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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले : विश्व के प्रताड़ित हिंदुओं को मिले भारत की नागरिकता, सरकार बनाए कानून
Sat, 25 Jan 2025 05:04 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 25 Jan 2025 05:04 PM IST
सार
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी में जम्बूद्वीप और जम्बूद्वीप में भी भारतवर्ष-भारतखंड सर्वश्रेष्ठ है।
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, ज्योतिष्पीठ।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी में जम्बूद्वीप और जम्बूद्वीप में भी भारतवर्ष-भारतखंड सर्वश्रेष्ठ है। क्योंकि धर्मदृष्टि से यही कर्म भूमि अर्थात धार्मिक दृष्टि से उपजाऊ भूमि है। बाकी भूमियां तो भोग भूमियां हैं। जिसे यहां जन्म मिला है वह भाग्यशाली है। इसलिए कोई भी हिंदू इस भारत भूमि से अपना नाता नहीं तोड़ना चाहता। परंतु भारत का कानून ऐसा है जिसमें किसी और देश की नागरिकता लेनी पड़े तो उसे भारत की नागरिकता छोड़नी पड़ती है, जो कि पीड़ादायक है।
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शनिवार को सेक्टर 19 शंकराचार्य शिविर में परमधर्मसंसद में हिंदू नागरिकता विषय पर विचार व्यक्त करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि यह भी तथ्य है कि पूरे विश्व में रहकर अपने योगदानों से पूरे विश्व के कोने-कोने को सींचने वाला हिंदू अगर किसी समय किसी परेशानी में पड़ता है तो उसके सामने प्रश्न है कि वह कहां जाए? ईसाई परेशान होगा तो उसके पच्चीसों देश हैं, चला जाएगा। मुसलमान परेशान हुआ तो उसके पचासों देश हैं, वहां चला जाएगा। पर हिंदू, आज बांग्लादेश में केवल इसलिए प्रताड़ित हो रहा है कि वह हिंदू धर्म को मानता है और उसे छोड़ना नहीं चाहता।
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बांग्लादेशी मुसलमानों से सताए जाने पर अपने प्राणों को बचाने के लिए जब वह अपना घर-बार छोड़कर भारत में आना चाहता है तो भारत की सीमा पर सेना-पुलिस उसे उसी ओर वापस कर देती है, जहां उसे प्राणभय सता रहा है। इन परिस्थितियों में परमधर्मसंसद 1008 भारत की सरकार से मांग करती है कि भारत को अपने संविधान में कड़े सुरक्षा उपायों के साथ संशोधन करना चाहिए और एक नागरिकता कानून पारित करना चाहिए।
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जिससे विश्वव्यापी प्रताड़ित हिंदुओं को भारत में प्रवास करने का अधिकार मिले और भारत आने के एक वर्ष के भीतर उन्हें नागरिकता प्रदान कर दी जाए। विषय विशेषज्ञ स्थापना मनोरंजन पांडेय ने किया। चर्चा में विशिष्ट अतिथि के रूप में ब्रह्मचारी सहजानंद, ब्रह्मचारी मुकुंदानंद उपस्थित रहे। साध्वी भक्तिगिरी माता,रुद्र प्रताप शुक्ला,आचार्य विजय प्रकाश मानव, राजा सक्षम सिंह ने विचार व्यक्त किए। संचालन देवेंद्र पांडेय ने किया।