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अधिशासी अधिकारी भर्ती में प्रतियोगी छात्रों को झटका

Sun, 03 May 2020 02:17 PM IST
news desk amar ujala, prayagraj Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Sun, 03 May 2020 02:17 PM IST
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Shock to competitive students in executive officer recruitment
uppsc
खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) की तरह नगर पालिका अधिशासी अधिकारी के रिक्त पद भी प्रतिनियुक्ति से भरे जा रहे हैं, जबकि इन पदों पर पीसीएस परीक्षा के माध्यम से भर्ती होनी चाहिए। ऐसे में पीसीएस अभ्यर्थियों के लिए चयन के अवसर कम हो गए हैं। प्रतियोगी छात्रों ने प्रतिनियुक्ति से पद भरे जाने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मुख्यत्री को पत्र भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
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मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह एवं अन्य प्रतियोगी छात्रों की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बताया गया है कि पीसीएस-2017 के तहत संबंधित विभाग की ओर से नगर पालिका अधिशासी अधिकारी के दस पदों पर भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा गया था। लेकिन, पीसीएस-2018 और पीसीएस-2019 में कोई आयोग को कोई अधियाचन नहीं मिला और इन भर्तियों में नगर पालिका अधिशासी अधिकारी के पद शून्य हो गए।
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प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि पीसीएस-2020 के लिए भी नगर पालिका अधिशासी अधिकारी के पद पर भर्ती के लिए विभाग ने आयोग को कोई अधियाचन नहीं भेजा है और अब इसकी उम्मीद भी नहीं है। सीएम को लिखे गए पत्र में बताया गया है कि इस साल 60 स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारियों को नगर पालिका/जिला पंचायत अधिशासी अधिकारी के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई है। वहीं, 100 अन्य पदों को प्रतिनियुक्ति से भरे जाने के लिए साक्षात्कार की तैैयारी चल रही है और इसकी लिस्ट बनाई जा रही है।
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198 नगर पालिकाओं में 90 पद खाली पड़े हैं और उन्हें पीसीएस-2020 की भर्ती परीक्षा में शामिल किया जाना चाहिए। छात्रों का कहना है कि जिन विभागों के अफसरों को प्रतिनियुक्ति पर अधिशासी अधिकारी के पद पर भेजा जाएगा, उनके मूल विभाग का कामकाज प्रभावित होगा और इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी के रिक्त पद भी अन्य समूहों के अफसरों की प्रतिनियुक्ति से भरे जा रहे हैं। नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी के दो सौ से अधिक पद खाली हैं।


यह लोअर का पद है और इन पदों पर उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से भर्ती होनी चाहिए। प्रतियोगी छात्र नेता कौशल सिंह ने सवाल उठाए हैं कि इन सभी पदों को प्रतिनियुक्ति से भरे जाने के लिए नो ऑब्जेक्शन प्रमाणपत्र कैसे जारी कर दिया गय़ा? कौशल का आरोप है कि प्रतिनियुक्ति की आड़ में भ्रष्टाचार हो रहा है और बेरोजगार छात्रों से उनका अधिकार भी छीना जा रहा है। इसकी जांच होनी चाहिए।
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