शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले : गोमाता को सम्मान और सुरक्षा मिलने पर ही सुरक्षित रहेगी भारत माता की आत्मा
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि यह आंदोलन महाकुंभ मेले से प्रारंभ हुआ। सेक्टर 19 में रामा-गो संसद का आयोजन किया गया था। इसमें पांच लाख संतों ने भाग लिया था और 21 बिंदुओं पर धर्मादेश पारित कर गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करने का संकल्प लिया गया था।
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अरैल में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने शनिवार को रामाधाम गोशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि गो माता हमारी संस्कृति की आत्मा है। उन्हें राष्ट्रमाता का सांविधानिक दर्जा दिलाने के लिए देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। जब तक गो माता को सम्मान व सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक भारत की आत्मा सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
शंकराचार्य ने बताया कि यह आंदोलन महाकुंभ मेले से प्रारंभ हुआ। सेक्टर 19 में रामा-गो संसद का आयोजन किया गया था। इसमें पांच लाख संतों ने भाग लिया था और 21 बिंदुओं पर धर्मादेश पारित कर गोमाता को राष्ट्र माता घोषित करने का संकल्प लिया गया था। इसके बाद दिल्ली में पांच दिवसीय गो संसद का आयोजन किया गया, जिसमें सभी 543 लोकसभा क्षेत्रों से गो सांसदों को नामित किया गया।
बताया कि सरकारों द्वारा इस विषय पर चुप्पी साधे जाने के कारण अब यह निर्णय लिया गया है कि देश की सभी 4123 विधानसभा क्षेत्रों में गोशालाएं स्थापित की जाएंगी। इसी क्रम में नैनी अरैल स्थित प्राचीन ऋषि भारद्वाज की तपोभूमि के पास रामा धाम में गोशाला की स्थापना की गई है। इस गौशाला की स्थापना के लिए दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र की पूजा कौशिक ने अपनी भूमि समर्पित की। इस मौके पर धनंजय मिश्रा, अंकित चौरसिया, दीपक भारतीय, आशु सिंह, अर्पित तिवारी, संतोष यादव, पम्मी गुप्ता, नवीन रावत, उज्ज्वल यादव, सुमित मिश्रा आदि मौजूद रहे। संवाद
ऑपरेशन सिंदूर को लाभ के लिए बदला जाना दुर्भाग्यपूर्ण
शंकराचार्य ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अभियान शुरुआत में जनभावनाओं से जुड़ा हुआ था। बाद में जिस प्रकार से इसे लाभ के लिए बदला गया वह दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार सिंदूर की बात कर मां के दूध को लज्जित कर रही है। बकरीद पर उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर जीव हत्या का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि देश के कानूनों का पालन करें और गोवध जैसी क्रूरताओं से दूर रहें। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सिर्फ कानून बनाकर रह जाती है, लेकिन उसके पालन की कोई कोशिश नहीं करती।