उत्तर प्रदेश अर्बन बिल्डिंग एक्ट-1972 लागू होना चाहिए, जो किरायेदारों को ज्यादा सुरक्षा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान के सचिव कपिल शर्मा के पास उनके खिलाफ मुकदमा दायर करने का अधिकार नहीं था। वहीं, प्रतिवादी संस्थान अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी ने दलील दी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थान पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुकानों पर अनधिकृत कब्जे के चलते वहां पर दिव्यांगों व श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। कोर्ट ने संस्थान को सार्वजनिक धार्मिक और धर्मार्थ संस्थान माना। कहा, संस्थान के संविधान के मुताबिक सचिव और संयुक्त सचिव को संस्थान की तरफ से मुकदमे चलाने का पूरा अधिकार है। कपिल शर्मा के अधिकार पर संस्थान के किसी भी ट्रस्टी या सदस्य ने आपत्ति नहीं की। इसलिए किरायेदार इस आधार पर मुकदमे को चुनौती नहीं दे सकते।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed